Guru Pradosh Vrat 2020: जानिए गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
नई दिल्ली। यदि आपका विवाह नहीं हो पा रहा है। हर बार कोई ना कोई रूकावट आ रही है, या फिर आप अब तक संतान सुख से वंचित हैं तो आपको गुरु प्रदोष का व्रत अवश्य करना चाहिए। गुरु प्रदोष का शुभ संयोग 18 जून 2020 को आ रहा है। आजकल की सबसे बड़ी समस्या है समय पर विवाह का ना होना। अनेक युवक-युवतियां इस समस्या से जूझ रहे हैं। किसी ना किसी कारण से उनका विवाह टलता जा रहा है और वे विवाह की सामान्य उम्र भी पार कर गए हैं। इसका कारण उनकी कुंडली के ग्रह दोष हैं। यदि कुंडली में विवाह के लिए योग्य ग्रहों की स्थिति सही नहीं है तो लाख कोशिश करने के बाद भी विवाह नहीं हो पाएगा, लेकिन यदि सही और सटीक उपाय कर लिया जाए तो विवाह की बाधा दूर हो सकती है।

विवाह की सारी बाधाएं तोड़ देता है गुरु प्रदोष व्रत
जन्म कुंडली में विवाह का प्रमुख कारक ग्रह बृहस्पति होता है। बृहस्पति को ठीक करके विवाह की बाधा को दूर किया जा सकता है। इसके लिए कुछ दिन विशेष होते हैं जिन पर यदि उपाय या व्रत आदि किए जाएं तो तुरंत लाभ मिलता है। ऐसा ही एक शुभ व्रत है गुरु प्रदोष व्रत। प्रदोष व्रत प्रत्येक माह में दो बार आता है और प्रत्येक व्रत का अपना महत्व होता है। लेकिन गुरुवार के दिन यदि प्रदोष आ जाए तो यह ऐसे युवक-युवतियों के लिए सबसे बढ़िया मौका होता है जब वे यह व्रत करके अपने विवाह में आ रही बाधा दूर कर सकते हैं। यह व्रत केवल विवाह सुख ही नहीं देता, बल्कि नि:संतान दंपतियों को उत्तम संतान सुख भी प्रदान करता है। इस दिन भगवान शिव व्रत करने वालों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

कैसे करें प्रदोष की पूजा
- प्रदोष के दिन व्रती सूर्योदय के समय उठ जाए और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर साफ-स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- अपने पूजा स्थान को साफ करके हाथ में थोड़े से चावल, पुष्प, सिक्का और जल डालकर प्रदोष व्रत का संकल्प लें।
- शिव सहित संपूर्ण शिव परिवार की पूजा करें।
- दिन भर निराहार रहे। शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव का पंचोपचार पूजन संपन्न् करें। गुरु प्रदोष की कथा सुनें।
- पूजा में बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल आदि का प्रयोग जरूर करें।
- नैवेद्य में दूध से बनी मिठाई का भोग जरूर लगाएं।

शीघ्र विवाह के लिए कैसे करें गुरु प्रदोष पूजा
जिन युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो रहा है वे गुरु प्रदोष व्रत का संकल्प लें। व्रत के दिन सूर्योदय के समय पीतल के लोटे में शुद्ध जल में हल्दी, गुड़ और थोड़ी सी चने की दाल डाल लें और इसे केले के पेड़ की जड़ में अर्पित करें। कच्चे सूत को हल्दी से रंगकर केले के पेड़ के तने पर सात फेरे लगाते हुए लपेटें। इसके बाद वहीं पर गाय के घी का दीपक जलाएं और पीले रंग के आसन पर बैठकर बृहस्पति स्तोत्र का 7 बार पाठ करें। घर वापस आते समय केले के पेड़ की जड़ से थोड़ी सी मिट्टी लेकर उसका तिलक करें और भगवान विष्णु का ध्यान करें। इससे शीघ्र ही विवाह का मार्ग खुलने लगता है। ध्यान रहे इस दिन पीले कपड़े ही पहनें।
उत्तम संतान के लिए कैसे करें गुरु प्रदोष पूजा
जिन दंपतियों के विवाह को लंबा समय हो गया और संतान नहीं हो पा रही है, वे गुरु प्रदोष का व्रत रखें। फिर किसी ऐसे शिव मंदिर में जाएं जहां पूरा शिव परिवार मौजूद हो। मतलब वहां शिवजी के अलावा मां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी की मूर्तियां भी हों। ऐसे शिव में मंदिर में समस्त पूजन सामग्री लेकर जाएं। शिवजी का अभिषेक केसर के दूध से करें। बाकी शिव परिवार को जल से स्नान करवाएं और पूजन करें। शुद्ध घी का दीपक लगाकर गणपति संतान स्तोत्र का पाठ करें। मिठाई का नैवेद्य लगाएं। शीघ्र संतान का सुख मिलता है।

अन्य लोग ये उपाय करें
- गुरु प्रदोष का व्रत अनेक सुख, सौभाग्य, संपत्ति प्रदान करता है।
- यदि आप लक्ष्मी सुख पाना चाहते हैं तो गुरु प्रदोष के दिन स्नान के जल में केसर या केवड़े का इत्र डालकर स्नान करें।
- इस दिन पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। विष्णु भगवान को पीले और मां लक्ष्मी को लाल गुलाब के फूल अर्पित करें।
- पूजा में पीला कपड़ा, चने की दाल, बेसन की बनी मिठाई या पीले फल जैसे आम, केले, पपीता आदि रखें।
- इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- गुरु प्रदोष के दिन पीपल के पेड़ के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाकर विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से सर्व सुख प्राप्त होते हैं।
- इस दिन पारिवारिक कलह दूर करने के लिए पीपल में जनेऊ का जोड़ा और पीली मिठाई रखें।












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