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बेंगलुरू गवी गंगाधरेश्वर मंदिर, जहां मकर संक्रान्ति पर स्‍वयं सूर्य देवता करते हैं शिवलिंग का अभिषेक

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बेंगलुरू, 07 जनवरी। भारत के हर कोने में भगवान के प्राचीन मंदिर हैं जहां होने वाले चमत्‍कार सुनकर हर कोई हैरान हो जाता है। ऐसा ही एक शिव भगवान का मंदिर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में स्थित है यहां वर्ष में केवल एक बार होने वाली अद्भुद घटना किसी दैवीय चमत्‍कार से कम नहीं है। यहां मकरसंक्रान्ति को हर साल ऐसी अद्भुद दृश्‍य नजर आता है जिसके बारे में आप कभी कल्‍पना भी नहीं कर सकते।

गौतम ऋषि ने की थी यहां तपस्‍या

गौतम ऋषि ने की थी यहां तपस्‍या


बेंगलुरू का ये पौराणिक मंदिर गवी गंगाधरेश्वर मंदिर है जहां गौतम ऋषि ने भोले शंकर को प्रसन्‍न करने के लिए वर्षों तपस्‍या की थी। मान्‍यता है कि इस मंदिर की गुफा में जो शिवलिंग है वो स्‍वयं भू हैं, यानी किसी ने इसे बनाया नहीं है ये पहाड़ों में शेप लेकर ये शिवलिंग अपने आप प्रकट हुआ है।

स्‍वयं भू मंदिर का 9वीं शताब्दी में हुआ था निर्माण

स्‍वयं भू मंदिर का 9वीं शताब्दी में हुआ था निर्माण

इस मंदिर का आधुनिक इतिहास 9वीं एवं 16वीं शताब्दी से है। गुफा में स्‍वयं भू शिवलिंग है, वहां कैम्पे गौड़ा ने 9वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण कराया वहीं 16वीं शताब्दी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार बेंगलुरु के संस्थापक कैम्पे गौड़ा प्रथम ने करवाया और इसे भव्‍य बनवाया।

मकरसंक्रान्ति पर खुद सूर्य देवता करते हैं शिवलिंग का अभिषेक

मकरसंक्रान्ति पर खुद सूर्य देवता करते हैं शिवलिंग का अभिषेक

मकरसंक्रान्ति में इस मंदिर में होने वाले अद्भुद संयोग की बात करे तो अगर सीधे शब्दों में कहे तो इस मंदिर में इस खास दिन सूर्य देवता खुद अपनी किरणों शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। दरअसल, मकरसक्रान्ति पर सूर्य भगवान उत्‍तरायण होते हैं। जिस कारण गुफा में स्थित शिवलिंग जहां सूर्य की किरणें साल भर नहीं पहुंचती इस खस दिन महज 5 से 8 मिनट के लिए सूर्य की किरणें गर्भगृह तक पहुंचती है और शिवलिंग को अपनी स्‍वर्णिम लालिमा से अभिषेक करती हैं।

 सूर्यास्त के ठीक पहले दिखता है ये अइभुत नजारा

सूर्यास्त के ठीक पहले दिखता है ये अइभुत नजारा

मंदिर में काफी सकरी सीढि़यों से नीचे स्थित गर्भग्रह में ये शिवलिंग है। इस गर्भग्रह की ऊंचाई केवल 6 फुट है। यहां पर हर साल मकरसंक्रान्ति पर येअदभुद नजारा देखने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं।मकरसक्रान्ति पर सूर्यास्त के ठीक पहले सूर्य की किरणें मंदिर में बने ऊंचे स्‍तंभो को छूते हुए भगवान शिव की नंदी की दोनों सींगों के एकदम मध्य से होते हुए गर्भगृह तक आती है और इस समय भोले शंकर का गर्भगृह स्वर्णिम किरणों से सुसज्जित हो जाता है। ये नजारा देखकर बिलकुल ऐसा प्रतीत होता है कि सूर्य की किरणें सीधे शिवलिंग का अभिषेक कर उनकी अर्चना कर रही हैं।

विज्ञान और धर्म का है ये अद्भुत संगम

विज्ञान और धर्म का है ये अद्भुत संगम

गवी गंगाधरेश्वर मंदिर में ये अद्भुद नजारा साल में एक बार नजर आता है इसके पीछे की वजह विज्ञान और पौराणिक मंदिर की बनावट है। दक्षिण भारत के मंदिरों इस मंदिर की बनावट अलग है ये मंदिर की दक्षिण-पश्चिमी दिशा अर्थात नैऋत्य कोण की तरफ है। जिससे मालूम होता है कि प्राचीन समय में इस मंदिर का नक्‍शा तैयार करने वाले वास्‍तुविद नक्षत्रा विज्ञान के ज्ञानी थे।

 शिवलिंग पर घी चढ़ाते ही बन जाता है मक्‍खन

शिवलिंग पर घी चढ़ाते ही बन जाता है मक्‍खन

इस मंदिर में आप आकर एक और चमत्‍कार देख सकते हैं जब शिवलिंक पर घी चढ़ाया जाता है तो वो मक्‍खन बन जाता है ये भी भोले भंडारी का चमत्‍कार है। सामान्‍य तौर पर मक्‍खन से घी बनता है कभी घी से वापस मक्‍खन नहीं बनता। वहीं इस प्राचीन मंदिर की एक और खासियत है कि कहते हैं इस मंदिर से सीधे वाराणसी तक सुरंग है लेकिन इसमें दो लोग गए लेकिन कभी वापस नहीं आए।

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English summary
Gavi Gangadhareshwara Temple in Bangalore, where the Sun God himself anoints Shivalinga on Makar Sankranti
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