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Diwali Katha: ऋषिपुत्री थीं विष्णुप्रिया लक्ष्मी, जानिए दिवाली की ये कथा

By Pt. Gajendra Sharma
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Diwali Katha: हमारे पुराणों में एक ही कथा कई रूपों और जानकारियों के साथ नए- नए रूप में पढ़ने को मिलती है। इसी परिप्रेक्ष्य में माता लक्ष्मी के भी अनेक रूप और नामों के साथ- साथ उनके जन्म की कथा में भी विविधता देखने में आती है। लक्ष्मी जी के अवतरण की एक कथा समुद्र मंथन से उनके अलौकिक प्राकट्य का वर्णन करती है। दूसरी कथा में लक्ष्मी जी एक सामान्य कन्या के रूप में वर्णित हैं।

ऋषिपुत्री थीं विष्णुप्रिया लक्ष्मी, जानिए दिवाली की ये कथा

आइये, दीपावली के पावन अवसर पर इस दूसरी कथा का भी आनन्द लेते हैं..

प्राचीन भारत में भृगु नाम के एक ऋषि थे। ऋषि भृगु का तेज, पांडित्य, ज्ञान इतना प्रबल था कि देवता भी उनसे मार्गदर्शन लिया करते थे। ऋषि भृगु के पास तीनों लोकों में भ्रमण की शक्ति थी। ऐसे महा तेजस्वी ऋषि की पत्नी भी साधारण नहीं थीं। ऋषिपत्नी ख्याति भी महान ज्ञानी और तपस्विनी थीं। इन दोनों असाधारण विभूतियों के यहाँ एक कन्या रत्न ने जन्म लिया। यह बालिका अपूर्व रूप, गुणों से युक्त थी। इस बालिका का नाम ही लक्ष्मी रखा गया। लक्ष्मी शब्द का अर्थ लक्ष्य+ मी अर्थात लक्ष्य तक ले जाने वाली देवी होता है। ऋषि भृगु के 2 पुत्र धाता और विधाता तथा एक और पुत्री अलक्ष्मी थी। दोनों पुत्रियां सदा ही साथ रहती थीं।

मन में भगवान विष्णु के लिए मुग्धमान छवि

ऋषि भृगु और देवी ख्याति विष्णु जी के परम भक्त थे। बचपन से ही लक्ष्मी ने अपने घर में भगवान विष्णु की प्रशंसा, आराधना होते देखी थी। इस तरह उनके मन में भगवान विष्णु के लिए एक मुग्धमान छवि बन गई। लक्ष्मी देवी ने निश्चय किया कि विवाह तो वे महाविष्णु से ही करेंगी। अपने निश्चय को पूरा करने के लिए लक्ष्मी देवी ने सैकड़ों वर्षों तक सागर तट पर तप किया। अंततः महाविष्णु प्रकट हुए और लक्ष्मी जी का वरण कर अपने साथ क्षीरसागर ले गए।

चमत्कारिक शक्ति वाली मां लक्ष्मी

इस कथा पर विचार करें, तो यहाँ महालक्ष्मी एक पारिवारिक कन्या और आम युवती की भूमिका में दिखती हैं। इन महालक्ष्मी और समुद्र मंथन से प्रकट हुई चमत्कारिक शक्ति वाली मां लक्ष्मी में कोई साम्य दिखाई नहीं देता। पुराणों में लक्ष्मी माता के अष्टरूपों का वर्णन मिलता है। ऐसा माना जाता है कि जो लक्ष्मी देवी समुद्र मंथन से प्रकट हुईं, वे माता धनलक्ष्मी हैं। इस रूप में देवी लक्ष्मी अपने हाथ में धारण किए स्वर्ण कलश से धन की वर्षा करती हैं। स्वर्ग का वैभव और कुबेर का भंडार धनलक्ष्मी मां ही परिपूर्ण करती हैं। इसके साथ ही जो लक्ष्मी ऋषि भृगु और माता ख्याति की पुत्री तथा भगवान विष्णु की पत्नी हैं, वे संसार को समस्त शुभता प्रदान करने वाली महालक्ष्मी हैं। वास्तविकता यही है कि मां लक्ष्मी के चाहे जिस रूप की पूजा की जाए, वे शुभता प्रदान करने वाली, सामर्थ्य देने वाली और समस्त ब्रह्मांड को आलोकित करने वाली अद्भुत शक्ति स्वरूपा ही हैं।

यह पढ़ें: Diwali 2020: जानिए मां लक्ष्मी कब और कैसे प्रकट हुईं, पढ़ें दिवाली कथा

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English summary
Diwali will celebrated on 14th November, here is Maa Lakshmi story.
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