ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजे गए अमरकांत और श्रीलाल शुक्ल

Delhi: Amar Kant, Shrilal Shukla, Kambar win Jnanpith Award
नई दिल्ली। ज्ञानपीठ पुरस्कारों की घोषणा हो गई है। भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक रविंद्र कालिया ने बताया कि सोमवार शाम चयन समिति ने अपनी बैठक में मशहूर लेखक अमरकांत और श्रीलाल शुक्ल को 45वां और कन्नड़ लेखक चंद्रशेखर कांबर को 46वां ज्ञानपीठ पुरस्कार देने का फैसला किया है।

उत्तर प्रदेश के बलिया में 1925 में जन्मे हिन्दी के नामचीन लेखक अमरकांत के प्रमुख उपन्यास 'कंटीली राह के फूल, 'इन्हीं हथियारों से, 'सूखा पत्ता, 'काले उजले और बीच की दीवार शामिल हैं। अमरकांत मनोरमा पत्रिका के संपादक भी रहे हैं। उनके अभी तक 12 उपन्यास, 11 कहानी संग्रह, संस्मरण और बाल साहित्य प्रमुख है। उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार और साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुके हैं।

उधर, श्रीलाल शुक्ल ने कहा कि बीमारी की हालत में ज्ञानपीठ सम्मान मिलने की जानकारी मिली। खुशी हुई, लेकिन इस उम्र में यह सम्मान रोमांचित नहीं करता। इतना कहने के बाद एक लंबी खामोशी। पुत्रवधू साधना ने बीच में टोका तो खामोशी टूटी। कहती हैं कि पिताजी को बहुत पहले यह सम्मान मिल जाना चाहिए था। इस पर श्रीलाल शुक्ल मुस्कुराते हुए उन्हें शुक्रिया कहते हैं। अंदाज मजाकिया था। कथा साहित्य में उद्देश्यपूर्ण व्यंग्य लेखन के लिए विख्यात श्रीलाल शुक्ल को ज्ञानपीठ सम्मान के लिए चुना गया है। जीवन के 86 वसंत देख चुके श्रीलाल शुक्ल इससे पहले साहित्य अकादमी और पद्मभूषण से भी सम्मानित हो चुके हैं।

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