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Chaturmas 2020: इस बार ज्यादा सोएंगे भगवान श्रीहरि विष्णु, 148 दिनों का होगा चातुर्मास

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। जप-तप और साधना-सिद्धि का पवित्र चातुर्मास 1 जुलाई 2020 से प्रारंभ हो रहा है। भगवान श्रीहरि विष्णु के योगनिद्रा में चले जाने के कारण चातुर्मास में मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध लग जाता है। इस बार चातुर्मास में अधिकमास होने से चातुर्मास की अवधि बढ़कर 148 दिन हो गई है। इस वर्ष आश्विन माह का अधिकमास है। चातुर्मास 1 जुलाई देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर 25 नवंबर 2020 देवोत्थान एकादशी तक रहेगा। इस दौरान एक ओर जहां विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं, वहीं तीज-त्योहारों का उल्लास भी छाएगा। अधिकमास के कारण आश्विन मास से लेकर आगे के महीनों में आने वाले तीज-त्योहार भी 20 से 25 दिन तक आगे बढ़ जाएंगे।

वर्षाकाल का भी समय होता है चातुर्मास

वर्षाकाल का भी समय होता है चातुर्मास

आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चार माह का समय चातुर्मास कहलाता है। यही समय वर्षाकाल का भी होता है। इसलिए इन चार माह में खानपान से लेकर समस्त प्रकार के संयम रखना होते हैं, ताकि शरीर को किसी भी प्रकार के रोग ना घेर लें। ये चार माह धर्म, कर्म, व्रत-उपवास, ईश्वर का ध्यान, साधना, मंत्र जप और दान धर्म के लिए अत्यंत पवित्र होते हैं।

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चातुर्मास भगवान विष्णु का शयनकाल का होता है...

चातुर्मास भगवान विष्णु का शयनकाल का होता है...

चातुर्मास भगवान विष्णु का शयनकाल का होता है। पुराणों के अनुसार इस दौरान विवाह सहित कई मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। तपस्वी भ्रमण न करते हुए एक स्थान पर ही रहते हैं। लेकिन इस दौरान घर का निर्माण प्रारंभ, गृह प्रवेश, उग्रदेवता की प्रतिष्ठा, नवीन दुकान का उद्घाटन, वाहनों का क्रय-विक्रय किया जा सकता है। चातुर्मास का महत्व जैन और बौद्ध धर्मों में भी माना जाता है। चातुर्मास के दौरान जैन मुनि भ्रमण बंद करके एक ही जगह निवास करते हैं। देवशयनी एकादशी पर भगवान योगनिद्रा में जाते हैं, जबकि देवउठनी एकादशी पर भगवान निद्रा से जागते हैं। भगवान के निद्रा से जागने के बाद विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन सहित विभिन्ना मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं। इस बार चातुर्मास में आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन (प्रथम), अश्विन (द्वितीय) और कार्तिक मास होंगे। पहला अश्विन मास 3 सितंबर से 1 अक्टूबर और दूसरा 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा।

क्यों होता है अधिकमास

क्यों होता है अधिकमास

इस वर्ष अधिकमास या पुरुषोत्तम मास 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा। हिंदू पंचांग में एक माह में कृष्ण व शुक्ल पक्ष होते हैं। इसमें तिथियों की घट-बढ़ होती है। सूर्य वर्ष 365 और चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। एक साल में 11 दिन का अंतर आता है और लगभग 32 माह 16 दिन बाद एक माह बढ़ जाता है। सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाने के लिए तीन वर्ष में अधिकमास का समावेश किया जाता है। इससे तीन साल में एक महीने की वृद्धि हो जाती है।

शिव परिवार के हाथ रहेगा सृष्टि का संचालन

शिव परिवार के हाथ रहेगा सृष्टि का संचालन

धर्म शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के संचालन का कार्य भगवान विष्णु के हाथ में रहता है, लेकिन उनके शयनकाल में चले जाने के कारण सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव और उनके परिवार पर आ जाता है। इसलिए चातुर्मास में भगवान शिव और उनके परिवार से जुड़े व्रत-त्योहार आदि मनाए जाते हैं। श्रावण माह पूरा भगवान शिव को समर्पित रहता है। इसमें श्रद्धालु एक माह उपवास रखते हैं। बाल-दाढ़ी नहीं कटवाते हैं। शिव मंदिरों में विशेष अभिषेक पूजन आदि संपन्न् किए जाते हैं। इसके बाद भादव माह में दस दिनों तक भगवान श्रीगणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसके बाद आश्विन माह में देवी दुर्गा की आराधना शारदीय नवरात्रि में जाती है।

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English summary
Chaturmas will starts on Jul 1st 2020 and ends on Nov 25th,2020, during this time, Lord Vishnu was able to do so in Yoga Nidra.
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