Chaitra Navratri 2023: आज है ब्रह्मचारिणी का दिन, मंदिरों में गूंज रहे हैं मां के जयकारे, जानिए पूजा मुहूर्त
Second day of Chaitra Navratri 2023: आदिशक्ति के नौ दिनों में मां के नौ रूपों की अराधना की जाती है। मां के सभी रूप काफी पावन और मोहक हैं।

Goddess Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, मां का ये रूप बेहद ही सरस और मोहक हैं। मां अपने भक्तों पर दोनों हाथों से प्रेम लुटाती हैं। मां की महिमा अपरमपार है, जिन्हें शब्दों में परिभाषित करना काफी मुश्किल है। अगर आप जीवन में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार की आशा रखते हैं तो आज के दिन मां के इस विशेष रूप की पूजा जरूर करें। आज सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना हो रही हैं और लोग जमकर देवी मईया के जयकारे लगा रही हैं।
जाानिए पूजा का शुभ मुहूर्त
- Drik Panchang के मुताबिक चैत्र शुक्ल द्वितीया तिथि 22 मार्च को रात 8:20 मिनट पर लग चुकी हैं इसलिए मां का पूजन आज 6:20 PM तक कर सकते हैं।
- वैसे पूजा का शुभ मुहूर्त 6:22 AM से 7:54 AM तक है।
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:48 AM से 5:35 AM
- अभिजित मुहूर्त : 12:04 PM बजे से 12:52 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त- 05:27 PM से 05:51 PM
- अयन : उत्तरायण
- तिथि : द्वितीया सायं 6.20 तक
- नक्षत्र : रेवती दोपहर 2.07 तक
- योग : ऐंद्र रात्रि 3.41 तक
पूजा विधि
- मां ब्रह्मचारिणी की पूजा पूरे मन के साथ करनी चाहिए।
- कुछ लोग आज उपवास भी रखते हैं।
- देवी को कलश में चमेली के फूल, चावल और चंदन चढ़ाया जाता है।
- दूध, दही और शहद मां को अर्पिक कीजिए।
- आरती कीजिए, प्रार्थना कीजिए और प्रसाद बांटिए।
मंत्र
- ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
- या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
- नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
!! स्तोत्र !!
- तपश्चारिणीत्वंहितापत्रयनिवारिणीम्।
- ब्रह्मरूपधराब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
- नवचक्रभेदनी त्वंहिनवऐश्वर्यप्रदायनीम्।
- धनदासुखदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
- शंकरप्रियात्वंहिभुक्ति-मुक्ति दायिनी।
- शान्तिदामानदा,ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्।
!! स्तोत्र !!
- वन्दे वांच्छितलाभायचन्द्रर्घकृतशेखराम्।
- जपमालाकमण्डलुधराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
- गौरवर्णास्वाधिष्ठानास्थितांद्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
- धवल परिधानांब्रह्मरूपांपुष्पालंकारभूषिताम्॥
- पद्मवंदनापल्लवाराधराकातंकपोलांपीन पयोधराम्।
- कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीनिम्न नाभि नितम्बनीम्॥












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