Annapurna Jayanti 2021: अन्नपूर्णा जयंती आज, जानिए पूजा विधि
नई दिल्ली, 19 दिसंबर। आज है अन्नपूर्णा जयंती,हर वर्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है, माना जाता है कि मां अन्नपूर्णा मां पार्वती का ही रूप हैं, जिन्होंने धरती पर अन्न की कमी की पूर्ति के लिए अन्नपूर्णा रूप धारण किया था। वो भगवान शिव की पत्नी के रूप में काशी में विराजती हैं और इसी कारण कहा जाता है कि काशी में रहने वाला इंसान कभी भी भूखा नहीं रहता है।

वैसे पूर्णिमा शनिवार को ही लग गई इसलिए कहीं-कहीं अन्नपूर्णा जयंती 18 दिसंबर को भी मनाई गई लेकिन काशी के पंडित ज्ञानेश्वर पांडे के मुताबिक मां अन्नपूर्णा की जंयती रविवार को ही मनाना उचित है। अन्नपूर्णा जयंती पर अन्नपूर्णा जी कि विशेष आरती करनी चाहिए, ऐसा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
अन्नपूर्णा जी की आरती
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,
- कहां उसे विश्राम ।
- अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,
- लेत होत सब काम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,
- कालान्तर तक नाम ।
- सुर सुरों की रचना करती,
- कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- चूमहि चरण चतुर चतुरानन,
- चारु चक्रधर श्याम ।
- चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,
- शोभा लखहि ललाम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम
- देवि देव! दयनीय दशा में,
- दया-दया तब नाम ।
- त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,
- शरण रूप तब धाम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या,
- श्री क्लीं कमला काम ।
- कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,
- वर दे तू निष्काम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- ॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥
पूजा विधि
- सुबह नहाधोकर स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- मां अन्नपूर्णो का 16 श्रृंगार कीजिए।
- उन्हें हवा-पूड़ी का भोग लगाएं।
- सच्चे मन और पूरी आस्था से उनकी प्रार्थना करें।
- फिर उनकी आरती करें।












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