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Anant Chaturdashi Vrat 2021: जानिए अनंत चतुर्दशी कब है?

By Gajendra Sharma
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नई दिल्ली, 15 सितंबर। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर 19 सितंबर 2021, रविवार को दस दिनी गणेशोत्सव का समापन होगा और इसी दिन अनंत चतुर्दशी व्रत किया जाएगा। अनंत चतुर्दशी का व्रत उत्तम संतान की प्राप्ति, कष्टों के निवारण और अनंत गुना सुख प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। इस व्रत के बारे में शास्त्रों का कथन है कियह समस्त प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाता है, आर्थिक संकटों का समाधान करता है और नि:संतान दंपतियों को उत्तम संतान सुख प्रदान करता है।

Anant Chaturdashi Vrat 2021: जानिए अनंत चतुर्दशी कब है?

3 घंटे 2 मिनट का पूजन मुहूर्त

19 सितंबर 2021, रविवार को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि मध्यरात्रि के बाद तक अर्थात् 20 सितंबर को तड़के सूर्याेदय पूर्व 5.28 बजे तक रहेगी। इस दिन शतभिषा नक्षत्र रात्रि 3.28 बजे तक रहेगा। धृति योग, गर करण रहेगा। इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्र कुंभ राशि में गोचर करेगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त प्रात: 11.56 बजे से 12.45 बजे तक रहेगा। अनंत चतुर्दशी पूजन प्रात: 9.18 बजे से दोपहर 12.20 बजे तक किया जा सकता है।

कैसे किया जाता है अनंत चतुर्दशी व्रत

अनंत चतुर्दशी के दिन व्रती को प्रात:स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए। पूजा घर में कलश स्थापित करें और कलश पर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद सूत के धागे में चौदह गांठें लगाएं। इस अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के समक्ष रखें। भगवान विष्णु तथा अनंतसूत्र की षोडशोपचार पूजा करें। भगवान को मिष्ठान्न तथा फलों का नैवेद्य लगाएं। ओम अनंताय नम: मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद अनंत को स्त्री और पुरुष अपने हाथों में बांध लें और अनंत चतुर्दशी व्रत की कथा सुनें। अनंतसूत्र बांधने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं। यथायोग्य दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं अपने परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

क्या होता है अनंत

अनंत चतुर्दशी व्रत में सूत या रेशम के धागे को कुमकुम से रंगकर उसमें चौदह गांठें लगाई जाती हैं। ये 14 गांठें भगवान श्री हरि के 14 लोकों की प्रतीक मानी गई है। गांठ लगाकर राखी की तरह का अनंत बनाया जाता है। इस अनंत रूपी धागे को पूजा में भगवान विष्णु पर अर्पित करके व्रती अपनी भुजा में बांधते हैं। यह अनंत हम पर आने वाले सब संकटों से रक्षा करता है। यह अनंत धागा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल देता है। नि:संतान दंपती इस व्रत को करके संतान सुख की प्राप्ति कर सकते हैं।

महाभारत काल में हुई थी शुरुआत

महाभारत काल में इस व्रत की शुरुआत मानी जाती है। जब पांडव जुएं में अपना राज्य गंवाकर वन-वन भटक रहे थे, तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी व्रत करने को कहा। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों व द्रौपदी के साथ इस व्रत को किया। तभी से इस व्रत का चलन शुरू हुआ। भारत के कई भागों में इस व्रत को किया जाता है। पूर्ण विश्वास के साथ व्रत करने पर यह अनंत फलदायी होता है। इससे अनेक प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।

English summary
Anant Chaturdashi Vrat on 19th September 2021, here is Significance and Importace.
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