Anant Chaturdashi vrat 2020: अनंत सुख और संतान प्राप्ति के लिए करें अनंत चतुर्दशी व्रत
नई दिल्ली। दस दिनी गणेशोत्सव का समापन 1 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ होगा। गणपति की विदाई के दिन सर्व सुख प्रदाता, कष्ट निवारक अनंत चतुर्दशी का व्रत किया जाता है। अनंत चतुर्दशी का व्रत मुख्यत: उत्तम संतान की प्राप्ति और कष्टों के निवारण के लिए किया जाता है। यह व्रत 1 सितंबर 2020, मंगलवार को किया जाएगा। इस व्रत को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन किया जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। इस व्रत के बारे में शास्त्रों का कथन है कि यह समस्त प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाता है, आर्थिक संकटों का समाधान करता है और नि:संतान दंपतियों को उत्तम संतान सुख प्रदान करता है।

चतुर्दशी तिथि कब से कब तक
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ 31 अगस्त प्रात: 8.48 बजे से
चतुर्दशी तिथि पूर्ण 1 सितंबर प्रात: 9.38 बजे तक
चतुर्दशी तिथि का पंचांग
1 सितंबर 2020, मंगलवार को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि प्रात: 9.38 बजे तक रहेगी। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र सायं 4.36 बजे तक रहेगा। अतिगंड योग, वणिज करण रहेगा। इस दिन सूर्य सिंह राशि में और चंद्र कुंभ राशि में गोचर करेगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12.01 बजे से 12.51 बजे तक रहेगा। अनंत चतुर्दशी पूजन प्रात: 9.18 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया जा सकता है।

सूत या रेशम के धागे का प्रयोग
अनंत चतुर्दशी व्रत में सूत या रेशम के धागे को कुमकुम से रंगकर उसमें चौदह गांठें लगाई जाती हैं। ये 14 गांठें भगवान श्री हरि के 14 लोकों की प्रतीक मानी गई है। गांठ लगाकर राखी की तरह का अनंत बनाया जाता है। इस अनंत रूपी धागे को पूजा में भगवान विष्णु पर अर्पित करके व्रती अपनी भुजा में बांधते हैं। पुरुष दाएं तथा स्त्रियां बाएं हाथ में अनंत बांधती है। मान्यता है कि यह अनंत हम पर आने वाले सब संकटों से रक्षा करता है। यह अनंत धागा भगवान विष्णु को प्रसन्न् करने वाला तथा अनंत फल देता है। नि:संतान दंपती इस व्रत को करके संतान सुख की प्राप्ति कर सकते हैं।

श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने किया था व्रत
महाभारत काल में इस व्रत की शुरुआत मानी जाती है। जब पांडव जुएं में अपना राज्य गंवाकर वन-वन भटक रहे थे, तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी व्रत करने को कहा। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों व द्रौपदी के साथ इस व्रत को किया। तभी से इस व्रत का चलन शुरू हुआ। भारत के कई भागों में इस व्रत को किया जाता है। पूर्ण विश्वास के साथ व्रत करने पर यह अनंत फलदायी होता है।

अनंत चतुर्दशी व्रत की पूजन विधि
अनंत चतुर्दशी के दिन व्रती को प्रात:स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए। पूजा घर में कलश स्थापित करें और कलश पर भगवान विष्णु का चित्र स्थापित करें। इसके बाद सूत के धागे में चौदह गांठें लगाएं। इस प्रकार अनंतसूत्र तैयार हो जाने पर इसे भगवान विष्णु के समक्ष रखें। इसके बाद भगवान विष्णु तथा अनंतसूत्र की षोडशोपचार विधि से पूजा करें तथा ओम अनंताय नम: मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद अनंत को स्त्री और पुरुष अपने हाथों में बांध लें और अनंत चतुर्दशी व्रत की कथा सुनें। अनंतसूत्र बांधने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं। यथायोग्य दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं अपने परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।












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