Anant Chaturdashi 2022: अनंत चतुर्दशी आज, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और महत्व
Anant Chaturdashi 2022: आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, जिसे कि लोग अनंत चतुर्दशी कहते हैं। आज के दिन लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि आज के दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा करने पर अनंत फल और विष्णु लोक मिलता है। इस पर्व को अनंत चौदस भी कहा जाता है।

इस व्रत का जिक्र महाभारत में भी है, कहा जाता है कि जब पांडवों को वनवास हुआ था तो उन्होंने भगवान कृष्ण के कहने पर हर साल अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा था, ये उस व्रत की कृपा ही थी, जिसके कारण उन्हें महाभारत के युद्द में सफलता हासिल हुई थी तो वहीं कहा जाता है सत्यवादी हरिशचंद्र को भी अपना राजपाट और परिवार इस व्रत की कृपा से मिला था। आज के ही दिन गणपति बाबा की विदाई होती है, यानी कि आज गणेश विसर्जन भी किया जाता है और आज के दिन लोग व्रत भी रखते हैं।
अनंत चतुर्दशी 2022 मुहूर्त
- अनंत चतुर्दशी तिथि 8 सितंबर 2022, शाम 9 बजकर 02 मिनट से आरंभ हो चुकी है।
- अनंत चतुर्दशी तिथि समाप्त 9 सितंबर 2022, शाम 6 बजकर 07 मिनट पर होगी।
- पूजा का मुहुर्त - आज शाम 06:07 मिनट तक है।
- शुभ संयोग: सुकर्मा और रवि योग
महत्व
आपको बता दें कि आज का व्रत 'अनंत चतुर्दशी' का व्रत मुख्यत: उत्तम संतान की प्राप्ति और कष्टों के निवारण के लिए किया जाता है। आज का व्रत करने से इंसान को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है और यशस्वी बनता है। साथ ही यह व्रत समस्त प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाता है, आर्थिक संकटों का समाधान करता है। आज के दिन दान-पुण्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मंत्र
श्रीहरि की पूजा इन मंत्रों से करें
- प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्।
- तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।।
- प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्।
- अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।।
लक्ष्मी-विनायक मंत्र
- दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
- धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
- श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरदे सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।।
पूजा विधि
- सुबह-सुबह सबसे पहले स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- फिर मंदिर में भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- कुमकुम, केसर और हल्दी अर्पित करें।
- फिर कुमकुम, केसर और हल्दी में एक रक्षा सूत्र रंगे और उसमें 14 गांठें लगाएं।
- फिर विष्णु जी के चरण में रखकर उनसे सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- और फिर उस रक्षा सूत्र को अपनी बांह में बांध ले।
- आरती करें और प्रसाद बांटे।
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