किसान मुद्दे पर हरियाणा के डिप्टी CM बोले- हमारे होते मंडियां न कमजोर होंगी, न खत्म

चंडीगढ़. प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने विधानसभा में किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस को करारा जवाब दिया हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के कानून का प्रारूप पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का था और जब इस कानून को देशभर में लागू किया जा रहा है तो यही कांग्रेसी नेता किसनों के बीच में जाकर उन्हें बहका रहे है। दुष्यंत चौटाला ने कांग्रेसी नेताओं को ऐसी दोगली राजनीति न करने की सलाह देते हुए कहा कि वे किसानों के बीच भ्रम फैलाकर किसानी का नुकसान न करें। सदन में डिप्टी सीएम ने किसानों को विश्वास दिलाया कि न तो हम मंडियों को कमजोर होने देंगे और न ही मंडियों को खत्म होने देंगे, बल्कि मंडी सिस्टम को पहले से ज्यादा मजबूत करेंगे और एमएसपी प्रणाली पर कोई आंच नहीं आने देंगे। वे मंगलवार को महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण पर विधानसभा में बोल रहे थे।

haryana Deputy Chief Minister Dushyant Chautala on the issues of farmers, contract farming law and mandis

उपमुख्यमंत्री ने जननायक स्व. चौधरी देवीलाल जी की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को बहकाना आसान है परंतु उन्हें समझाना मुश्किल। उन्होंने कहा कि कानून लिखने वाले और कानून बनाने वाले यही कांग्रेसी नेता आज किसानों को बहकाने की एक सूत्रीय नीति पर काम कर रहे हैं। दुष्यंत ने कहा कि कृषि कानूनों पर कांग्रेस भी एक मत नहीं हैं, एक धड़ा कानून का समर्थन कर रहा है तो दूसरा धड़ा विरोध में खड़ा है, कांग्रेसियों की यही दोगली नीति को देश को समझने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायक बीबी बतरा ने स्वयं कहा है कि विपक्ष के नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री थे तो वे कान्ट्रैक्ट फार्मिंग लाना चाहते थे परंतु हैरानी की बात है कि आज वही लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इसे दोगली नीति बताते हुए प्रश्न किया कि हुड्डा स्वयं खड़े होकर सदन को बता दें कि वे इसके हक में हैं या विरोध में हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की दोगली सोच किसानों को कमजोर कर रही है। ये लोग किसानों के बीच में जाकर बोलते हैं कि अगर ये कानून लागू हो गए तो किसान बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने फिर दोहराया कि जब तक हम सदन में हैं और हमने खरीद करनी तब तक किसानों का एक-एक दाना एमएसपी पर खरीदा जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मूंग की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पिछले दो वर्षों से आरंभ की गई है, इससे पहले कभी भी मूंग की खरीद नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने मक्का को 1850 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी पर खरीदा गया। प्रदेश के इतिहास में पहली बार 6.75 लाख मीट्रिक टन बाजरे की रिकॉर्ड खरीद 2150 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी पर की गई। यही नहीं प्रदेश में किसानों का 10,700 करोड़ रुपये का धान खरीदा गया और उसका एक-एक रुपया किसान के खाते में डाला गया।

उन्होंने कहा कि 16,200 मीट्रिक टन सूरजमुखी को 5650 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी पर खरीदा गया। राज्य सरकार ने 7.5 लाख मीट्रिक टन सरसों 4425 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी पर खरीदी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 14250 करोड़ रुपये की गेहूं को 1925 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी पर खरीदी गई। हमारी सरकार ने इन फसलों के अलावा जौ की फसल को पहली बार एमएसपी पर खरीदने का निर्णय लिया है।

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