रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करेगा गोरखपुर नगर निगम, जारी किया जा रहा है 200 करोड़ का बांड
गोरखपुर, 9 अगस्त: गोरखपुर नगर निगम अपनी आय का स्रोत बढ़ाने के लिए रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करेगा। यह निवेश नगर निगम की ओर से जारी किए जा रहे 200 करोड़ रुपये के बांड से होने वाली आय से किया जाएगा। नगर निगम ने इसके लिए एचडीएफसी बैंक को अपना टेक्निकल पार्टनर बनाया गया है। इसके लिए नगर निगम बोर्ड ने भी मंजूरी दे दी है।

लखनऊ और गाजियाबाद नगर निगम की तरह ही गोरखपुर नगर निगम भी बांड जारी करने जा रहा है। गाजियाबाद नगर निगम ने बांड से प्राप्त आय को वाटर प्यूरीफिकेेशन में निवेश किया है। वहीं लखनऊ ने रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश किया है। लखनऊ की तर्ज पर ही गोरखपुर नगर निगम रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने की योजना पर काम कर रहा है। शनिवार को हुई नगर निगम बोर्ड बैठक में नगर निगम के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुुकी है। नगर निगम का प्रत्येक बांड 10 लाख रुपये का होगा। ऐसे में यह बांड कोई व्यक्ति नहीं खरीद सकेगा। इसके बैंक, शिक्षण संस्थान, औद्योगिक प्रतिष्ठान या कोई अन्य संस्थान ही खरीद सकेेंगे।
रेटिंग के बाद तय होगा प्रारूप
बांड को बाजार में लाने के पहले नगर निगम को कई प्रक्रिया से गुजरना होगा। प्रावधान के तहत नगर निगम गोरखपुर को तीन साल की बैलेंस शीट, नगर निगम की संपत्तियों का ब्योरा रेटिंग एजेंसियों के सामने पेश करना होगा। इन्हीं के आधार पर रेटिंग एजेंसी नगर निगम गोरखपुर का रेटिंग जारी करेंगी। इसी रेटिंग के आधार पर नगर निगम सेबी में बांड के रूप में अपने को दर्ज करा सकेगा। बांड से होने वाली आय से ही नगर निगम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स समेत रियल एस्टेट सेक्टर में कदम बढ़ाएगा।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि हम रियल एस्टेट सेक्टर संबंधी बांड लेकर आ रहे हैं। इसके जरिए तीन तरह के प्रोजेक्ट होंगे। नगर निगम की छोटी जमीनों का ई-ऑक्शन, बेतियाहाता में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण और शहर के कुछ इलाकों में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट लाएंगे। इससे नगर निगम गोरखपुर की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर होने की उम्मीद है। अन्य नगर निगमों की तुलना में गोरखपुर नगर निगम संपत्तियों के मामले में बेहतर है। ऐसे में उम्मीद है कि गोरखपुर नगर निगम का बांड भी 150 से 200 करोड़ रुपये का होगा। इस कार्य में टेक्निकल पार्टनर के रूप में एचडीएफसी बैंक शामिल है। एचडीएफसी ही नगर निगम लखनऊ और नगर निगम गाजियाबाद के बांड के मामले में टेक्निकल पार्टनर है।












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