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कंट्रोल रूम से जोड़े गए सभी मेडिकल कॉलेज, सीएम योगी ने नोडल अफसरों को दिए अस्पतालों में कैंप करने का आदेश

लखनऊ, अप्रैल 23: कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर राज्य के कोविड अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों पर योगी आदित्यनाथ की निगाह अब जम गई है। कोविड अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कोरोना संक्रमित मरीजों के बेहतर इलाज के संबंध में अब खुद चिकित्सीय प्रबंधों की समीक्षा करने लगे हैं। जिसके तहत राजधानी के कोविड अस्पतालों में नोडल अफसरों को कैंप करने का आदेश दिया गया है।

All medical colleges and medical institutes in Uttar Pradesh added to the control room

प्रदेश के मुखिया का कहना है कि कोविड अस्पतालों में नोडल अफसरों के कैंप करने से मरीजों के इलाज को लेकर जरूरी मदद उपलब्ध कराने में तेजी आएगी। इसके साथ ही उन्होंने अस्पतालों में ऑक्सीजन और रेमडेसिविर जैसी दवाएं हर हाल में उपलब्ध हों, इसकी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। कोरोना के इलाज में प्रयोग की जाने वाली दवाओं की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने को कहा है। यही नहीं राज्यों से आने वाले प्रवासियों की स्क्रीनिंग अनिवार्य करने तथा सूबे के 72 जिलों में बने 349 क्वारंटाइन सेंटरों की रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री रोज देख रहें हैं।

इसी के साथ अब सीएम ने कोविड-19 के इलाज में पूरी क्षमता से कार्य ना कर पाने के चलते मेडिकल कॉलेज के प्रशासन पर कार्रवाई भी शुरू की है। जिसके तहत ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर केजीएमयू के कुलपति प्रो बिपिन पुरी के स्थान पर प्रति कुलपति उमा सिंह को कुलपति का चार्ज दिया गया है। इसी प्रकार बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा. राजीव लोचन के स्थान पर अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. संतोष कुमार को अस्पताल का निदेशक बनाया गया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग के भी कई अफसरों के खिलाफ भी मुख्यमंत्री ने नाराज़गी जताई है। मुख्यमंत्री का मत है कि उक्त अफसरों ने कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने पर समय से उचित चिकित्सीय प्रबंधन करने में सुस्ती दिखाई, जिसके चलते अस्पतालों में दवाओं और बेड की किल्लत हुई। जिसे युद्धस्तर पर लगकर ठीक गया।

बीते साल भी इसी तरह की लापरवाही कोरोना संक्रमितों के इलाज में कई जिलों में दिखाई गई थी। तब आगरा के सरोजनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीके अनेजा को हटाकर उनकी जगह कानपुर मेडिकल कॉलेज के सामान्य सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय काला को कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया था। इसी प्रकार तब मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता को हटाकर कम्युनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके गर्ग को मेरठ मेडिकल कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया था। अब इसी तरह की कार्रवाई कोविड-19 के इलाज में पूरी क्षमता से कार्य ना करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ किए जाने के संकेत मुख्यमंत्री ने दिया हैं।

गूगल शीट पर ऑक्सीजन के बारे में सूचना चार बार करेंगी अपडेट

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आपातकालीन ऑक्सीजन की महत्ता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज, संस्थान और चिकित्सा महाविद्यालय पर अब पल-पल नजर रखने के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के कार्यालय में 24 घंटे का कंट्रोल रूम स्थापित कराया है। इस कंट्रोल रूम से प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज, संस्थान और चिकित्सा महाविद्यालय 24 घंटे जुड़े रहेंगे। कंट्रोल रूम गूगल शीट पर ऑक्सीजन के बारे में सूचना दिन में चार बार अपडेट करेगा। इस कंट्रोल रूम से न सिर्फ ऑक्सीजन आपूर्ति पर नजर रखी जा रही, बल्कि किसी भी प्रकार की आवश्यकता पर तत्काल समाधान भी कराया जा रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश के चिकित्सा तंत्र को मजबूत करने और मेडिकल कॉलेजों में ऑक्सीजन की कमी ना होने पाए, इसके लिए ऑक्सीजन प्लांट लगाने को बढ़ावा देने का फैसला भी किया है। इसके तहत अब सूबे में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए नियम आसान किए जायंगे। जो अस्पताल या उद्यमी सूबे में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए इच्छुक होंगे, उन्हें ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए जल्दी लाइसेंस मिलेगा, नवीनीकरण की प्रक्रिया को आसान किया जायेगा।

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बढ़ाई गई टेस्टिंग की क्षमता

इसी प्रकार मुख्यमंत्री अब चाहते हैं कि सूबे में कोरोना की चपेट में आये हर मरीज का बेहतर इलाज किया जाए, इसके लिए वह सूबे में चिकित्सा के लिए हर जरूरी दवाओं की कमी ना होने पाए इसे लेकर सतर्कता बरत रहें हैं। प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सुविधाओं में इजाफा करने का प्रयास कर रहें हैं। मुख्यमंत्री के इन प्रयासों के चलते ही प्रदेश में प्रतिदिन टेस्टिंग की क्षमता बढ़ायी गई है। अब स्वास्थ्य विभाग रोजाना दो लाख से ज्यादा टेस्टिंग कर रहा है। प्रदेश में अब तक कुल तीन करोड़ 86 लाख 66 हजार से अधिक सैंपल की जांच की गई है। इसमें लगभग 90,000 सैंपलों की जांच आरटी पीसीआर के माध्यम से की गई है। जबकि दिल्ली में 1.60 करोड़, महाराष्ट्र में 2.40 करोड़ और कर्नाटक में 2.40 करोड़ टेस्ट किए गए हैं। राज्य में कोरोना मरीज की जांच और इलाज को लेकर दिए जा रहे ध्यान के चलते ही उत्तर प्रदेश में न सिर्फ संक्रमण कम है, बल्कि पॉजिटिव केसों की संख्या भी कम है।

English summary
All medical colleges and medical institutes in Uttar Pradesh added to the control room
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