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Navratri: 51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या देवी, इस बार महामारी का नहीं डर, उमड़ रहे हैं भक्त

By Vijay Ram
| Published: Wednesday, October 13, 2021, 15:38 [IST]
Navratri: 51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या देवी, इस बार महामारी का नहीं डर, उमड़ रहे हैं भक्त
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गुवाहाटी। पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में राजधानी दिसपुर से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित कामाख्या देवी के मंदिर में इन दिनों भक्तों की भीड़ लगी है। अष्टमी के अवसर पर भक्त इस शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना कर रहे हैं। गुवाहाटी में यह मंदिर नीलांचल पर्वत से कुछ किमी दूर स्थित है, जिसे भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। सालों से यहां देश से ही नहीं, अपितु विदेशों से भी काफी तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। हालांकि, बीते 2 साल से कोरोना महामारी का प्रकोप होने के कारण यहां भक्तों की मौजूदगी नहीं थी, लेकिन इस बार हालत काफी अलग हैं। नवरात्रि पर भक्तों की कतार लग रही हैं। आइए करते हैं इस मंदिर के दर्शन..
गुवाहाटी। पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में राजधानी दिसपुर से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित कामाख्या...
Navratri: 51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या देवी, इस बार महामारी का नहीं डर, उमड़ रहे हैं भक्त
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51 शक्तिपीठों में से एक है यह मंदिर:  यह मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में शामिल है। यहां सती को योनि रूप में पूजा जाता है। यहां कोई देवी की मूर्ति नहीं, अपितु योनि के आकार का शिलाखंड है...जिस पर लाल रंग के गेरू की धारा गिराई जाती है। शास्त्रों में वर्णित है कि, देवी सती का योनि भाग कामाख्या में गिरा था। इसीलिए, यहां उन्हें पूजा जाता है।
51 शक्तिपीठों में से एक है यह मंदिर:  यह मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में शामिल है। यहां सती को...
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तीन हिस्सों में बना है मंदिर: कामाख्या देवी का मंदिर तीन हिस्सों में विभक्त है। इसका पहला हिस्सा सबसे बड़ा है और इस हिस्से में हर कोई नहीं जा पाता। दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं, जहां एक पत्थर से हर समय पानी बहता रहता है। बताया जाता है कि, महीने के तीन दिन ये मंदिर बंद रहता है। ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण 8वीं या 9वीं शताब्दी के बीच हुआ था। 16वीं सदी में यह मंदिर नष्ट कर दिया गया था। हालांकि, बाद में 17वीं सदी में बिहार के राजा नारायण नरसिंह द्वारा इस मंदिर का पुन:निर्माण कराया गया। 
तीन हिस्सों में बना है मंदिर: कामाख्या देवी का मंदिर तीन हिस्सों में विभक्त है। इसका पहला हिस्सा...
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यहां लगता है अम्बुवाची मेला: शक्तिपीठ की पूजा—अर्चना के अलावा लोग यहां पर लगने वाले अम्बुवाची मेले को भी देखने आते हैं। बताया जाता है कि, उस दौरान ब्रह्मपुत्र नदी का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। श्रद्धालुओं में मान्यताएं हैं कि, पानी का ये लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है। इसलिए, तीन दिन बाद दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ फिर से मंदिर में उमड़ने लगती है।
यहां लगता है अम्बुवाची मेला: शक्तिपीठ की पूजा—अर्चना के अलावा लोग यहां पर लगने वाले अम्बुवाची...
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हिन्दू धर्म के शास्त्रों व पुराणों में वर्णन है कि, भगवान शिव की पत्नी सती द्वारा अपनी देह त्याग देने के बाद शिव ने उनके अध-जले शव के साथ तांडव किया था। शिवजी को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने चक्र से उस शव के टुकड़े—टुकड़े कर दिए। वे टुकड़े पृथ्वी के 51 स्थानों पर गिरे। वही 51 स्थान मां सती के शक्तिरूप में पूजे जाने लगे। जिनमें से कामाख्या भी एक है।
हिन्दू धर्म के शास्त्रों व पुराणों में वर्णन है कि, भगवान शिव की पत्नी सती द्वारा अपनी देह त्याग...
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कहा जाता है कि, जहां-जहां सती के अंग या धारण किए हुए वस्त्र—आभूषण गिरे थे, वहां पर शक्तिपीठ अस्तित्व में आए। इन शक्ति पीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ भी है। अम्बुवाची वस्त्र कहा जाता है और भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
कहा जाता है कि, जहां-जहां सती के अंग या धारण किए हुए वस्त्र—आभूषण गिरे थे, वहां पर शक्तिपीठ...
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