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Photos: बिहार के बेगूसराय ज़िले के इस प्रखंड में लगता है, एशिया का दूसरा सबसे बड़ा मेला, देखिए शानदार तस्वीरें
Asia 2nd Biggest Mela in Begusarai Bihar: बिहार के बेगूसराय ज़िले के तेघरा प्रखंड में बड़े पैमाने पर कृष्माष्टमी का मेला लगता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह मेला एशिया का दूसरा सबसे बड़ा कृष्णाष्टमी का मेला है, जबकि बिहार का सबसे बड़ा मेला है। 28 अगस्त से मेले की शुरुआत हो चुकी है, जो कि 5 दिनों तक चलेगा।
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Krishnashtami Mela: वन इंडिया हिंदी की टीम ग्राउंड पर मेला की जानकारी लेने पहुंची। तेघरा प्रखंड मेला कमिटी के सदस्यों ने कहा कि यह दावा नहीं हक़ीक़त है कि बेगूसराय के तेघरा प्रखंड में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा कृष्णाष्टमी का मेला लगता है।
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मेले के लिए 1 साल पहले से तैयारी शुरू कर दी जाती है। मेला लगने के बाद लोगों द्वारा पांच दिनों में करोड़ों का व्यापार होता है।
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मेला के लिए प्रवेश द्वार और पंडाल में करोड़ों रुपये का ख़र्च आता है। वहीं 15 किलोमीटर के दायरे में फैले मेले के पंडाल और विभिन्न प्रवेश द्वार के लागत की बात करें तो करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये का ख़र्च तेघरा में आता है। इस मेला को देखने के लिए बिहार के लगभग सभी ज़िले लोग पहुंचते हैं।
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मेला का पंडाल बनाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से कारीगर पहुंचते हैं। पिछली बार चंद्रयाण की शक्ल में प्रवेश द्वार बनाया गया था, जो कि काफी चर्चा का विषय बना था। इस बार लाल किला की तर्ज़ पर प्रवेश द्वार बनाया गया है, जो कि लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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करीब 98 साल से मेला लगते आ रहा है, कमिटि के सदस्यों ने कहा कि हमारे पूर्वजों के द्वारा शुरू किए गए इस काम को हम लोग बखूबी निभा रहे हैं।
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ताकि तेघरा प्रखंड के इस मेले का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो। हज़ारों लाखों की तादाद में लोग मेला देखने आते हैं, हम लोग मेला आयोजन का शतक लगाने की ओर बढ़ रहे हैं।
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आज तक कोई ऐसी अप्रिय घटना नहीं हुई है, जिससे की मेला दागदार हो। यह गंगा जमुनी तहज़ीब का जीता जागता उदाहरण है। हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी समुदाय के लोग मेला घूमने आते हैं।
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मेला का पंडाल बनाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से कारीगर पहुंचते हैं। पिछली बार चंद्रयाण की शक्ल में प्रवेश द्वार बनाया गया था, जो कि काफी चर्चा का विषय बना था। इस बार लाल किला की तर्ज़ पर प्रवेश द्वार बनाया गया है, जो कि लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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15 किलोमीटर के दायरे में फैले मेला को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। पड़ोसी मुल्क नेपाल से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं।


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