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हिंदुस्तानी रंगों में रंगा G7 शिखर सम्मेलन, मेलोनी ने हाथ जोड़कर किया मेहमानों का स्वागत, देखिए वायरल तस्वीरें
इटली में जी7 देशों यानी 'ग्रुप ऑफ सेवन' की बैठक हो रही है। ये G7 शिखर सम्मेलन का कार्यक्रम 13 जून से 15 जून तक है। इस जी7 शिखर सम्मेलन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेहमान के तौर पर इटली पहुंच चुके हैं। वहीं इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हाथ जोड़कर अतिथियों का स्वागत किया। अब G7 शिखर सम्मेलन की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। देखें ये खूबसूरत तस्वीर...
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दुनिया के सात सबसे शक्तिशाली डेमोक्रेटिक देशों ने मिलकर जी7 शिखर सम्मेलन का गठन किया हुआ है। इस सम्मेलन में अमेरिका, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन शामिल हैं, जिसकी मेजबानी इटली कर रहा है।
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बता दें कि इस जी-7 समिट में सातों देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। भारते को हर साल मेहमान के तौर पर जी7 की बैठक में आमंत्रित किया जाता है। हालांकि भारत अभी तक इसका जी7 शिखर सम्मेलन का सदस्य नहीं बन पाया है।
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अब हाल ही में G7 Summit 2024 की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जोकि बेहद खूबसूरत है। बता दें कि इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इटली पहुंच चुके हैं। वहां उनका भव्य तरीके से स्वागत भी किया।
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इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं इटली की पीएम मेलोनी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज, कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जापान के पीएम फुमियो किशिदा सहित जी7 में शामिल होने पहुंचे सभी नेताओं के साथ नजर आ रही हैं।
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बता दें कि भारत इस संगठन का हिस्सा नहीं है, लेकिन पिछले कई सालों से बतौर मेहमान जी-7 में भाग लेता रहा है। हालांकि इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी जी-7 की बैठकों में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुआ करते थे।
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इस जी7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के पूर्व प्रधाननमंत्री बोरिस जॉनसन भारत को इस ग्रुप में शामिल करने की मांग कर चुके हैं।
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जी7 की जब स्थापना हुई थी तब वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी 50 फीसदी थी। धीरे-धीरे यह आंकड़ा कम हो कर 30 प्रतिशत पर पहुंच गया। जी7 देशों के पास आधुनिक टेक्नोलॉजी और एक बड़ा कारोबार क्षेत्र है, साथ ही ये वैश्विक मुद्दों पर अहम फैसले लेते हैं, लिहाजा अगर भारत इस ग्रुप में शामिल होता है, तो वो टेक्नोलॉजी भारत भी पहुंचेगी। हालांकि, कई ऐसे मुद्दे होते हैं, जिससे भारत की नीति मेल नहीं खाती है।


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