बेहद रहस्यमयी है दिल्ली का 'खूनी दरवाजा', कहानी सुनकर आज भी लोगों की कांप जाती है रूह
डरावनी कहानी सुनना और पढ़ना हर किसी को पसंद होती है। ऐसे में जब बात आती है घूमने की तो लोग ऐसी हॉन्टेड जगह में एक्सपलोर करना पसंद करते हैं। अगर आप दिल्ली में रहते हैं और आसपास भूतिया जगह जाने का सोच रहे हैं तो आज हम आपको पुरानी दिल्ली में स्थित 'खूनी दरवाजे' के बारे में कुछ डरावनी और रहस्यमयी कहानी बताएंगे जिसे सुनकर आपकी भी रूह कांप जाएगी।
यह बात है साल 1659 की, औरंगजेब ने दिल्ली का तख्त हासिल करने के लिए अपने बड़े भाई दारा शिकोह का सिर कटवा दिया था और उसके साथ ही भारत के सिंहासन पर अपना अधिकार जमाया था। दारा शिकोह का सिर कटवाने के बाद औरंगजेब ने इसी दरवाजे पर कटे सिर को लटका दिया था।
बता दें कि इसका निर्माण अफगान शासक शेर शाह सूरी ने 16वीं सदी में करवाया था। दिल्ली के अंदर या दिल्ली से बाहर जाने के लिए यह सबसे उत्तरी दरवाजा था। जब भी काबुल के लिए कारवां निकलता था तो वह इसी गेट से होकर निकलता था, इसलिए इसे काबुली दरवाजा कहा जाता था। 'लाल दरवाजा' यानी खूनी दरवाजा पर साल 2002 में एक दुखद घटना घटी थी, जिसके बाद इसे बंद कर दिया गया था। दरअसल, यहां हुआ यूं था कि तीन युवकों ने यहां एक मेडिकल छात्रा के साथ रेप कर उसका खून बहाया था। इस घटना के बाद इस दरवाजे को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया।।


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