संत और भगवंत कृपा का कमाल, एक युवा जिसने शास्त्र ज्ञान से कश्मीर से राजस्थान तक फहराया परचम
सनातन संस्कृति के प्रमुख प्रचारक विनायक शर्मा का विद्यार्थी जीवन देशभक्ति से जुड़ा हुआ रहा हैं। आध्यात्मिक गुणों से परिपूर्ण विनायक शर्मा का देशप्रेम और उनके क्रांतिकारी विचार बुद्धिजीवियों की सोच पर ज़बरदस्त प्रभाव छोड़ते हैं। कम उम्र में राजस्थान का सबसे बड़ा मीडिया हाउस खड़ा कर के विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने वाले विनायक शर्मा की सोच युवाओं को सनातन संस्कृति, शास्त्र ज्ञान और देशप्रेम को लेकर प्रेरित करती हैं।
वह समाज में सनातन संस्कृति के प्रचार एवं धर्म ग्रंथो का सही सार लोगों तक पहुंचाने के प्रयास में निरंतर जुटे रहते है। लेकिन सनातन के प्रति उनके समर्पण के साथ साथ उनमे देश के लिए भी अटूट समर्पण हैं। इसका कारण उनका क्रांतिकारी और चुनौतियों से भरा विद्यार्थी जीवन रहा हैं।

विद्यार्थी जीवन रहा क्रांतिकारी
ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के बाद विनायक आगे की शिक्षा के लिए जयपुर आ गए थे। विद्यार्थी जीवन से ही विनायक ने संघर्ष की राह चुन ली थी। विनायक अपने कॉलेज में युवा शक्ति की आवाज बने, कई बड़े आंदोलन और धरने प्रदर्शन किये जिसके सकारात्मक परिणाम भी आये। आध्यात्मिक गुणों से परिपूर्ण विनायक के कुछ कर गुजरने के विचारों ने ज़ोर पकड़ लिया था।
साल 2016 में NIT श्रीनगर में कॉलेज परिसर में तिरंगा फहराने पर छात्रों पर लाठीचार्ज का मामला सुर्खियों में छाया हुआ था। विनायक ने पीड़ित युवाओं के हित में आंदोलन छेड़ा उससे मजबूरन पुलिस को छात्रों पर की गयी FIR वापस लेनी पड़ी और प्रशासन द्वारा कॉलेज परिसर में उनके लिए सुरक्षा के इंतज़ाम किये गए। यहीं नहीं विनायक ने आतंकवाद का डर ख़त्म करने के लिए कश्मीर के लालचौक और आतंकवादी बुरहान वानी के गढ़ में तिरंगा फहराया। उस समय कश्मीर में धारा 370 लागू थी।
रामभिषेकम कार्यक्रम से राजस्थान में चलाई रामलहर
आध्यात्मिक गुणों से परिपूर्ण विनायक अयोध्या में श्री रामजन्म भूमि संघर्ष की कहानी बचपन से सुनते हुए आये थे और जब भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का ऐलान किया गया तो विनायक ने खुदको काम काज छोड़ कर राम काज में व्यस्त कर लिया। विनायक जयपुर से अयोध्या पहुंचे और अपनी 4 दिवसीय अयोध्या यात्रा पूर्ण की, जहां से वह भगवान राम का अति सुंदर व सिद्ध बालरूप विग्रह अपने साथ लेकर लौटे।
जयपुर आते ही विनायक ने 22 जनवरी से 7 दिन पूर्व यानी 15 जनवरी 2024 को जयपुर के अल्बर्ट हॉल पर भगवान श्री रामलला का भव्य अभिषेक करने को लेकर 'रामभिषेकम एवं विशाल आरती' कार्यक्रम का ऐलान कर दिया। इस कार्यक्रम में देशभर से महान संत महात्मा पधारे, रेवासा पीठाधीश्वर स्वामी श्री राघवाचार्य जी, वृंदावन की पावन धरा से सद्गुरु श्री रितेश्वर जी महाराज पधारे, प्रदेश की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने भी कार्यक्रम में पधारकर रामलला के दर्शन किये, मशहूर गायक पद्म श्री कैलाश खेर के गीतों से राम गुणगान हुआ। संत समागम ने जयपुर को अयोध्या नगरी बना दिया, भगवान रामलला का पञ्च मूरत से महाभिषेक हुआ और भव्य आरती की गयी। विनायक शर्मा द्वारा आयोजित किये गए रामभिषेकम कार्यक्रम से राजस्थान में रामलहर चल पड़ी जिसका सन्देश देश के कोने कोने तक पंहुचा।
विनायक युवाओं के लिए बन रहे है प्रेरणा
विनायक शर्मा का जीवन और उनका व्यक्तित्व युवाओं को सनातन संस्कृति और अध्यात्म से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करता है। जिसके कारण युवा उन्हें सोशल मीडिया पर फॉलो कर है और जीवन में आध्यात्मिक गुणों को अपना रहे हैं। विनायक शर्मा का कहना है की केवल और केवल अध्यात्म और सनातन की शक्ति से ही जीवन में कठिन लगने वाले कार्य भी आसानी से संभव हो सकते हैं और केवल सनातन ही एकमात्र ऐसा मार्ग है जो मनुष्य को जीवन के उच्च स्तर पर ले जा सकता है। अध्यात्म की गहरी समझ के माध्यम से विनायक शर्मा अपने जीवन की चुनौतियों का सामना दृढ़ निश्चय, ईमानदारी और नैतिकता से करने में कामयाब रहे।












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