Young Team India: कामयाबी की सीढ़ी बनी टीम इंडिया की नयी पीढ़ी
नया खून है, नई उमंगे, अब है नई जवानी...ये है टीम हिंदुस्तानी। क्रिकेट के सबसे पुराने फॉर्मेट में टीम इंडिया का नया जोश रंग दिख रहा है। टीम की यूथ ब्रिगेड मैदान पर बदलाव की नई कहानी लिख रही है।
हैदराबाद में जब इंग्लिश टीम के बैजबॉल और स्पिन बॉल के सामने मेजबान जब औंधे मुंह गिरे तो सवाल कई उठे। खराब फॉर्म की वजह से बाहर किए अनुभवी टेस्ट बल्लेबाजों को वापस बुलाने की मांग भी उठने लगी। हालांकि यूथ ब्रिगेड ने इसका जवाब वाइजेग में बल्ले से मैदान पर विजय की कहानी लिखकर दिया। उसने इशारा कर दिया है कि व्हाइट बॉल क्रिकेट हो या फिर रेड बॉल फॉर्मेट, अपने हुनर से हार को जीत में बदलना उन्हें आता है।

सबसे पहले बात उस चेहरे की जिसकी चमक देखकर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने भी यशस्वी भव: का आशीर्वाद दिया। अगर कोई बल्लेबाज 22 साल की उम्र पूरा करते करते मैदान पर दोहरा शतक जड़ने की कहानी लिख दे तो ऐसा होना लाजमी है। यशस्वी जायसवाल ने साबित कर दिया कि जिंदगी की जंग हो या फिर क्रिकेट का मैदान, उन्होंने ठान लिया है कि हार नहीं मानूंगा।
क्रिकेट गेंद का रंग चाहे सफेद हो या फिर रंगीन, रनों की भूख और खेल के लिए यशस्वी का जुनून नहीं बदलता। विरोधियों पर छा जाने के उनके आक्रामक अंदाज को इसी बात से समझिए उन्होंने अपना शतक छक्के के साथ और दोहरा शतक चौका जड़कर पूरा किया। यही बात उन्हें दूसरे बल्लेबाजों से अलग बनाती है। इसीलिए तो ये भी कहा जा रहा है कि मैदान पर बैजबॉल नहीं 'जैश'बॉल का जलवा दिख रहा है।
यशस्वी जायसवाल की बल्लेबाज़ी का लोहा बड़े-बड़े दिग्गज इसलिए मान रहे हैं क्योंकि उनकी 209 रन की पारी टर्न और बाउंस भरे विकेट और ऐसे वक्त पर आई जब दूसरे छोर से बड़े-बड़े बल्लेबाजों के आने और जाने का सिलसिला जारी था।
कभी डेयरी में काम करने और गोल गप्पे बेचने के दौर से गुजर चुके यशस्वी मिले मौके को भुनाने का मतलब अच्छी तरह जानते हैं। उनकी इसी काबिलियत ने उन्हें सचिन, काबंली और शास्त्री के साथ उस एलीट क्लब में शामिल करा दिया जिन्होंने अपने 23वें बर्थडे से पहले घरेलू मैदान और विदेशी जमीन, दोनों ही जगहों पर शतक जड़ने का रिकॉर्ड बनाया है।
आत्मविश्वास से भरे यशस्वी जायसवाल के तरकश में हर वो तीर मौजूद है जो विरोधी गेंदबाज़ों को परेशान कर सकता है और उनकी लाइन-लेंग्थ को बिगाड़ सकता है। वाइजेग टेस्ट की पहली पारी में उनकी बल्लेबाज़ी इसकी बानगी है। यशस्वी ने न सिर्फ बड़े आराम से जमीनी शॉट खेले, बल्कि हवाई शॉट खेलने में भी उनकी सहजता देखते ही बनी। पारी में खेले उनके कट शॉट, ड्राइव और लॉफ्टेड शॉट बताते हैं कि उनकी तकनीक कितनी मजबूत है।
यशस्वी ने अपनी बल्लेबाजी से ये अहसास करा दिया है कि वो तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के लिए पारी शुरू करने के लिए तैयार हैं। हालांकि यशस्वी खुद ये बात कहते हैं कि हर फॉर्मेट अलग होता है, गेंद अलग होती है, मैदान अलग होता है, इसलिए वे अलग माइंडसेट के साथ खेलने उतरते हैं। वहीं उनके सलामी जोड़ीदार कप्तान रोहित शर्मा का मानना है कि यशस्वी खेल को अच्छी तरह समझते हैं और वे टीम के लिए बेहतरीन योगदान दे सकते हैं लेकिन उन्हें अभी लंबा सफर तय करना है, ऐसे में जरूरत है कि वे विनम्र रहें यानी उनके पैर जमीन पर रहें।
एक और युवा बल्लेबाज ने अपनी बल्लेबाज़ी से फिर अहसास करा दिया कि फॉर्म इज टेंपरेरी बट क्लास इज परमानेंट। नाम है शुभमन गिल। 2023 में क्रिकेट के हर फॉर्मेट में गिल का बल्ला रन उगलता दिखा था। हालांकि 2024 में टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने पारी की शुरूआत करने के बजाय तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की गुजारिश की। टीम मैनेजमेंट ने इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उन पर भरोसा भी जताया लेकिन पहली तीन पारियों में मिली नाकामी के बाद उन पर उंगलियां भी उठने लगी। तीन में से दो पारियों में वो अच्छी शुरूआत को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पाए।
हैदराबाद टेस्ट की पहली पारी में गिल ने 23 रन बनाए तो वहीं दूसरी पारी में वो खाता भी नहीं खोल पाए। वाइजेग टेस्ट की पहली पारी में भी यही कहानी जारी रही और वे सिर्फ 34 रन बना पाए। हालांकि दूसरी पारी में उनसे उम्मीदें ज्यादा थी क्योंकि टीम इंडिया बैकफुट पर थी।
टीम से बाहर होने का खतरा टालने के लिए उन्हें बड़ी पारी की दरकार थी। साथ ही रणजी ट्रॉफी में अनुभवी बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का शानदार फॉर्म भी उनके लिए खतरे की घंटी बजा रहा था। ऐसे में उनकी किस्मत ने साथ दिया और वो टीम के लिए संकटमोचक साबित हुए। उनकी 104 रन की शतकीय पारी ने टीम इंडिया का मेहमान टीम से फासला इतना बड़ा कर दिया कि उसे घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा।
इतना ही नहीं ये पिछले सात साल में घरेलू मैदान पर नंबर तीन पर किसी भारतीय बल्लेबाज का पहला शतक भी रहा। शुभमन गिल के बल्ले से 11 महीने बाद टेस्ट शतक निकला। हालांकि शतक पूरा करने के बाद गिल ने अपने खास अंदाज में इसका जश्न नहीं मनाया क्येंकि उन्हें मालूम था कि टीम के लिए उनका काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उनकी ये सोच बताती है कि भले ही वो युवा हों लेकिन टीम के लिए उन्हें अपनी जिम्मेदारी का अहसास है।
इस शतक ने गिल को इस बात का अहसास जरूर कराया कि बल्लेबाजी के वक्त संयम और बेसिक्स पर टिके रहना जरूरी है। साथ ही रनों का अंबार लगाने के लिए अपने अंदाज में बदलाव करने की सोच बनाने के बजाय जैसा खेलते आए हैं उसी तरह खेलते रहना और खुद पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट का सबसे खालिस अंदाज माना जाता है। ऐसे में इस फॉर्मेट में खुद को साबित करने की युवा क्रिकेटरों की सोच भारतीय क्रिकेट के लिए शुभ संकेत है। टेस्ट टीम में हाल के दिनों में अनुभवी लेकिन आउट ऑफ फॉर्म चल रहे चेहरों पर भरोसा करने के बजाय युवा जोश और घरेलू क्रिकेट में उम्दा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को तरजीह दी गई है। यशस्वी जायसवाल और रजत पाटीदार जैसे खिलाड़ियों को उनकी कड़ी मेहनत का इनाम मिल गया है तो वहीं घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने वाले सरफराज खान भी टीम का हिस्सा हैं। उन्हें भी जल्द ही डेब्यू का मौका मिल सकता है।
कप्तान रोहित शर्मा तो खुद मानते हैं कि उनकी यंग टेस्ट टीम में टैलेंट की भरमार है। वो चाहते हैं कि इन युवा खिलाड़ियों को मैदान पर अपना हुनर दिखाने का मौका मिलता रहे। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज इन युवाओं के लिए गोल्डन चांस है। हालांकि कप्तान के भरोसे पर खरा उतरने का बड़ा चैलेंज भी उनके सामने है। युवा खिलाड़ियों को भी इस बात का अहसास होगा कि चूकने की गुंजाइश नहीं है क्योंकि उनकी जगह लेने वालों की कतार काफी लंबी है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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