World Cup Final: ऑस्ट्रेलिया को ताज, भारत में आंसुओं का सैलाब
World Cup Final: आखिरकार ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मौजूद एक लाख तीस हज़ार भारतीय फैन्स के शोर को शांत कर ही दिया। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात कही थी। कंगारूओं ने जो सोचा उसे मैदान पर सही साबित कर दिखाया।

वहीं, परफेक्ट टेन स्कोर के साथ फाइनल में पहुंची टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा का हर दांव टूर्नामेंट में पहली बार फेल दिखा। 20 साल बाद ऑस्ट्रेलिया से विश्व कप फाइनल में मिली हार का बदला लेने का ख्वाब अधूरा ही रह गया। आठ साल बाद वनडे की बादशाहत फिर से ऑस्ट्रेलिया के पास है।
ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी कह रहे हैं कि ये जीत 2015 की विश्व कप जीत से कहीं ज्यादा बड़ी है। नॉकआउट मुकाबलों में टीम इंडिया को कंगारूओं से हार का एक नया जख्म मिला है। वनडे विश्व कप खिताब न जीत पाने का 12 साल लंबा इंतजार और लंबा हो गया। स्टेडियम में सन्नाटा पसरा था। फैन्स का नीला समंदर खामोश था। भावनाओं का सैलाब उमड़ रहा था। सिराज फूट-फूटकर रो रहे थे तो कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली और बाकी खिलाड़ी भावुक थे। कहीं आंसू छलक न जाएं, इसलिए विनिंग शॉट लगते ही रोहित ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को बधाई देते हुए अकेले ही बोझिल कदमों से ड्रेसिंग रूम की तरफ बढ़ गए। प्रेजेंटेशन सेरेमनी में वे कहते दिखे कि- "आज हमारा दिन नहीं था।" कोच राहुल द्रविड़ भी मायूस थे। जब वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से रूबरू हुए तो ये बताना नहीं भूले कि पूरे टूर्नामेंट में शानदार क्रिकेट खेलने वाली टीम इंडिया के खिलाड़ी फाइनल में मिली हार से बेहद भावुक हैं और ड्रेसिंग रूम में भावनाओं का सैलाब बह रहा है।
वैसे आंसू तो ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाड़ियों के भी खूब बहे। चाहे वो डबडबाई आंखों के साथ जीत का जश्न मनाते लाबुशेन हों या दूसरे खिलाड़ी। आखिर 50 ओवर की बादशाहत हासिल करने का सिक्सर जो उन्होंने लगाया है। अगर पुरुषों और महिलाओं के विश्व कप खिताबों को मिला दें तो ऑस्ट्रेलिया के लिए ये 20वां विश्व कप खिताब है।
वैसे साल 2023 ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के लिए सुनहरी कामयाबी से भरा रहा है। टीम ने भारत में टेस्ट जीता। भारत को हराकर उन्होंने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप भी जीती। एशेज पर कब्ज़ा किया और अब साल खत्म होने से पहले वनडे विश्व कप ट्रॉफी वे अपने घर लेकर जा रहे हैं।
भारत के खिलाफ वनडे विश्व कप के फाइनल मुकाबले में जब सिक्का उछला तो ऑस्ट्रेलियाई ने बाजी मारी..और फिर इस बाजी को पैट कमिंस और उनके साथियों ने पलटने नहीं दिया। मुश्किल स्लो पिच पर भारतीय बल्लेबाज़ों को सटीक गेंदबाज़ी से बांधकर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों ने जीत की नींव तो रख ही दी। अब तक शानदार फॉर्म में दिखे भारतीय बल्लेबाज लड़खड़ाते-लड़खड़ाते स्कोर को 240 रनों तक ही पहुंचा पाए। इसकी कई वजह रहीं। पहली तो ये कि पहले पावर प्ले में जिस अंदाज़ में कप्तान रोहित शर्मा ने बल्लेबाजी की उस प्रदर्शन को बाकी बल्लेबाज मिडिल और बाद के ओवरों में दोहरा नहीं पाए। दूसरी वजह ये कि जब-जब भारतीय पारी पटरी पर आई, तब उसने दो-तीन विकेट जल्दी-जल्दी खो दिए।
नतीजा ये कि दबाव दोबारा हावी हो गया और रन बनाने की रफ्तार तेज नहीं हो पाई। तीसरी वजह आखिरी ओवरों में सूर्यकुमार यादव की नाकामी रही। जब उन्हें पुछल्ले बल्लेबाज़ों के साथ मिलकर तेजी से रन जोड़ने की जरूरत थी, तब वे ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों की सटीक लेंथ से फेंकी गेंदों वैसे 360 डिग्री शॉट खेलने में नाकाम रहे, जिसके लिए वे जाने जाते हैं। जल्द ही एक खराब शॉट पर उन्होंने अपना विकेट भी गंवा दिया। चौथी वजह छठे गेंदबाज़ की कमी रही। टीम इंडिया फाइनल में घायल ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की भरपाई करने में नाकाम रही।
जोश से भरे हुए ऑस्ट्रेलियाई फील्डरों ने भी अपने गेंदबाज़ों का साथ बखूबी निभाया। उन्होंने टीम के लिए 30 से 35 अहम रन बचाए। यही बाद में निर्णायक साबित हुए। और तो और कवर पर फील्डिंग कर रहे ट्रेविस हेड ने जिस अंदाज में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का शानदार कैच लपका, उसने भी भारतीय स्कोर में काफी फर्क पैदा कर दिया। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा हों या फिर कोच राहुल द्रविड़, दोनों ही मैच के बाद ये बात कहते दिखे कि अगर स्कोर में 20-30 रन और जुड़ते तो नतीजा कुछ और ही होता।
फर्क तो ट्रेविस हेड की बल्लेबाजी ने भी दिखाया। उन्होंने घायल होने की वजह से टूर्नामेंट में देर से एंट्री मारी लेकिन शतक के साथ। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मैच में उन्होंने 67 गेंदों पर 109 रन बनाए। टूर्नामेंट का अंत भी हेड ने शतकीय पारी के साथ किया। फाइनल मैच में उनके बल्ले से 120 गेंदों पर 137 रनों की पारी निकली। वे मोहिंदर अमरनाथ, अरविंद डि सिल्वा और शेन वॉर्न जैसे धुरंधर खिलाड़ियों की उस लिस्ट में भी शामिल हो गए जो सेमीफाइनल और फाइनल दोनों ही मुकाबलों में मैन ऑफ द मैच बने।
मैदान पर भारतीय बल्लेबाज़ों की दिखी बेबसी के बाद सबकी निगाहें पूरे टूर्नामेंट में धारदार दिखे भारतीय गेंदबाज़ों पर टिकी थीं। मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह ने शुरू में दमखम भी दिखाया, लेकिन ये काफी नहीं था। शुरूआत में तीन विकेट झटकने के बाद भारतीय गेंदबाज़ विकेटों के लिए तरस गए। टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में दिखे स्पिनर रवीन्द्र जडेजा और कुलदीप यादव फाइनल में एक भी विकेट हासिल नहीं कर पाए। तेज़ गेंदबाज़ों को न तो स्विंग मिली और न ही स्पिनरों की गेंद टर्न हुई। विश्व विजेता बनने का जश्न मनाने के 140 करोड़ भारतीयों के अरमानों को हेड और लाबुशेन के बीच हुई 195 रनों की साझेदारी ने तोड़ दिया।
2013 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद आईसीसी खिताब जीतने का इंतजार और लंबा हो गया है। हालांकि पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया चैंपियन की तरह खेली। बल्ले से सबसे ज्यादा रन बरसाकर विराट कोहली प्लेयर ऑफ द टूर्नांमेंट बने। उनके खाते में टूर्नामेंट के 11 मैचों में 765 रन हैं। ये एक टूर्नामेंट में किसी खिलाड़ी की तरफ से बनाए गए सबसे ज्यादा रनों का नया रिकॉर्ड भी है। वहीं गेंदबाज़ों में मोहम्मद शमी के नाम सबसे ज्यादा विकेट हासिल करने का रिकॉर्ड दर्ज है। उनके नाम 7 मैचों से 24 विकेट हैं।
टीम इंडिया का अंदाज़ बता रहा था कि उसमें इस बार चैंपियन बनने की सारी खूबियां मौजूद थी। इसके बावजूद मायूसी ही हाथ लगी। कप्तान रोहित का टीम इंडिया के कोच 'राहुल भाई' के लिए खिताब जीतने का सपना भी पूरा नहीं हो सका। अगला वनडे विश्व कप चार साल बाद यानी 2027 में होना है। कई क्रिकेट पंडितों का मानना था कि टीम इंडिया का हर खिलाड़ी रंग में दिख रहा है, ऐसे में खिताब जीतने का इससे बढ़िया मौका टीम इंडिया के पास शायद ही हो। कप्तान रोहित शर्मा 36 साल के हैं जबकि विराट कोहली ने हाल ही में अपना 35वां जन्मदिन मनाया है।
इसलिए चार बाद साल होने वाले 50 ओवर के क्रिकेट महाकुंभ में इन दोनों खिलाड़ियों समेत कई धुरंधरों की मौजूदगी को लेकर संशय रहेगा। टीम फिर दमखम दिखाएगी, ख्वाब फिर सजेंगे। हालांकि जब जब यह विश्वकप याद आएगा तब तब मलाल रहेगा कि तीसरी बार विश्व विजेता बनने का गोल्डन चांस हाथ से निकल गया था।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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