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Sandeshkhali: अराजकता और अपराध के सहारे कब तक सत्ता पर कब्जा रख पाएंगी ममता बनर्जी?

Sandeshkhali: पिछले दो दशक से संदेशखाली में जो कुछ हो रहा था, वह आश्चर्यचकित कर देने वाला है| पश्चिम बंगाल में पहले सरकार भले ही कम्युनिस्टों की थी या बाद में तृणमूल कांग्रेस की, संदेशखाली में एक परिवार का राज चल रहा था| वह था जिला परिषद अध्यक्ष शाहजहाँ शेख का परिवार| जिसमें उसका भाई, रिश्तेदार और उसके साथी शिबू हजारा और उत्तम सरदार जैसे लोग शामिल थे|

जिला परिषद के चुनावों में वह हमेशा धांधली से जीत जाता था| उस धांधली में प्रशासन उसके साथ होता था| जब कम्युनिस्टों का राज था, तो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का नेता था, जब तृणमूल कांग्रेस का राज आया, तो वह संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस का नेता बन गया|

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संदेशखाली में कुछ नहीं बदला, पहले भी संदेशखाली की पुलिस शाहजहाँ शेख की जेब में थी, बाद में भी उसी की जेब में रही| लगता ऐसा है कि वहां का एसपी अपने डीजीपी से नहीं, बल्कि शाहजहाँ शेख से आदेश और निर्देश लेता था| वहां का डीएम शाहजहाँ शेख को ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समझता था|

पिछले बीस साल से यह सब बिना ज्योतिबसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता बनर्जी की सहमति के नहीं हो सकता था| सहमति का सबूत यह है कि जब शाहजहाँ शेख के खिलाफ संदेशखाली में महिलाएं सड़कों पर उतर आई थीं, 13 फरवरी को हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सरकार से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांग ली थी, इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 15 फरवरी को विधानसभा में कहा कि शाहजहाँ शेख बेकसूर है, उसके खिलाफ भाजपा और आरएसएस साजिश रच रहे हैं| तो क्या हाईकोर्ट भी आरएसएस और भाजपा की साजिश में शामिल था, क्योंकि हाईकोर्ट ने भी तो स्वत: संज्ञान लिया था|

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पुलिस में दर्ज शिकायतों के बावजूद ममता सरकार का उसे गिरफ्तार करने का कोई इरादा नहीं था| ममता बनर्जी का विधानसभा में दिया गया बयान राज्य प्रशासन को साफ़ इशारा था कि वह शाहजहाँ शेख के खिलाफ कोई गिरफ्तारी न करें| ममता बनर्जी के भतीजे ने चार कदम आगे बढ़कर कह दिया कि हाईकोर्ट ने शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है| कोर्ट ने 20 दिन तक एसआईटी के गठन पर रोक लगाई थी, लेकिन अभिषेक बनर्जी ने कहा कि हाईकोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई हुई है|

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कोर्ट के बारे में सरासर झूठ बोला, हाईकोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था| हाईकोर्ट 20 फरवरी और 26 फरवरी को दो बार राज्य सरकार को फटकार लगा चुकी है| अभिषेक बनर्जी के बयान के बाद हाईकोर्ट को और निर्देश देना पड़ा कि शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार किया जाए| कोर्ट के आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता कुनाल घोष का यह कहना कि उसे एक हफ्ते में गिरफ्तार कर लिया जाएगा, आशंका पैदा करता है कि वह तृणमूल कांग्रेस के संरक्षण में ही है|

26 फरवरी को कोर्ट ने तब तीसरी बार दखल दिया, जब एक वकील ने याचिका लगाई कि संदेशखाली जाने वाले कुछ लोगों को मालाएं पहनाई जा रही हैं, और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है| चार साल पहले शाहजहाँ शेख के खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया था| इस पर कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई कि चार साल में आप चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाए|

शाहजहाँ शेख चाहे जिस महिला को तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर में बुला लेता था और फिर उसके साथ रेप किया जाता था| कई कई दिन तक महिलाओं को तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर में रखा जाता था| महिला के पति को कहा जाता था कि वह सिर्फ नाम का ही पति है, उसकी पत्नी अब शाहजहाँ शेख की है| देश में शायद यह पहला मामला होगा, जहां मान्यता प्राप्त और सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी का दफ्तर आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बन गया|

कोर्ट में मौजूद प्रियंका टीबरवाल ने कहा कि रेप की शिकार कोई महिला जब शिकायत लेकर पुलिस के पास जाती थी तो पुलिस उसे कहती थी कि अब शाहजहाँ शेख ही उनका पति है| शाहजहाँ शेख के कुकर्म सामने ही नहीं आते, अगर ईडी राशन घोटाले में जांच के दौरान उसके घर पर छापा नहीं मारती| ईडी ने 5 जनवरी को छापा मारा, तो उसने अपने समर्थकों से ईडी के अफसरों और उनके वाहनों पर हमला करवा दिया और खुद फरार हो गया|

सिर्फ ममता बनर्जी ही नहीं, इंडी एलायंस के घटक दलों की जहां जहां सरकारें हैं, वहां वहां ईडी को भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में ऐसे विरोध का सामना करना पड़ रहा है| बंगाल में तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर केन्द्रीय जांच एजेंसियों को हिंसा का सामना करना पड़ रहा है| शाहजहाँ शेख की फरारी के बाद ही संदेशखाली की औरतों में उसके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत आई| वे लाठियां लेकर सडकों पर उतरी तो शाहजहाँ शेख की पुलिस ने उन पर लाठी चार्ज शुरू कर दिया|

शाहजहाँ शेख के बारे में संदेह है कि वह बांग्लादेशी घुसपैठिया है| शुरू में वह एक मजदूर था, ईंट भट्टों पर काम करता था| मजदूर यूनियन बनाकर मार्क्सवादी पार्टी में घुसा और फिर मार्क्सवादी सरकार के संरक्षण से वह कम से कम 2000 करोड़ का मालिक बन गया| शाहजहाँ के पास सैंकड़ों मछली पालक केंद्र, ईंट भट्टे और आदिवासियों और दलित हिन्दुओं की हड़पी हुई सैंकड़ों एकड़ जमीन है| प्रशासन ने उसे गरीबों की जमीनें हड़पने में सहयोग किया| सिंगूर और नंदीग्राम में माकपा की जमीन खिसकी, तो ज्योतिप्रिय मलिक 2012 में तृणमूल कांग्रेस में घुस गया| वही ज्योतिप्रिय मलिक राशन घोटाले में जेल में है, और ईडी शाहजहाँ शेख को खोज रही है|

कांग्रेस आरोप लगा रही है, बंगाल के हर जिले में ममता बनर्जी का कम से कम एक शाहजहाँ शेख है, जो अपनी सल्तनत चला रहा है और प्रशासन पंगु बन चुका है| 12 साल पहले ऐसी ही परिस्थिति नंदीग्राम में हो गई थी, जिसने पश्चिम बंगाल की माकपा सरकार को उखाड़ फेंका था| नंदीग्राम ने कम्युनिस्टों की बर्बादी की कहानी लिख दी थी, तो संदेशखाली से ममता खुद अपनी बर्बादी की आत्मकथा लिख रही हैं| उस समय नंदीग्राम ने ममता बनर्जी के सत्ता में आने का रास्ता खोला था, तो अब संदेशखाली ममता के लिए सत्ता से रुखसत होने का रास्ता खोल सकता है|

हाईकोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनन्द बोस ने 72 घंटे में राज्य सरकार से जवाब मांग कर राजनीतिक धड़कने बढ़ा दी हैं| अब 29 फरवरी तक ममता सरकार को राजभवन में सफाई देनी पड़ेगी| अगर वह सफाई नहीं देती है, तो राज्यपाल केंद्र को रिपोर्ट भेज सकते हैं, और केंद्र सरकार क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर राज्य सरकार को संविधान के अनुच्छेद 355 के अंतर्गत नोटिस दे सकती है|

कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता संदेशखाली पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेता खुल कर ममता बनर्जी को घेर रहे हैं| भाजपा और केंद्र सरकार को ममता को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है| विपक्ष जहां यह समझ रहा था कि बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र से भाजपा को रोका जा सकता है, वहां ये तीनों ही राज्य किसी न किसी मुद्दे पर विपक्ष के लिए वाटरलू बनते जा रहे हैं|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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