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अब बैकवर्ड-फारवर्ड से नहीं चलेगा राजद, हार के बाद नींद से जगी पार्टी

By अशोक कुमार शर्मा
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नई दिल्ली। राजद 23 साल का हो चुका है। वैसे तो ये उमर गबरु जवान की है लेकिन राजद की सेहत फिलहाल ठीक नहीं है। तकरार और हार ने राजद को झकझोर दिया है। पार्टी अब नींद से जग कर जमीन पर उतर रही है। राजद को नये रूप-रंग में ढालने के लिए मंथन शुरू है। अब बैकवर्ड-फारवर्ड की राजनीति से पार्टी आगे नहीं बढ़ेगी। इसको यादव समर्थक पार्टी के ठप्पे से मुक्त कर सबके लिए स्वीकार्य बनाएगा जाएगा। सवर्णों को भी पार्टी से जोड़ा जाएगा। केवल सेक्यूलरिज्म से काम नहीं चलेगा। नेशनल इंटरेस्ट पर भी गौर करना होगा। समाजवाद के गुरु मंत्र से आगे का सफर तय होगा। स्थापना दिवस कार्यक्रम और कार्यकारिणी की बैठक के जरिये नये राजद परिकल्पना साकार की जा रही है।

 शिवानंद ने सच कहने का साहस दिखाया

शिवानंद ने सच कहने का साहस दिखाया

शिवानंद तिवारी छात्र राजनीति में लालू -नीतीश से सीनियर रहे हैं। उस दौर में वे इन दोनों नेताओं के संरक्षक भी रहे हैं। इस लिए आज वे लालू या नीतीश के बारे में बेधड़क और दम से बोलते हैं। लोकसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद पार्टी के नेता सच कहने से हिचक रहे थे। जब पानी सिर से ऊपर हो गया तो शिवानंद तिवारी ने फिर बेबाक राय रखी। राजद के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिवानंद ने कहा कि सामाजिक न्याय का मतलब बहुत संकुचित हो गया है। पिछड़ी जातियों को मिलने वाले अधिकतर फायदे केवल यादव, कुर्मी, कोइरी और वैश्य ही उठा रहे हैं। इसे अत्यंत पिछड़ी जातियों से तक पहुंचाना होगा। तभी राजद को बहुसंख्यक लोगों का समर्थन मिलेगा। शिवानंद ने अत्यंत पिछड़ों की बात इसलिए कि क्योंकि ये तबका नीतीश कुमार की ताकत का सबसे बड़ा आधार है। यानी राजद को अब गैरयादव जातियों में भी पैठ बनानी होगी तभी पार्टी का जनाधार बढ़ेगा।

धर्मनिरपेक्षता के साथ राष्ट्रहित भी अहम

धर्मनिरपेक्षता के साथ राष्ट्रहित भी अहम

शिवानंद तिवारी ने राजद की हार के काऱणों की समीक्ष करते हुआ कहा कि बालाकोट एयर स्ट्राइक ने पूरे देश का माहौल बदल दिया था। लोग भारत और सेना के गौरव से खुश थे। बालाकोट बड़ा मुद्दा था और लोग इसे दिल से महसूस कर रहे थे। इससे भाजपा को वोट मिला। हमें इस सच को स्वीकारना होगा। बालाकोट पर बहस या सवाल नुकासान कर गया। अब समय आ गया है कि हम धर्मनिरपेक्षता से ऊपर उठ कर सोचें। राष्ट्रहित की अनदेखी अब मुमकिन नहीं है। आम जन के मन मिजाज को समझना जरूरी है।

अब बैकवर्ड-फारवर्ड नहीं

अब बैकवर्ड-फारवर्ड नहीं

राजद के एक दूसरे वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी की नयी पहचान बनाने की राय रखी। उन्होंने लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद ही कहा था कि सवर्ण आरक्षण का विरोध करना राजद के लिए महंगा पड़ गया। अब उन्होंने कहा है कि बैकवर्ड-फारवर्ड की राजनीति से राजद को नुकसान हुआ है। लोगों की सोच बदल गयी है इस लिए अब बैकवर्ड-फारवर्ड नहीं चलेगा। भाजपा को हराने के लिए सभी वर्गों का समर्थन जरूरी है। कुछ जातियों और समुदाय पर निर्भर रह कर पार्टी बहुत आगे नहीं जा सकती। तरक्की का खाका जनता के सामने रखना होगा। इवीएम को दोष देना ठीक नहीं। सच को स्वीकार करना चाहिए। राजद का बेस वोट तो उसके साथ रहा लेकिन फ्लोटिंग वोट छिटक गये। हमें लोगों से जुड़ कर उनका भरोसा जीतना होगा। इसके लिए मेहनत की जरूरत है। राबड़ी देवी ने सभी वर्गों को पार्टी से जोड़ने की वकालत की है।

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English summary
RJD will no longer run backward forward polities in bihar
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