Rahul Gandhi Yatra: राहुल की यात्राएं नहीं रोक पा रही कांग्रेस में निराशा
Rahul Gandhi Yatra: राहुल गांधी ने पिछले साल भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने और पार्टी को जोड़े रखने के लिए शुरू की थी| उसे काफी सफलता भी मिली थी, लेकिन अपनी उसी यात्रा के दौरान दो विदेश यात्राएं करके उन्होंने अपनी सफलता को विफलता में बदल लिया|
अब अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान भी उन्होंने वही गलती दोहराई है, इसलिए लालू यादव को उन्हें कहना पड़ा कि वह विदेश यात्राएं कम करें| राहुल गांधी की बार बार की विदेश यात्राओं से उनकी राजनीतिक गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं|

लोकसभा उम्मीदवारों का चयन करने के लिए हुई कांग्रेस की पहली केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में उनके नदारद रहने पर भी उनकी राजनीतिक गंभीरता का पता चलता है| जब वह अपनी भारत जोड़ो यात्राओं के दौरान विदेश यात्राएं कर सकते हैं, तो कांग्रेस के उम्मीदवारों की चयन बैठक में शामिल होना क्यों टाला गया|
पहले कहा गया था कि वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग से जुड़ेंगे, लेकिन वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भी बैठक से नहीं जुड़े| अपनी इन भारत जोड़ो यात्राओं के दौरान उन्होंने तीन विदेश यात्राएं तो की, लेकिन इस दौरान हुए संसद सत्र में वह लगभग पूरी तरह गायब रहे|

कहते हैं कि दिल्ली में सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है| इसी लिए नरेंद्र मोदी ने 2014 में उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट से चुनाव लड़ा था, इसके साथ ही वह गुजरात की वडोदरा सीट से भी चुनाव लड़े थे| मोदी के उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ने का भाजपा को बहुत फायदा हुआ, वह 80 में से 71 लोकसभा सीटें जीत गई|
2019 में राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के स्वघोषित उम्मीदवार थे, तो उन्होंने उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट के साथ साथ केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ा था| भले ही वह अमेठी में हार गए, लेकिन उनके केरल से चुनाव लड़ने का कांग्रेस को बहुत फायदा हुआ, राज्य में कम्युनिस्ट सरकार होने के बावजूद कांग्रेस केरल में लोकसभा की 20 में से 15 सीटें जीत गई|
भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट पर उम्मीदवारी घोषित कर दी, लेकिन कांग्रेस ने अपनी पहली सूची में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की उत्तर प्रदेश की क्रमश: अमेठी और रायबरेली सीट से उम्मीदवारी घोषित नहीं की है| जबकि राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश में दो बार की भारत जोड़ो यात्रा के बाद तो कांग्रेस को उनकी जीत पर कोई आशंका नहीं होनी चाहिए थी|
असल में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्राएं कांग्रेस कार्यकर्ताओं में कोई उत्साह पैदा नहीं कर पाई हैं| कांग्रेस ने 7 मार्च को केन्द्रीय चुनाव समिति की पहली बैठक में 50 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए थे, लेकिन अगले दिन शुक्रवार को सिर्फ 39 नामों का एलान हुआ, क्योंकि 11 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने से आनाकानी कर दी|
इतना ही नहीं, केन्द्रीय चुनाव समिति के सदस्यों छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को जबरदस्ती टिकट थमाया गया है| चुनाव समिति के सदस्य सचिन पायलट से भी कहा गया कि वह लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहें, लेकिन वह तैयार नहीं हैं|
केसी वेणुगोपाल लोकसभा का पिछ्ला चुनाव नहीं लड़े थे, उनकी अलाप्पुझा सीट पर जिसे उम्मीदवार बनाया गया था, वह चुनाव हार गए| इसलिए कांग्रेस ने उन्हें ही अलाप्पुझा से चुनाव लड़ने को मजबूर किया, जहां से वह 2009 और 2014 में चुनाव जीते थे|
केसी वेणुगोपाल को 2022 में राजस्थान से राज्यसभा सांसद बनाया गया था| उनके अभी चार साल बाकी पड़े हैं| अगर वह केरल से लोकसभा चुनाव जीत जाते हैं, तो उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना पड़ेगा| उनकी खाली होने वाली सीट पर कांग्रेस जीत नहीं सकती, क्योंकि अब राजस्थान में भाजपा बहुमत में है|
वेणुगोपाल ने यह कह कर कांग्रेस की पोल खोल दी कि हम लोकसभा में ज्यादा से ज्यादा सांसद पहुंचाना चाहते हैं| यह कह कर जो बात उन्होंने छुपाई, वह यह है कि कांग्रेस लोकसभा में विपक्ष का आधिकारिक दर्जा हासिल करने के लिए जद्दोजहद कर रही है| इन सब घटनाओं से स्पष्ट है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश में फेल हो जाने के बाद कांग्रेस ज़िंदा रहने की कोशिश कर रही है| लेकिन कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं को अपना राजनीतिक भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है|
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बावजूद कांग्रेस से पलायन रूक नहीं रहा| लोक दिखावे के लिए भले ही भारत जोड़ो यात्रा का मकसद मोदी सरकार की ओर से कथित तौर पर समाज में पैदा की गई खाई को भरना बताया जा रहा हो, लेकिन यह हर कोई जानता है कि इसका असली मकसद कांग्रेस से पलायन रोकना और राहुल गांधी को रिलांच करना था| कांग्रेस इन दोनों ही मकसदों में नाकाम रही है| उनकी यात्राओं के दौरान ही कांग्रेस से पलायन जारी है| शायद ऐसा कोई राज्य नहीं बचा है, जहां से कांग्रेस के बड़े बड़े नेता पार्टी छोड़कर भाजपा या अन्य दलों में न जा रहे हों|
कांग्रेस अपने नेताओं के पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने का कारण उनका ईडी और सीबीआई से डर बताकर भाजपा पर सत्ता का दुरूपयोग बताती रहती है| लेकिन ऐसा कह कर वह यह भी बता रही होती है कि सत्ता में रहते हुए उनके नेताओं ने जम कर भ्रष्टाचार किया था, जो अब बचने का रास्ता ढूंढ रहे हैं|
मान लिया कि अशोक चव्हाण पर भ्रष्टाचार का मामला था, लेकिन मिलिंद देवड़ा पर कौन सा केस था| केरल के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ए.के. एंटनी के बेटे अनिल एंटनी या करुणाकरण की बेटी पद्मजा वेणुगोपाल पर कौन से आरोप थे| ऐसे अनेक उदाहरण है जहां बेदाग़ कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल हुए हैं| जैसे नरसिम्हा राव सरकार में संसदीय कार्यमंत्री रहे सुरेश पचौरी का राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के मध्यप्रदेश से गुजर जाने के बाद भाजपा में शामिल होना| सुरेश पचौरी के साथ इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल भी कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए| इससे पहले छिंदवाडा के एक हजार से ज्यादा कांग्रेस के छोटे बड़े नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे|
इसी तरह राहुल गांधी की यात्रा राजस्थान से गुजरने के बाद गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे लालचंद कटारिया, पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा, विजयपाल मिर्धा, आलोक बेनीवाल, खिलाड़ी लाल बैरवा सब भाजपा में शामिल हो गए| इससे पहले पूर्व मंत्री महेंद्र जीत सिंह मालवीय भाजपा में शामिल हुए थे|
राहुल गांधी की न्याय यात्रा के दौरान ही गुजरात प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया और पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अंबरीश ढेर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए| क्या इन सब पर ईडी और सीबीआई का दबाव था, क्या इनमें से किसी के भी खिलाफ कोई पूछ्ताछ या केस चल रहा था? इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि कांग्रेस के सभी नेता ईडी और सीबीआई के डर से भाजपा में शामिल हो रहे हैं| असल में ज्यादातर नेताओं को गांधी परिवार के नेतृत्व में कांग्रेस का, और कांग्रेस के साथ अपना राजनीतिक भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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