Quantum Mission India: टेक्नोलॉजी की दुनिया में ‘क्वांटम लीप’ साबित होगा नेशनल क्वांटम मिशन
Quantum Mission India: क्वांटम टेक्नोलॉजी पर एक राष्ट्रीय मिशन हमारी उस इच्छाशक्ति का एक और उदाहरण है, जो हम पिछले कुछ समय से भारत को विश्व की नंबर वन इकोनॉमिक पॉवर बनाने के लिए प्रदर्शित करते आ रहे हैं।

Quantum Mission India: लगभग छह हजार करोड़ रुपए के नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने हरी झंडी दिखा दी है। इससे भारत क्वांटम टेक्नोलॉजी अपनाने वाले खास देशों में शामिल हो गया है। वर्तमान में भारत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कुछ बड़े पैरोकारों में से एक है। हमारे यहॉं क्वांटम से जुड़ी सूचनाओं का संकलन और संवर्द्धन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। नेशनल क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) सूचनाओं को जुटाने की प्रक्रिया को तेज गति और सूचनाओं को अधिक विश्वसनीयता प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।
मिशन का मुख्य फोकस क्वांटम टेक्नोलॉजी से जुड़े अनुसंधानों और विकास पर रहेगा। इसके तहत सुपरकंडक्टिंग और फोटोनिक तकनीक आदि में अगले आठ वर्षों में 50-1000 क्यूबिट (क्वांटम बिट) की क्षमता वाला क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मिशन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है, भारत के भीतर दो हजार किलोमीटर की सीमा में भू-स्टेशनों के बीच उपग्रह आधारित सुरक्षित क्वांटम संचार व्यवस्था तैयार करना। इसके अलावा एनक्यूएम सटीक समय, संचार व जलीय परिवहन के लिए परमाणु प्रणालियों और परमाणु घड़ियों में उच्च संवेदनशीलता से लैस मैग्नेटोमीटर विकसित करने में भी सहायता करेगा।
मिशन के अंतर्गत क्वांटम उपकरण बनाने के लिए सुपर कंडक्टर्स, सेमीकंडक्टर संरचनाओं और टोपोलॉजिकल आदि क्वांटम सामग्रियों के डिजाइन में सहायता प्रदान की जाएगी। मिशन के अन्य लक्ष्यों में क्वांटम संचार और मौसम विज्ञान संबंधी रिसर्च के लिए एकल फोटॉन स्रोतों का विकास और क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम संवेदी, मौसम विज्ञान और क्वांटम सामग्री व उपकरण के क्षेत्र में चार विषयगत केंद्रों की स्थापना शामिल है। ये केंद्र शोध के माध्यम से नए ज्ञान के सृजन पर विशेष ध्यान देंगे। एनक्यूएम में मुख्यत: वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान व विकास को आगे बढ़ाने के साथ ही क्वांटम आधारित आर्थिक विकास को गति देने जैसे काम किए जाएंगे।
आज विश्व की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इनोवेशन को अपना रही हैं। हर कहीं आर्थिक विकास की नई परिभाषाएं निर्धारित की जा रही हैं। इनमें कृत्रिम मेधा अर्थात् एआई, इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स, 3-डी प्रिंटिंग, ड्रोन, डीएनए डेटा संग्रहण, क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी चीजें केन्द्र में हैं। इसलिए क्वांटम टेक्नोलॉजी का विकास एवं विस्तार एक ऐसी जरूरत है, जिसकी कोई समझदार देश अनदेखी नहीं कर सकता।
इस लिहाज से देखा जाए तो एनक्यूएम को मंजूरी देकर भारत ने देर से ही सही, मगर सही दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यदि भारत क्वांटम के क्षेत्र में अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफल रहता है तो वह यह कामयाबी हासिल करने वाला एक प्रमुख देश होगा। अभी तक जिन देशों में इस पर काम चल रहा है, वे हैं अमेरिका, कनाडा, चीन, आस्ट्रिया, फिनलैंड और फ्रांस।
क्वांटम टेक्नोलॉजी, सिद्धांत और कम्प्यूटिंग
क्वांटम टेक्नोलॉजी के चार प्रमुख डोमेन हैं: क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सिमुलेशन, क्वांटम कम्प्यूटेशन और क्वांटम सेंसिंग व मेट्रोलॉजी। यह एक ऐसा विषय है, जिसका संबंध इंजीनियरिंग और भौतिकी जैसे विज्ञान के क्षेत्र से है। इसके अंतर्गत पदार्थ और ऊर्जा के व्यवहार का अत्यंत सूक्ष्म, परमाणु और उप-परमाणु स्तर पर, स्तर पर विश्लेषण किया जाता है। यह टेक्नोलॉजी क्वांटम सिद्धांत पर आधारित है। इस तकनीक की सहायता से डेटा और इन्फॉर्मेशन को कम-से-कम समय में प्रोसेस किया जा सकता है।
सेमीकंडक्टर्स, लेजर्स, ब्लू-रे, ट्रांजिस्टर्स, मोबाइल फोन, यूएसबी ड्राइव, एमआरआई, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप्स और बेसिक लाइट स्विच तक में क्वांटम मेकानिक्स के सिद्धांतों का ही इस्तेमाल होता है। जहां तक प्रॉब्लम सॉल्व करने की बात है तो क्वांटम कंप्यूटिंग इस काम को बहुत आसान और तेज कर देती है। इसकी वजह यह है कि परंपरागत कंप्यूटर ट्रांजिस्टरों पर निर्भर होते है, वहीं क्वांटम कंप्यूटर एटम्स पर काम करते हैं। इनमें गणना के लिए क्लासिकल बिट्स की जगह क्वांटम बिट्स (Q-bit) का इस्तेमाल किया जाता है। इससे क्वांटम कंप्यूटर पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में बेहद शक्तिशाली बन जाते हैं।
क्वांटम प्रौद्योगिकी विगत पिछली शताब्दी के आरंभिक दौर में विकसित क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों पर आधारित है। क्वांटम कंप्यूटर क्वांटम सुपरपोजिशन और तेज रफ्तार इन्फॉर्मेशन प्रोसेसिंग का उपयोग करता है। जिससे यह वर्तमान में काम कर रहे कई परंपरागत कंप्यूटरों की नकल करने में सक्षम हैं।
क्वांटम प्रौद्योगिकी की उपयोगिता सुरक्षित संचार, बेहतर भविष्यवाणी, कंप्यूटिंग, सिमुलेशन, रसायन विज्ञान, स्वास्थ्य सेवा, क्रिप्टोग्राफी, इमेजिंग, आपदा प्रबंधन संबंधी एप्लिकेशनों के माध्यम से प्रदर्शित होती है। वैज्ञानिक काफी समय से गंध, चेतना, एंजाइम, प्रकाश संश्लेषण, एवियन नेविगेशन, जीवन की उत्पत्ति और कोरोना वायरस का प्रभाव जैसी जैविक घटनाओं को समझने के लिए क्वांटम सिद्धांत का इस्तेमाल करते रहे हैं। इन वैज्ञानिकों में प्रोफेसर सत्येंद्र नाथ बोस, सर चंद्रशेखर वेंकट रमन और प्रोफेसर मेघनाद साहा जैसे विख्यात भारतीय नाम शामिल हैं।
तीन साल से चल रही कवायद
क्वांटम नेशनल क्वांटम मिशन, जिसे केबिनेट ने कल मंजूरी दी है, के बीज तो तीन साल पहले ही पड़ गए थे। वर्ष 2020 के आम बजट में, जब सरकार ने क्वांटम प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोगों पर राष्ट्रीय मिशन (एनएम-क्यूटीए) की घोषणा की थी। अब जब इस पर अमल का समय आया है तो इसके नाम और बजट, दोनों का ही आकार कतर दिया गया है। जबकि अवधि बढ़ा दी गई है। उस समय इसके लिए आठ हजार करोड़ रुपये का बजट परिव्यय रखा गया था। यह राशि पॉंच साल के लिए निर्धारित की गई थी। लेकिन, अब यह हजार करोड रुपए 2023-24 से 2030-31 तक की अवधि (सात बजट वर्ष) के लिए है। इस संकुचन के पीछे चाहे जो वजह रही हों, लेकिन इसका अमल में आना भी कम बड़ी बात नहीं है।
क्वांटम टेक्नोलॉजी पर एक राष्ट्रीय मिशन हमारी उस इच्छाशक्ति का एक और उदाहरण है, जो हम पिछले कुछ समय से भारत को विश्व की नंबर वन इकोनॉमिक पॉवर बनाने के लिए प्रदर्शित करते आ रहे हैं। एनक्यूएम को लेकर किए गए दावे द्रुत आर्थिक विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जगाने वाले हैं।
क्वांटम से ही जुड़ा एक और प्रचलित शब्द है, क्वांटम लीप। इसका अर्थ है- आश्चर्यजनक परिवर्तन या प्रगति । उम्मीद की जानी चाहिए कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, इस संभावनाओं भरे क्षेत्र में भारत की 'क्वांटम लीप' साबित होगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












Click it and Unblock the Notifications