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Political Alliances: राजनीतिक गठबन्धनों में उठापटक शुरू

Political Alliances: तमिलनाडु में जयललिता की अन्नाद्रमुक ने एक छोटी सी बात पर एनडीए से नाता तोड़ लिया है| बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब के बाद तमिलनाडु चौथा राज्य है, जहां भाजपा के सहयोगी पार्टी से अलग हुए हैं| कर्नाटक में एचडी देवेगौडा की जेडीएस ने अपना अस्तित्व बचाने के लिए एनडीए से नाता जोड़ लिया है| हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला की आईएनएलडी के दो टुकड़े हो चुके हैं| चौटाले के बड़े बेटे अजय चौटाला ने भारतीय राष्ट्रीय लोक दल बना ली थी, उनके बेटे दुष्यंत चौटाला हरियाणा की भाजपा सरकार में उप मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उन्होंने एलान कर दिया है कि वह एनडीए के साथ लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगे|

ओम प्रकाश चौटाला के दूसरे बेटे अभय चौटाला की आईएनएलडी एनडीए का हिस्सा हुआ करती थी, लेकिन अब वह इंडी एलायंस में जाने की कोशिश कर रही है| महाराष्ट्र में एनसीपी और शिवसेना टूट कर आधी एनडीए में चली गईं, आधी इंडी एलायंस में| बिहार में जेडीयू भी टूटने के कगार पर है| अमित शाह बाकायदा बिहार में एलान करके आए हैं|

Political Alliances: Trouble begins in political parties alliances before elections

कर्नाटक में जेडीएस का मुख्य आधार एचडी देवेगौडा की अपनी जाति वोक्कालिगा और मुस्लिम रहे हैं| लेकिन इस बार के विधानसभा चुनावों में मुसलमानों के जेडीएस से नाता तोड़कर कांग्रेस के साथ जाने के बाद देवेगौडा के लिए जेडीएस का अस्तित्व बचाना मुश्किल हो गया था| विधानसभा चुनावों में जेडीएस को सिर्फ 13.27 प्रतिशत वोट और 19 सीटें मिली थीं| कांग्रेस ने देवेगौडा के वोक्कालिगा वोटरों में भी अच्छी खासी सेंधमारी की थी| एक तरह से कांग्रेस ने जेडीएस को निगल लिया था|

देवेगौडा को भारतीय जनता पार्टी ने जून में एनडीए में शामिल होने की पेशकश की थी। देवेगौडा तो तभी पूरी तरह तैयार थे, लेकिन उनके बेटे पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने फैसला करने में चार महीने लगाए| उन्हें फैसला लेने में इसलिए देर लगी, क्योंकि उन्हें जेडीएस के मुस्लिम वोटबैंक को लेकर भ्रम था| कुमारस्वामी जब आश्वस्त हो गए कि मुस्लिम वोट वापस नहीं आएगा और वोक्कालिगा वोटरों को बचाना जरूरी है, तो उन्होंने सोच समझ कर भाजपा के साथ जाने का फैसला किया|

Political Alliances: Trouble begins in bjp congress other parties political alliances

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भाजपा के लिए भी कर्नाटक की 25 लोकसभा सीटें बचाना अति महत्वपूर्ण हो गया है| वह जेडीएस से गठबंधन के बिना ये सीटें नहीं बचा सकती। लोकसभा चुनाव में जेडीएस को 9.67 प्रतिशत वोट मिले थे| उधर जेडीएस के लिए भी अपना अस्तित्व बचाने के लिए लोकसभा सीटें जीतना जरूरी है|

देवेगौड़ा की पार्टी कर्नाटक की मांड्या, हासन, बेंगलुरु (ग्रामीण) और चिकबल्लापुर सीट पर चुनाव लड़ना चाहती थी, भाजपा ये चारों सीटें देने को तैयार हो गई थी| 2019 में जेडीएस सिर्फ हासन सीट पर जीत पाई थी| जबकि मांड्या, बेंगलुरु (ग्रामीण) और चिकबल्लापुर सीटों पर भाजपा जीती थी| हासन से पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना ने चुनाव जीता था, लेकिन पहली सितंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनकी सांसदी भी रद्द कर दी थी|

देवेगौडा को पता था कि जेडीएस के साथ जो मुस्लिम नेता बचे हैं, वे भी भाजपा के साथ जाने पर उनका साथ छोड़ देंगे| वही हुआ भी| गठबंधन का एलान होते ही कर्नाटक में जेडीएस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सैयद शैफुल्ला ने पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया| देवदुर्गा से पार्टी विधायक करीअम्मा नायक ने भी गठबंधन के खिलाफ आवाज उठाई है|

केरल में पार्टी के दोनों विधायकों ने अल्‍टीमेटम दिया है कि या तो जेडीएस अपना फैसला बदले या फिर वो एनडीए या बीजेपी के साथ खड़े नहीं हो सकते हैं| इन दो विधायकों में से एक राज्य सरकार में इलेक्ट्रिसिटी मिनिस्टर के. कृष्णकुट्टी का कहना है कि भले ही पार्टी ने एनडीए का दामन थामा हो लेकिन केरल में जेडीएस पहले की तरह वामपंथियों के साथ गठबंधन जारी रखेगी|

वहीं दूसरे विधायक मैथ्यू टी थॉमस जेडीएस प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, वह भी एनडीए में जाने के खिलाफ हैं| अब अक्टूबर के पहले हफ्ते में पार्टी की राज्य इकाई की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी| केरल का जनता दल शुरू से ही भाजपा विरोधी लाईन अपना कर चलता रहा है| जब जनता दल और समता पार्टी से जेडीयू बनी थी, जो एनडीए का हिस्सा बनी थी, तब भी केरल के जनता दल ने शरद यादव से बगावत करके खुद को अलग कर लिया था, और बाद में केरल यूनिट को जेडीएस का हिस्सा बना लिया था|

तमिलनाडु में तो भाजपा और अन्नाद्रमुक में लंबे अरसे से तनाव चल रहा था| इसकी वजह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई को माना जाता है, क्योंकि वह जब से अध्यक्ष बने हैं, अन्नाद्रमुक से गठबंधन तोड़ने की वकालत करते रहे हैं| वह लगातार अन्नाद्रमुक महासचिव पलानीस्वामी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे| हालांकि इस तनाव के दौरान ही अन्नाद्रमुक के महासचिव पलानीस्वामी ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाक़ात करके गठबंधन को पक्का कर दिया था|

लेकिन सनातन के मुद्दे पर द्रविड़ बनाम सनातन का विभाजन शुरू हुआ तो अन्नामलाई ने अपनी मुहिम फिर तेज कर दी| अन्नामलाई ने द्रमुक मूवमेंट के नेता और अन्नाद्रमुक के संस्थापक पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन के गुरु अन्नादुरई के बारे में टिप्पणी की कि उन्होंने 1950 में हिन्दू धर्म के खिलाफ बोला था, लेकिन जब उनका विरोध हुआ तो उन्होंने माफी मांग ली थी| हालांकि तमिलनाडु के अखबारों में उनके इस बयान का खंडन हुआ कि इस तरह की कोई घटना नहीं हुई थी|

इसके अलावा अन्नामलाई ने जयललिता के भ्रष्टाचार को लेकर भी बयानबाजी की| जिससे अन्नाद्रमुक के नेता उनसे काफी खफा थे| भाजपा के साथ गठबंधन के बारे में फैसला लेने के लिए सोमवार को अन्नाद्रमुक ने पार्टी की बैठक बुलाई, जिसमें भाजपा से गठबंधन तोड़ने का फैसला किया गया| 18 सितंबर को अन्नाद्रमुक नेता डी जयकुमार ने गठबंधन तोड़ने का संकेत देते हुए कहा था कि तमिलनाडु के भाजपा प्रमुख अन्नामलाई हमारी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्रियों सीएन अन्नादुरई और जयललिता पर बयानबाजी करते हैं| हमारे कार्यकर्ता इस बात को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे|

दोनों दलों में कडवाहट की एक वजह यह भी थी कि मार्च में भाजपा के पांच नेता अन्नाद्रमुक में शामिल हो गए थे| इनमें पार्टी के प्रदेश आईटी विंग के प्रमुख सीआरटी निर्मल कुमार भी शामिल हैं| निर्मल के अलावा 13 और नेता भी अन्नाद्रमुक में चले गए| इससे पहले अन्नाद्रमुक के बड़े नेता और पूर्व मंत्री नैनार नागेंद्रन पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और अभी विधानसभा में पार्टी के नेता हैं| तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा के चार एमएलए हैं|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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