Nawaz Sharif: अब पाकिस्तान से कब निर्वासित होंगे नवाज शरीफ?
जब बात पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की घर वापसी से जुड़ी हो तो उनके स्वागत के साथ ही पाकिस्तानियों के मन में पहला सवाल यही उठेगा कि अब कितने दिन वो पाकिस्तान में रुकेंगे? यह सवाल इसलिए क्योंकि 73 साल की उम्र में अब तक तीन बार ऐसा हो चुका है जब उन्हें पाकिस्तान निकाला मिला और तीनों ही बार उन्होंने पाकिस्तान से बाहर अपना कठिन समय बिताया।
1990 में नवाज शरीफ पहली बार प्रधानमंत्री बने और 9 साल बाद 1999 में उन्हें पहली बार पाकिस्तान छोड़कर भागना पड़ा जब जनरल मुशर्रफ ने उनकी सरकार का तख्ता पलट दिया था। श्रीलंका से लौटता उनका हवाई जहाज हवा में ही रह गया और उन्हें पाकिस्तान में उतरने की अनुमति नहीं दी गयी।

2007 में उनकी वतन वापसी हुई लेकिन 2017 में एक बार फिर पत्नी की बीमारी के इलाज के बहाने उन्होंने पाकिस्तान छोड़कर लंदन को अपना ठिकाना बना लिया। जुलाई 2018 में वापस लौटे तो एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लिये गये। एक साल बाद नवंबर 2019 में तीसरी बार फिर से वो अपने इलाज के लिए लंदन चले गये।
अब 21 अक्टूबर को जब तीसरी बार निर्वासित नवाज शरीफ 'प्रधानमंत्री निर्वाचित' होने की उम्मीद लिये पाकिस्तान लौटे हैं तो सवाल वही पैदा होता है कि अब वो पाकिस्तान से कब निर्वासित होंगे? अगले तीन महीने पाकिस्तान में चुनाव के महीने हैं। जनवरी 2024 में पाकिस्तान नेशनल एसेम्बली का चुनाव होनेवाला है। उम्मीद की जा रही है कि इमरान खान के जेल जाने और जरदारी की राजनीतिक कमजोरी और पीडीएम गठबंधन की वजह से शरीफ परिवार की पार्टी को एक बार फिर पाकिस्तान नेशनल एसेम्बली में बहुमत मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो इस बार छोटे भाई शाहबाज पीएम की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे बल्कि बड़े भाई नवाज को कुर्सी सौंप देंगे।
लेकिन उस कुर्सी पर नवाज शरीफ कितने दिन बैठेंगे? नवाज शरीफ के राजनीतिक कैरियर का एक सच यह भी है कि वो तीन बार प्रधानमंत्री बने हैं और तीनों बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके हैं। अपने चालीस साल के राजनीतिक कैरियर में उन्होंने राजनीति का एक लंबा कालखंड देखा है और प्रासंगिक भी रहे हैं। जिया उल हक से लेकर इमरान खान तक नवाज शरीफ की राजनीतिक यात्रा की एक खासियत यह रही है कि उन्होंने बदलते समय और परिस्थिति के हिसाब से अपने आपको बदला है। दिसंबर 2007 में बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद उन्होंने उनकी पार्टी से सत्ता का ऐसा गठजोड़ बना लिया कि जरदारी और शरीफ एक दूसरे की दुश्मनी भुलाकर पाकिस्तान में जम्हूरियत के रखवाले बन गये। जो पाकिस्तान में कभी कोई सोच नहीं सकता था, नवाज शरीफ ने आसिफ जरदारी से गठजोड़ करके वह भी संभव कर दिखाया था।
फौज के एक जनरल मुशर्रफ ने भले ही उनका तख्तापलट करके देश निकाला दे दिया हो लेकिन उसी फौज की मदद से उन्होंने 2013 में एक बार फिर पाकिस्तान की सत्ता हासिल कर ली। इस बार उन्हें बतौर प्रधानमंत्री सबसे लंबा कार्यकाल मिला और इसी दौर में उन्होंने चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को 2015 में पुनर्जीवित किया। पाकिस्तान की आर्थिक दशा सुधारने के लिए यह उनकी एक महत्वाकांक्षी परियोजना थी लेकिन आखिरकार आर्थिक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 2017 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
अब शरीफ के सामने विरोधी के रूप में कद्दावर नेता रहीं बेनजीर भुट्टो भले न हों लेकिन इमरान खान उनके मजबूत विरोधी बनकर उभरे थे। संयोग से इमरान खान को फौज का संरक्षण भी प्राप्त था। इसलिए पनामा पेपर्स के नाम से चर्चित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में सजायाफ्ता हो चुके नवाज शरीफ 2018 में जेल पहुंच गये। कहा यह जाता है कि अंदरखाने इमरान खान और नवाज शरीफ के बीच एक डील हुई जिसके कारण इलाज के बहाने उन्हें पाकिस्तान से बाहर जाने का रास्ता दे दिया गया। इस तरह अक्टूबर 2019 में वो पाकिस्तान से निकलकर लंदन पहुंच गये और अब चार साल बाद दोबारा पाकिस्तान लौटे हैं।
उनकी वापसी पर डॉन जैसे अखबार ने कटाक्ष किया है कि "उड़ाऊ पुत्र लौट आया है।" यानी एक ऐसा व्यक्ति जो बार बार निर्वासन पर जाता रहा है एक बार फिर पाकिस्तान लौट आया है। नवाज शरीफ के स्वागत में उनकी पार्टी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इस्लामाबाद से लाहौर तक रोड शो तो नहीं हुआ लेकिन लाहौर के मीनार ए पाकिस्तान को लोगों से भर दिया गया था। उनके स्वागत में एक विशेष गाना भी बनाया गया है जिसका मजमून है मुश्किल से निकालो नवाज शरीफ, ये मुल्क बचा लो नवाज शरीफ। रही सही कसर उनकी बेटी मरियम नवाज ने मीनार ए पाकिस्तान से यह कहकर पूरा किया कि आज सिन्ध, बलोचिस्तान, खैबर, पंजाब सहित पूरे पाकिस्तान से लोग यहां उनका इस्तकबाल करने के लिए इकट्ठा हैं।
नवाज शरीफ 21 अक्टूबर को एक चार्टर्ड प्लेन से दुबई से इस्लामाबाद पहुंचे और वहां से लाहौर। हेलिकॉप्टर से मीनार ए पाकिस्तान पहुंचे। वहां नमाज अता किया और पूरे परिवार और पार्टी के साथ एकजुटता भी दिखाई। मरियम नवाज बार बार यही कहती रहीं कि आज पूरा लाहौर मुस्लिम लीग नून के वर्करों से भरा है। यहां तक कि पीडीएम में शामिल दूसरे दलों के राजनीतिक कार्यक्रम तक रद्द करवा दिये गये ताकि 'उड़ाऊ पुत्र' की घर वापसी के दिन सारा पाकिस्तान उनका इस्तकबाल करता हुआ दिखे।
नवाज शरीफ की वापसी के रास्ते में जितनी भी कानूनी बांधाएं थीं उन्हें समय से पहले ही दूर कर दिया गया था। अदालत द्वारा उन्हें असाधारण राहत दी गयी ताकि उनकी गिरफ्तारी न हो सके। गुरुवार को ही शरीफ को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय से अल अज़ीज़िया और एवेनफील्ड में सुरक्षात्मक जमानत मिल गई थी जिसमें वह वर्तमान में दोषी ठहराए गए हैं। राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो या नैब जिसने कभी कथित भ्रष्टाचार को लेकर शरीफ परिवार को परेशान किया था, उसको अचानक शरीफ के देश लौटने और अदालत की बजाय सीधे जलसा में जाने पर कोई आपत्ति नहीं हुई। इसी तरह, इस्लामाबाद की एक नैब अदालत ने तोशाखाना से लिए गए वाहनों से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में शरीफ के खिलाफ लंबित गिरफ्तारी वारंट को निलंबित कर दिया।
बहरहाल पाकिस्तान में राजनीति की एक तय गाइडलाइन रही है। "प्रधानमंत्री बनने के लिए आगे बढ़ो, लेकिन अंत में जेल जाने के लिए तैयार रहो।" नवाज शरीफ संभवत: जानते हैं कि वह पहले भी तीन बार कोशिश कर चुके हैं और उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने की भीषण पीड़ा झेलनी पड़ी है। जाहिर है, एक महत्वाकांक्षी राजनीतिज्ञ की तरह उनके लिए भी उनके राजनीतिक सिद्धांत सत्ता पर एक और दांव लगाने से ज्यादा मूल्यवान नहीं हैं। परन्तु सवाल यह है कि क्या उन्हें अपने लगाये गये इस दांव से एक बार फिर पछतावा होगा? क्या उनके चौथी बार प्रधानमंत्री बनने का अंत एक बार फिर जेल और देश निकाला पर खत्म होगा?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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