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नरेंद्र मोदी के 20 साल: मोदी के सामने अब मोदी ही चुनौती

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नई दिल्ली, 07 अक्टूबर। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने 20 साल पूरे कर लिये। वे 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। वे 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। सात साल से प्रधानमंत्री हैं।

narendra modi 20 years in power know challenges and journey

नरेन्द्र मोदी की यह राजनीतिक यात्रा धूप और छांव के बीच से गुजरी है। कहीं चढ़ाव है तो कहीं उतार है। कुछ उपलब्धियां हैं तो कुछ नाकामियां भी हैं।

370 सबसे बड़ी कामयाबी, कोरोना संकट सबसे बड़ी नाकामी

370 सबसे बड़ी कामयाबी, कोरोना संकट सबसे बड़ी नाकामी

आमतौर पर किसी सर्वे के नमूने प्रमाणिक नहीं होते, क्यों कि वे सम्पूर्ण जनमत का प्रतिनिधित्व नहीं करते। लेकिन इससे निकलने वाले संकेतों के आधार पर जनता के मूड का अंदाजा लगाया जा सकता है। मई 2021 में एबीपी- सी-वोटर ने मोदी सरकार के कामकाज पर एक रायशुमारी की थी। 543 चुनाव क्षेत्रों के करीब एक लाख 40 हजार लोगों ने इस सर्वे में अपनी राय जाहिर की थी। इसके मुताबिक मोदी सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी रही कश्मीर से धारा 370 को हटाना। सबसे बड़ी नाकामी कौन रही ? करीब 41 फीसदी लोगों ने कहा था कि मोदी सरकार कोरोना संकट से निबटने में विफल रही। लोगों ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि कोरोना की दूसरी लहर के बीच सरकार ने पांच राज्यों में विधानसभा और उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराये। चुनावी रैलियों में कोरोना गाइड लाइन का बिल्कुल पालन नहीं हुआ। जनता की जान जोखिम में डाल कर चुनाव कराने के फैसले को लोगों ने गलत करार दिया था। लोगों ने बेरोजगारी और महंगाई को मोदी राज की सबसे बड़ी समस्या बताया था। इस सर्वे पर भरोसा हो या या न हो लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भी मानना है कि कोरोना संकट के कारण मोदी सरकार की लोकप्रियता में गिरावट आयी है। नरेन्द्र मोदी की छवि चुनाव जिताने वाले नेता की रही है। लेकिन अब उनकी क्षमता पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

मोदी के सामने मोदी की ही चुनौती

मोदी के सामने मोदी की ही चुनौती

अगर नरेन्द्र मोदी के खिलाफ लोगों में नाराजगी है तो क्या राहुल गांधी को इसका फायदा मिलेगा ? सवाल पूछा गया था, अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री होते तो क्या वे कोरोना के खिलाफ नरेन्द्र मोदी की तुलना में बेहतर लड़ाई लड़ते ? इसका जवाब ना मिला था। सरकार के खिलाफ गुस्सा है फिर लोगों ने राहुल गांधी के प्रति समर्थन नहीं दिखाया। उनके गुस्से की वजह ये थी कि नरेन्द्र मोदी बेहतर कार्य कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया ? यानी नरेन्द्र मोदी के सामने खुद नरेन्द्र मोदी ही चुनौती हैं। विभाजित और कमजोर विपक्ष भी मोदी को चुनौती देने की स्थिति में अभी भी नहीं पहुंच सका है। तमाम नाकामियों के बावजूद नरेन्द्र मोदी इसलिए जीत जा रहे हैं क्यों कि कोई मजबूत विकल्प ही नहीं है। जिन राज्यों में विकल्प है वहां भाजपा हार रही है। लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए अभी भी विकल्पहीनता की स्थिति बनी हुई है।

सीएम और पीएम के रूप में 20 साल

सीएम और पीएम के रूप में 20 साल

नरेन्द्र मोदी भारत के छठे एसे नेता हैं जो मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बने। इस सूची में वे सबसे सफल नेता हैं और कार्यकाल के हिसाब से नम्बर एक पर हैं। उनसे पहले मोराराजी देसाई, चरण सिंह, वीपी सिंह, पीवी नरसिम्हा राव, एचडी देवेगौड़ा सीएम से पीएम बने थे। इनमें से नरसिम्हा राव को छोड़ कर कोई अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया था। चरण सिंह 170 दिन प्रधानमंत्री रहे तो मोरारजी देसाई 2 साल 116 दिन। जब कि नरेन्द्र मोदी अपना पहला कार्यकाल पूरा कर दूसरी बार सरकार चला रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति सीएम और पीएम के रूप में लगातार 20 साल पूरा कर चुका है तो जरूर में उसमें कुछ खास बात रही होगी। जोड़तोड़ की राजनीति से तो ये मुमकिन नहीं। जनता की कसौटी पर खरा उतने के बाद ही उसे यह कामयाबी मिली है। नरेन्द्र मोदी के दम पर भाजपा ने दो बार अकेले पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। दूसरी बार जीत का अंतर और बढ़ गया। 1984 में कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली थी। लेकिन उसके बाद कोई राजनीति दल अकेले बहुमत हासिल नहीं कर पाया था। नरेन्द्र मोदी ने जरूर करिश्मा किया। लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद नरेन्द्र मोदी की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा है। सीएए, एनआरसी, किसान आंदोलन जैसे मुद्दे उनके सामने चुनौती बन कर खड़े हो गये हैं। सत्ता के शीर्ष पर लगातार बने रहना बेहद मुश्किल काम है। नरेन्द्र मोदी इसी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। अगर कोई नरेन्द्र मोदी को हराएगा तो वह खुद नरेन्द्र मोदी ही होंगे।

आधे से अधिक वायदे पूरे नहीं फिर भी मिली जीत

आधे से अधिक वायदे पूरे नहीं फिर भी मिली जीत

क्या कोई नेता बिना वायदा पूरा किये भी चुनाव जीत सकता है ? नरेन्द्र मोदी ने यह भी मुमकिन कर दिखाया है। 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले बीबीसी ने एक अध्ययन में पाया था नरेन्द्र मोदी ने 2014 में कुल 346 चुनावी वायदे किये थे। इनमें से केवल 117 वायदे पूरे किया गये थे। जब कि 190 अधूरे रह गये और 39 पर कोई अमल ही नहीं हुआ। इसके बावजूद नरेन्द्र मोदी 2019 में और अधिक सीटों के साथ मजबूती से जीते। 2014 में 282 सीट जीतने वाली भाजपा 2019 में 303 पर पहुंच गयी। जब नरेन्द्र मोदी ने आधे से अधिक चुनावी वायदे पूरे नहीं किये तब भी वे कैसे जीत गये ? इस सवाल के जवाब में राजनीतिक पंडितों का कहना है, कई बार भावनाओं की आंधी में मुद्द तिनके की तरह उड़ जाते हैं। अब ये संबंधित नेता पर निर्भर है कि वह भावनाओं की आंधी कैसे निर्मित करता है। अभी लोकसभा चुनाव में समय है। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले कौन से मुद्दा कब ‘नैरेटिव' चेंज कर देगा, कहना मुश्किल है। हां, नरेन्द्र मोदी के सामने अभी बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत को बरकरार रखना है। फिलहाल प्रियंका गांधी और राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में सुर्खियां बटोर रहे हैं और नरेन्द्र मोदी को उनसे मुकाबला करना है।

English summary
narendra modi 20 years in power know challenges and journey
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