Rahul Gandhi Case: राहुल गांधी की सदस्यता बहाली में नयी अड़चन

Rahul Gandhi Case: मोहम्मद फैजल की सदस्यता बहाल किए जाने को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद राहुल गांधी के सामने नया संकट खड़ा हो गया है।

Modi surname case hurdle in restore Rahul Gandhis Lok Sabha membership

Rahul Gandhi Case: राहुल गांधी इस कोशिश में लगे हुए हैं कि मोदी सरनेम वाले केस में उनके कनविक्शन पर रोक लग जाए। असल में कानून के जानकारों ने बिना किसी कानूनी आधार के यह धारणा बना दी है कि अगर कोर्ट कनविक्शन पर स्टे लगा देती है, तो राहुल गांधी की सदस्यता बहाल हो जाएगी। भले ही वह बरी न हों। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कानूनविदों की इसी राय के बाद लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल की सदस्यता बहाल कर दी थी। हालांकि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कनविक्शन पर स्टे लगने से सदस्यता बहाल हो जाएगी।

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जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 4 में पहले यह प्रावधान था कि मामला हायर कोर्ट में लंबित होने तक सांसद या विधायक की सदस्यता बनी रहेगी। इसी प्रावधान के कारण निचली अदालत से सजा होने के बावजूद सांसदों और विधायकों की सदस्यता बनी रहती थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में अपने फैसले में जन प्रतिनिधित्व कानून की इसी धारा (8) 4 को तो रद्द किया था। इस धारा के रद्द हो जाने के बाद अब धारा (8) 3 के मुताबिक दो साल या उससे ज्यादा सजा पर सांसद या विधायक की सदस्यता खत्म हो जाती है।

अगर कवविक्शन पर रोक लगने मात्र से सदस्यता बहाल कर दी जाएगी तो यह पहले जैसी स्थिति ही हो जाएगी, जिसके मुताबिक दोषी ठहराए जाने और सजा हो जाने के बावजूद वे आखिरी अदालत के फैसले तक सांसद और विधायक बने रहेंगे। राजनीतिज्ञों ने सांसदी और विधायकी बचाए रखने के लिए कनविक्शन पर स्टे का चोर दरवाजा निकाल लिया है।

लक्षद्वीप से चुने गए मोहम्मद फैजल की सदस्यता बहाल करके लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने इस चोर दरवाजे को मान्यता दे दी है। मोहम्मद फैजल को हत्या के प्रयास के एक मामले में दोषी पाया गया था और उन्हें 10 साल कैद की सजा हुई थी। बाद में केरल हाईकोर्ट ने उनकी कनविक्शन पर रोक लगा दी। लोकसभा स्पीकर ने हालांकि उनकी सदस्यता बहाली में दो महीने लगाए, लेकिन उनकी सदस्यता बहाल करने की बजाय स्पीकर को उनसे पूछना चाहिए था कि उनकी सदस्यता किस कानून के तहत बहाल की जानी चाहिए।

कानून में सिर्फ सदस्यता खत्म होने का प्रावधान है, बहाल होने का नहीं है। स्पीकर ने कानून मंत्रालय से राय मांगी थी, कानून मंत्रालय ने लोकसभा स्पीकर को उनकी सदस्यता बहाल करने की सलाह दे दी थी। जबकि स्पीकर को सुप्रीमकोर्ट के फैसले का इन्तजार करना चाहिए था| क्योंकि केरल हाईकोर्ट से कन्विक्शन पर स्टे के बावजूद जब स्पीकर ने दो महीनों तक उनकी सदस्यता बहाल नहीं की थी, तो मोहम्मद फैजल सुप्रीमकोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए 29 मार्च की तारीख तय की थी। लेकिन 29 मार्च को सुनवाई से दो घंटे पहले ही लोकसभा स्पीकर ने उनकी सांसदी को फिर से बहाल कर दिया। हालांकि दूसरी तरफ केरल हाईकोर्ट के फैसले को लक्षद्वीप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है।

राहुल गांधी का मामला भी इस लाईन पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कन्विक्शन पर स्टे के लिए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका लगाई हुई है। ताकि अगर कन्विक्शन पर स्टे लग जाता है तो मोहम्मद फैजल की तरह उनकी सांसदी भी बहाल हो जाएगी और यह मोदी सरकार की बहुत बड़ी हार होगी। लेकिन अब इसमें नया पेंच फंस गया है।

लखनऊ के एक एडवोकेट अशोक पांडे ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर करके सवाल किया है कि जब फैजल की सजा को किसी बड़ी कोर्ट ने रद्द नहीं किया है, तो उनकी लोकसभा सदस्यता बहाल कैसे हो गई। एडवोकेट ने जनप्रतिनिधित्व क़ानून का हवाला देकर सवाल किया है कि लोकसभा स्पीकर कैसे उनकी सांसदी को बहाल कर सकते हैं। उनका कहना है कि टॉप कोर्ट इस मामले में संजीदगी से विचार करे, क्योंकि इसी स्थिति को तो 2013 में सुप्रीमकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने खत्म किया था, जब जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि दोषी ठहराए जाने की तारीख से ही उनकी सदस्यता खत्म हो जाएगी|

हालाकि राहुल गांधी की सदस्यता खत्म होने तुरंत बाद एक पीआईएल में इस प्रावाधान को भी चुनौती दी गई है, जो पेंडिंग पड़ी है। लेकिन अशोक पांडे की नई याचिका ने कन्विक्शन पर स्टे के बाद सांसद या विधायक की सदस्यता बहाली पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। मोहम्मद फैजल के मामले में उनके कन्विक्शन पर स्टे लगा है, उन्हें बरी नहीं किया गया। याचिकाकर्ता अशोक पांडे ने अपनी याचिका में कहा है कि अगर हाईकोर्ट उन्हें 307 के मामले से ही बरी कर देता तो बात और थी। लेकिन हाईकोर्ट ने सिर्फ कन्विक्शन और सजा पर रोक ही लगाई है। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से यह अपील भी की है कि वह इस बात को भी देखे कि क्या अपीलेंट कोर्ट किसी मामले में कन्विक्शन पर रोक लगा सकती है और फिर उसके बाद कोई जनप्रतिनिधि फिर से बहाल हो सकता है।

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    फैजल को 9 जनवरी को हत्या के प्रयास के मामले में 10 साल की सजा कवारत्ती सेशन कोर्ट ने सुनाई थी। सजा के बाद उन्हें 11 जनवरी को संसद से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। 25 जनवरी को केरल हाईकोर्ट ने उनके कन्विक्शन और सजा पर रोक लगा दी थी। उसके बाद उन्होंने उसी दिन अपनी सांसदी को बहाल करने की अपील की थी, जिस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने 29 मार्च को उनकी सदस्यता बहाल कर दी थी| लेकिन मोहम्मद फैजल की सदस्यता बहाल किए जाने को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद राहुल गांधी के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि अगर गुजरात हाईकोर्ट उनके कन्विक्शन पर स्टे भी लगा देता है, तब भी मामला सुप्रीमकोर्ट में लंबित होने को आधार बनाकर स्पीकर उनकी सदस्यता बहाल करने से मना कर सकते हैं|

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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