लोकतंत्र के महापर्व में बौराए से हम, अपने वोट की कीमत समझिए

नई दिल्ली। यह मौसम बौराने का है। पूरा देश बौराया हुआ है, चाहे आम के पेड हों या आम जनता। आम के पेड़ बौर से लदे हैं और आम जनता लोकसभा चुनाव को लेकर बौराई हुई है। चुनावी बौर 23 मई को फल का रूप ले लेंगे और जनता उसका स्वाद चखेगी। लेकिन कुछ को फल पसंद नहीं आएंगे। हर आम चुनाव के बाद ऐसा ही होता है। देश का हर नागरिक चाहता है कि उसे मनमाफिक फल खाने को मिलें। यानी सरकार ऐसी बने जो उनकी मुश्किलें कम कर सके। भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। ऐसा लोकतंत्र जिसके फल सब खाना चाहते लेकिन उस वृक्ष को सींचने में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता सुनिश्चित नहीं होती। यही कारण है कि आजादी के बाद अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में शत-प्रतिशत तो जाने दीजिये, दो-तिहाई मतदान भी नहीं हुआ। लोग वोट डालने की जहमत नहीं उठाते। फिर परिणाम आने के बाद नेताओं को कोसते हैं। 2014 में 16वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में अब तक का सर्वाधिक 66.38 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार भी देश की जनता जोश में है और उम्मीद की जा रही है कि 2019 में मतदान प्रतिशत और बढेगा।

आपका पैसा आपका एक वोट

आपका पैसा आपका एक वोट

लोग सोचते हैं कि उनके एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा। लेकिन लोकतंत्र में एक-एक वोट की बड़ी कीमत है। कोई भी नागरिक अपने मताधिकार के प्रयोग से वंचित न हो इसके लिए सरकार चुनाव व्यवस्था में अरबों रूपये खर्च करती है। क्या आप जानते हैं कि देश में चुनाव कराने में जितना खर्च आता है वो दरअसल हमारी जेब से ही जाता है। हर पांच साल में लोकसभा चुनाव होते हैं। अपवाद स्वरूप मध्यावधि चुनाव भी कराने पड़ते हैं। हर चुनाव में पिछले चुनाव से ज्यादा खर्च होता है। इस बार लोकसभा चुनाव में कितना खर्च हुआ, इसका पता तो आम चुनाव के बाद ही चलेगा। लेकिन साल 2014 के लोकसभा चुनाव में के खर्च में 3870.35 करोड़ रूपये खर्च हुए थे। भारत के पहले लोकसभा चुनाव में करीब 20 करोड़ मतदाता थे। हर चुनाव में मतदाताओं की संख्या बढ़ जाती है। इसके साथ ही चुनाव खर्च भी बढ़ जाता है । इस बार 90 करोड़ मतदाता अपना वोट डालेंगे। इसमें आपका भी एक-एक वोट शामिल है। मतदाताओं का यह आंकड़ा अमेरिका,ब्राजील और इंडोनेशिया की कुल जनसंख्या से अधिक है। ये तीनों देश जनसंख्या के लिहाज से तीसरे,चौथे और पांचवें सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं। इसके बावजूद भारत में बहुत से लोग अपने वोट की कीमत नहीं समझते।

पासा पलट सकता है आपका वोट

पासा पलट सकता है आपका वोट

पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में हार-जीत का सबसे कम अंतर जम्मू-कश्मीर की लद्दाख सीट पर था जहां बीजेपी के टी चेवांग ने मात्र 36 मतों के अंतर से निर्दलीय गुलाम राजा को हराया था। छत्तीसगढ़ की महासमुंद सीट पर बीजेपी की जीत का अंतर महज 1217 वोट का था जहां पार्टी के चंदूलाल साहू ने अजीत जोगी को हराया था। कर्नाटक की रायचूर सीट पर कांग्रेस के बी वी विनायक ने बीजेपी के ए शिवनगौड़ा नायक को 1499 मतों से हराया था। लक्षद्वीप सीट पर एनसीपी के मोहम्मद फैजल ने हमदुल्ला सईद को 1535 मतों से और महाराष्ट्र की हिंगोली सीट पर कांग्रेस के राजीव शंकर राव सातव ने शिवसेना के वानखेडे़ सुभाष बापूराव को 1632 मतों से हराया था। 2009 के संसदीय चुनावों में बसपा की सीमा उपाध्याय 1.44 प्रतिशत मतों से जीत सकीं थी जबकि भाजपा की मेनका गांधी आंवला संसदीय क्षेत्र में अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी से महज 1.09 फीसदी वोटों के अन्तर से विजयी हो सकीं। बरेली से बसपा के प्रवीण सिंह की जीत 1.32 प्रतिशत के अन्तर से और लखीमपुर खीरी में कांग्रेस के जफर नकवी 1.24 प्रतिशत के अन्तर से जीत हासिल कर सके थे। उस चुनाव में चन्दौली से तो सपा के राम किशुन मात्र 459 मतों से बसपा के कैलाश नाथ सिंह यादव को हराया था।

गिर के जंगलों का अकेला मतदाता

गिर के जंगलों का अकेला मतदाता

चुनाव आयोग देश में दुर्गम और सुदूर इलाकों में भी एक-एक वोट के लिए पोलिंग बूथ की व्यवस्था करता है। ऐसा ही एक मतदान केंद्र गुजरात में है जो हर आम चुनाव में चर्चा में रहता है। गुजरात में गिर के जंगल में बनेज गाँव के एकमात्र मतदाता हैं महंत भरतदास दर्शनदास,जिनके लिए चुनाव आयोग ने एक मतदान केंद्र स्थापित किया है। इस मतदान केंद्र उल्लेख पीएम नरेंद्र मोदी ने 2019 की अपनी पहली मन की बात में किया था। चुनाव आयोग ने बुजुर्ग दर्शनदास के लिए विशेष बूथ इसलिए स्थापित किया है क्योंकि इसके बिना उन्हें निकटतम बूथ में वोट करने के लिए 120 किमी की यात्रा करनी होती। इस मतदान केंद्र पर दो पुलिस कर्मियों के आलावा चार मतदान कर्मी होंगे। इस व्यवस्था के लिए दर्शनदास ने आभार जताया है और चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि जो लोग मतदान न करें उनके राशन कार्ड निरस्त दिए जाएं।

हिमांचल प्रदेश में है दुनिया के दो सबसे ऊंचे मतदान केंद्र

हिमांचल प्रदेश में है दुनिया के दो सबसे ऊंचे मतदान केंद्र

अब बात करते हैं दुनिया के सबसे ऊंचे मतदान केंद्र की। जी हाँ, सबसे ऊंचाई पर स्थित मतदान केंद्र की। चीन सीमा से महज 10 किलोमीटर दूर 15,256 फीट की ऊंचाई पर यह मतदान केंद्र बनाया गया है। लोकसभा चुनाव में हिमाचल के लाहौल-स्पीति जिले का टशीगंग दुनिया का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र होगा। स्पीति के मुख्यालय काजा से करीब 35 किलोमीटर दूर टशीगंग केंद्र में अभी भी तीन से चार फीट तक बर्फ की मोटी चादर जमी है। मतदान केंद्र तक जाने वाली संपर्क सड़क बर्फ के कारण बंद पड़ी है।

ख़ास बात है कि पहले 14,567 फीट की ऊंचाई पर स्थित स्पीति के ही हिक्किम को दुनिया का सबसे ऊंचा पोलिंग बूथ होने का दर्जा प्राप्त था। अब यह रिकॉर्ड टशीगंग के नाम दर्ज हो गया है। समुद्र तट से 4650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण टशीगंग पहुंचने पर सांस लेने में दिक्कत होती है। टशीगंग पोलिंग बूथ में कुल 49 मतदाता हैं, जिनमें 29 पुरुष और 20 महिलाएं हैं। जरा सोचिये इतनी विशाल आबादी होने के बावजूद भारत की लोकतान्त्रिक व्यवस्था में कितनी पारदर्शिता है। यही इसकी खूबसूरती और ताकत भी है। हम इसकी अहमियत समझें तो भारत का लोकतंत्र और मजबूत होगा।

(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)

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