BJP Tickets: टिकट बंटवारे में भी मोदी मैजिक का ध्यान रखेगी भाजपा

BJP Tickets: 17-18 फरवरी को दिल्ली में हुई भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने टिकटों को लेकर जेपी नड्डा और अमित शाह को कुछ टिप्स दिये थे। इनमें प्रमुख रूप से जिन बातों पर जोर था उनमें यह भी था कि बहुत जरूरी होने पर ही 75 पार के उम्मीदवार को टिकट दिया जाए।

मोदी ने यह भी कहा था कि महिला उम्मीदवारों की संख्या 33 प्रतिशत बढ़ाई जाए। ब्यूरोक्रेट्स को महत्व दिया जाए और तीन बार के सांसदों से तौबा किया जाए और परिवारवाद से बचा जाए। मोदी ने निर्देश दिया था कि ऐसे उम्मीदवारों पर ध्यान दिया जाए जो पार्टी में सक्रिय न हों लेकिन अपने क्षेत्र में जिनका बड़ा नाम हो।

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मोदी ने कहा था कि 29 फरवरी तक कम से कम 300 सीटों के उम्मीदवार फाइनल कर लिये जाएं। मोदी से मिले टिप्स और दिशा निर्देश के बाद अमित शाह और अध्यक्ष नड्डा ने लगातार 11 दिन मैराथन बैठक कर 11 राज्यों से आने वाली 306 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर लिया था।

29 फरवरी को केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक शुरू होने के 6 घंटे पहले दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री मोदी को यह सूची सौंप दी थी। इसके बाद केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में लगभग 190 नामों पर मुहर लग गई है। इन नामों को रविवार या सोमवार को सार्वजनिक किया जा सकता है।

भाजपा की पहली सूची बेहद चौंकाने वाली हो सकती है। भाजपा के कई दिग्गजों का नाम पहली सूची में नदारद हो सकता है। 370 सीटों का टारगेट लेकर चल रही भाजपा के लिए एक-एक सीट महत्वपूर्ण है और इस कारण भाजपा हर सीट पर सभी समीकरणों पर खरा उतरने वाले उम्मीदवार पर मुहर लगाने की तैयारी में है।

भाजपा हर सीट का महत्व जानती है इसलिए छोटे छोटे दलों को भी साधने की हरसंभव कोशिश कर रही है। असम की सभी 14 लोकसभा सीटों को जीतने के लिए भाजपा ने असम गण परिषद को दो सीटें और एक सीट यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल को दी है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश में सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा अपने सहयोगी दलों में शामिल अपना दल को मिर्जापुर और राबर्टसगंज, जयंत चौधरी की पार्टी को बिजनौर और बागपत, ओपी राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को घोसी और संजय निषाद की पार्टी को खलीलाबाद सीट दे सकती है।

बिहार में भाजपा का गठबंधन जेडीयू, लोकजनशक्ति पार्टी, जीतनराम मांझी की हम पार्टी से गठबंधन है। अभी गठबंधन में सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है, इस कारण बिहार की सीटों का नाम पहली सूची में आने की संभावना कम है। झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने 13 सीटों पर लड़ने का मन बनाया है। झारखंड में अपने सहयोगी आजसू को गिरडीह सीट और कुछ ही दिन पूर्व वीरभूम से कांग्रेस की सांसद गीता कोडा के भाजपा में आने के बाद यह सीट गीता कोडा को मिलना तय है। खबर है कि भाजपा के दिग्गज नेता और मोदी के कटु आलोचक रहे यशंवत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा का टिकट हजारीबाग से कट सकता है।

भाजपा पहली सूची में झारखंड की राजमहल सीट घोषित कर सकती है क्योंकि 2019 में भाजपा यह सीट हार गई थी। पंजाब को लेकर भाजपा ने अभी नाम फाइनल नहीं किए है। भाजपा अकाली दल से बातचीत कर रही है। पंजाब से उम्मीदवारों के नाम भाजपा दूसरी सूची में जारी करेगी। चंडीगढ सीट से भाजपा युवराज सिंह को उतार सकती है। हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में से 4 सीटों पर भाजपा पहली सूची में उम्मीदवार घोषित कर सकती है।

हिमाचल में भाजपा कांग्रेस के संकट पर नजर रख रही है। भाजपा कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के अगले कदम का इंतजार कर रही है। अगर प्रतिभा सिंह से बात बन जाती है और हिमाचल में कोई बड़ा खेला होता है तो प्रतिभा सिंह मंडी से भाजपा की उम्मीदवार बन सकती हैं। फिलहाल हिमाचल की सीटें पहली सूची में शामिल नहीं होगी। राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड को लेकर भाजपा को पूरा भरोसा है कि वह इन राज्यों की सभी 56 सीटें जीतेगी।

उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें देने वाले राज्य महाराष्ट्र में भाजपा उद्धव ठाकरे, कांग्रेस और शरद पवार में होने वाले सीटों के बंटवारे के बाद उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर सकती है। महाराष्ट्र में भाजपा 35 सीटों पर लड़ सकती है और सहयोगी दल एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के साथ अन्य छोटे दलों को मिलाकर 13 सीटें दे सकती है। मध्य प्रदेश में 2019 में हारी एकमात्र सीट छिंदवाडा में भाजपा कोई नया प्रयोग कर सकती है। नकुलनाथ को भाजपा में लाकर या उनके सामने कोई तगड़ा उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर भाजपा काम कर रही है।

भाजपा पहली सूची में दक्षिण के राज्यों तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना और कर्नाटक को शामिल कर सकती है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भाजपा कर्नाटक को लेकर गंभीर है। कर्नाटक के कई दिग्गज नेताओं का टिकट कट सकता है।

तमिलनाडु और केरल में भाजपा टिकट बंटवारे में नए प्रयोग करने की पूरी संभावना है जिससे यहां कमजोर होने के बाद भी खाता खुलने की संभावना बने। केरल में छोटे छोटे दलोें से गठबंधन और तमिलनाडु में विरोधी दलों के बागी को साधकर भाजपा अपने लिए संभावना तलाश रही है। ऐसे में पहली सूची में दक्षिण भारत को प्रतिनिधित्व मिलना तय है।

आंध्र प्रदेश में भाजपा और तेलगू देशम पार्टी का गठबंधन लगभग तय है। गठबंधन का ऐलान होने के बाद भाजपा दूसरी सूची में आंध्र प्रदेश के नामों की घोषणा कर सकती है। तेलंगाना में पिछले चुनाव में 4 सीटें जीतनेवाली भाजपा पहली सूची में उम्मीदवारों के नाम दे सकती है। तेलंगाना में विधानसभा चुनाव हारे तीन सांसदों का टिकट भी भाजपा काट सकती है। तेलंगाना में बीआरएस के कुछ नेताओं का नाम भाजपा की सूची में शामिल हो सकता है। तेलंगाना में भाजपा की नजर बीआरएस के असंतुष्टों पर है।

भाजपा की कोशिश 10 मार्च तक पचास प्रतिशत उम्मीदवार घोषित करने की है। गौरतलब है कि 2019 के चुनाव में भी भाजपा ने अधिसूचना जारी होने के कुछ दिन पहले 164 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी।

पहली सूची में प्रधानमंत्री मोदी का वाराणसी से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। लेकिन अपने हर फैसले से चौंकाने वाले मोदी अपनी सीट को लेकर चौंका भी सकते हैं। मोदी के अयोध्या से भी लड़ने की चर्चा है। इसके अलावा मोदी के दक्षिण की किसी सीट से लड़ने की खबरें भी हैं। मोदी देश को यह बताने की कोशिश कर सकते हैं कि वह पूरे देश के नेता है और किसी भी सीट से चुनाव जीतने का माद्दा रखते हैं। ऐसे में मोदी के वाराणसी के अलावा किसी अन्य सीट से लड़ने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।

इसमें कोइ दो राय नहीं कि तीसरी बार 370 सीटों के साथ प्रधानमंत्री बनने का दावा करने वाले नरेन्द्र मोदी प्रत्याशियों के चयन में कोई कमी नहीं रहने देंगे। मोदी खुद एक एक सीट को मोनिटर कर रहे हैं। ऐसे में किसी का भी टिकट पक्का नहीं है। जिनके टिकट कटने की कल्पना कोई नहीं कर सकता उनके भी टिकट कट सकते हैं और जिनको टिकट मिलने की कोई सपने में भी नहीं सोच सकता उनको भी भाजपा से टिकट मिल सकते हैं। यही मोदी की भाजपा है। यहां कुछ भी संभव है।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि भाजपा में टिकट चाहे जिसको मिले हर सीट पर उम्मीदवार मोदी ही नजर आयेंगे। इसी को नड्डा और शाह ने जीत का फार्मूला बनाया है। जीते कोई भी, दिखना यही चाहिए कि यह मोदी की जीत है। इसी को ध्यान में रखकर टिकटों का बंटवारा किया जाएगा ताकि चुनाव के दौरान और उसके बाद भी मोदी मैजिक बरकरार रहे। देखना यह होगा कि तीसरी बार यह फार्मूला कितना कारगर होगा।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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