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Law Reforms: अंग्रेजों के कानूनों का होगा भारतीयकरण

सत्रहवीं लोकसभा के आख़िरी मानसून सत्र का आख़िरी दिन एतिहासिक बन गया।स्वतन्त्रता के 75 साल पूरे होने से चार दिन पहले ग्यारह अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह ने ब्रिटिश काल की क़ानून व्यवस्था की बेड़ियां तोड़ने की शुरुआत कर दी।जो काम पिछले तेरह प्रधानमंत्री नहीं कर सके थे, वे काम मोदी सरकार ने करने शुरू कर दिए हैं।मोदी से पहले पूर्ण बहुमत वाले चार प्रधानमंत्री हुए, जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी।किसी ने राजनीतिक स्वतन्त्रता को स्वाधीनता में बदलने के लिए कदम नहीं उठाए।

नरेंद्र मोदी पूर्ण बहुमत वाले देश के पांचवें प्रधानमंत्री हैं।मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहले अनुच्छेद 370 की ऐतिहासिक गलती ठीक की और अब अंग्रेजों के कानूनों को भारतीय संहिता में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में एलान किया है कि अंग्रेजों के जमाने के तीन मूलभूत कानून खत्म होंगे।

Law Reforms

गृहमंत्री ने 1860 के ब्रिटिश राज की आईपीसी की जगह पर नई भारतीय न्याय संहिता, 1898 की सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिंता और 1872 के इंडियन एविडेंस कोड की जगह भारतीय साक्ष्य सहिंता के तीन नए बिल लोकसभा में पेश किए।चौथा बड़ा बदलाव यह करने की घोषणा की गई कि राजद्रोह का मौजूदा क़ानून पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा, क्योंकि यह राजद्रोह क़ानून अंग्रेजों ने भारतीयों के खिलाफ बनाया था।राजद्रोह कानून को नए भारतीय स्वरूप में लाया जाएगा।

जो तीन क़ानून बदले जाने हैं, उनमें भारी बदलाव का प्रारूप है, जैसे आईपीसी में 511 धाराएं हैं, अब भारतीय न्याय सहिंता में सिर्फ 356 धाराएं बचेंगी। 175 धाराएं बदलेंगी, 8 नई जोड़ी जाएंगी, 22 धाराएं खत्म होंगी।इसी तरह सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिंता में 533 धाराएं बचेंगी, 160 धाराएं बदलेंगी, 9 नई जुड़ेंगी, 9 खत्म होंगी।पूछताछ से ट्रायल तक वीडियो कॉन्फ्रेंस से करने का प्रावधान होगा, जो पहले नहीं था।पुलिस थानों, कोर्ट, पुलिसिया तन्त्र और जजों का भय खत्म किया जाएगा।फिलहाल तीनों बिल को जांच के लिए संसदीय कमेटी के पास भेजा गया है।

Ajay Setia

सरकार का इरादा 2024 के पहले और इस लोकसभा के अंतिम सत्र में 26 जनवरी से पहले इन तीनों बिलों को पास करने का है।सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम 3 साल में देना होगा। देश में 5 करोड़ केस अदालतों में लंबित हैं, इनमें से 4.44 करोड़ केस ट्रायल कोर्ट में हैं।

ब्रिटिश काल के शब्द राजद्रोह को हटाकर देशद्रोह शब्द आएगा, अंग्रेजों ने राजद्रोह क़ानून स्वतन्त्रता संग्राम को कुचलने के लिए भारतीयों के खिलाफ बनाया था।अभी आईपीसी की धारा 124ए में राजद्रोह में 3 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावाधान है।भारत का अपना जो नया क़ानून आएगा, उसमें भारत राष्ट्र के खिलाफ कोई भी कृत्य, चाहे बोला हो या लिखा हो, या संकेत या तस्वीर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया हो, तो उसमें 7 साल से उम्रकैद तक सजा संभव होगी।देश की एकता एवं संप्रभुता को खतरा पहुंचाना अपराध होगा।आतंकवाद शब्द की परिभाषा तय की जाएगी, अभी तक आतंकवाद की परिभाषा ही तय नहीं है।

आजादी के बाद और संविधान लागू होने के बावजूद अंग्रेजों के जमाने के दो सदी पुराने कानूनों से आपराधिक न्याय प्रणाली चल रही थी।इसे औपनिवेशिक गुलामी माना जा रहा था।आर्थिक मामलों से जुड़े कई मामलों को सरकार ने आपराधिक कानून के दायरे से बाहर रखने के लिए जन विश्वास बिल पारित करवाया है।मोदी सरकार ने अपना दूसरा कार्यकाल शुरू होते ही इन चारों कानूनों में बदलाव के लिए विचार विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

18 राज्यों, 6 केंद्र शासित प्रदेशों, सुप्रीम कोर्ट, 22 हाई कोर्टों, न्यायिक संस्थाओं, 142 सांसदों और 270 विधायकों के अलावा जनता ने भी इन विधेयकों को लेकर सुझाव दिए हैं।चार साल की चर्चा और इस दौरान 158 बैठकों के बाद सरकार ने बिल को पेश किया है।इन बदलावों के लिए पहली बैठक सितंबर 2019 में संसद भवन के पुस्तकालाय के रूम नंबर जी-74 में हुई थी।हालांकि कोरोना के दौरान एक साल तक इसमें कोई प्रगति नहीं हुई, जिस कारण प्रक्रिया पूरी करने में विलंब हुआ।

सरकार ने नए कानूनों के साथ साथ आधुनिकीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण बदलाव करने का फैसला किया है।डिजिटल रिकॉर्ड्स को वैधता देने से लेकर एफआईआर और कोर्ट के फैसले तक पूरा सिस्टम डिजिटल और पेपरलेस होगा।सर्च व जब्ती की वीडियोग्राफी होगी।सात साल या उससे ज्यादा की सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक टीम का मौके पर जाना आवश्यक होगा।देश की सभी अदालतें 2027 तक कंप्यूटरीकृत होंगी|

पहली बार मामूली अपराधों (जैसे नशे में हंगामा, 5 हजार से कम की चोरी) के लिए 24 घंटे की सजा या एक हजार रु. जुर्माना या सामुदायिक सेवा करने की सजा हो सकती है।अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य कई यूरोपीय देशों में ऐसा कानून है।जबकि भारत में अभी ऐसे अपराधों पर कई साल मुकदमा चलाने के बाद जेल भेज दिया जाता है।
धर्मान्धता में मॉब लिन्चिंग का जो नया अपराध शुरू हुआ है, उसमें मौत की सजा का प्रावधान किया जाएगा। पांच या पांच से ज्यादा लोग जाति, नस्ल या भाषा आधार पर हत्या करते हैं तो कम से कम 7 साल और अधिकतम मौत की सजा होगी।फिलहाल मॉब लिन्चिंग पर भारत में कोई क़ानून नहीं था, धारा 302, 147-148 में कार्रवाई होती है|

पुलिस को 90 दिन में आरोप पत्र दाखिल करना होगा।कोर्ट इसे ज्यादा से ज्यादा 90 दिन बढ़ा सकेगा, लेकिन अधिकतम 180 दिन में जांच पूरी कर ट्रायल के लिए भेजनी होगी।ट्रायल के बाद कोर्ट को 30 दिन में फैसला देना होगा।फैसला एक सप्ताह के भीतर ऑनलाइन अपलोड करना होगा।तीन साल से कम सजा वाले मामलों में संक्षिप्त सुनवाई पर्याप्त होगी।इससे सेशन कोर्ट में 40 प्रतिशत मुकदमे कम हो जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार के समय आतंकवादियों के केस खत्म करने की सिफारिश की गई थी, वह मामला कोर्ट में गया और कोर्ट ने मामले खत्म करने पर रोक लगा दी। बाद में कई आतंकवादियों को सजा-ए-मौत हुई, और कई आतंकवादियों को उम्र कैद की सजा भी हुई।इसी तरह अभी हाल ही में देखा गया कि गुजरात सरकार ने बिलकिस बानों के बलात्कार अपराधियों को उनकी सजा पूरी होने से पहले छोड़ दिया था, यह मामला अब सुप्रीमकोर्ट में चल रहा है।

इसी तरह बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने एक आईएएस अधिकारी की हत्या के अपराध में सजायाफ्ता राजनेता आनंद मोहन को जेल से छोड़ दिया है। आने वाले दिनों में सुप्रीमकोर्ट सजा माफी के मामले में कोई गाईड लाइन जारी कर सकती है।सरकार सजा में छूट का सियासी इस्तेमाल ना कर सकें, इसके लिए सरकार ने खुद ही नया प्रावधान किया है।मौत की सजा सिर्फ आजीवन कारावास और आजीवन कारावास को 7 साल तक की सजा में ही बदला जा सकेगा।इससे यह सुनिश्चित होगा कि राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव वाले लोग कानून से बच न सकें।सरकार पीड़ित को सुने बिना 7 साल कैद या अधिक सजा वाले केस वापस नहीं ले सकेगी|

अब तक पुलिस थानों में थाना प्रभारी की मनमर्जी चलती थी, वह किसी दूसरे थाने का मामला बता कर पीड़ित को टरका देता था। लेकिन अब नए क़ानून में प्रावधान किया जा रहा है कि देश में कहीं भी एफआईआर दर्ज करवा सकेंगे।इस तरह की जीरो एफआईआर में पहले धाराएं नहीं जुडती थीं, अब इसमें धाराएं भी जुड़ेंगी।15 दिन में जीरो एफआईआर संबंधित थाने को भेजनी होगी।

हर जिले में पुलिस अधिकारी गिरफ्तार लोगों के परिवार को प्रमाण पत्र देगा कि वे गिरफ्तार व्यक्ति के लिए जिम्मेदार हैं, जानकारी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि ऑनलाइन भी देनी होगी।नए कानून में लव जिहाद जैसे नए अपराध का इलाज भी कर दिया जाएगा।पहचान छिपाकर किसी से संबंध बनाने पर अब नई धारा जोड़ी जाएगी| शादी, नौकरी, प्रमोशन का प्रलोभन देकर या पहचान छिपाकर महिला का यौन शोषण करना अब अपराध होगा।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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