Israel under Attack: इजराइल को लहुलुहान करने में कामयाब कैसे हो गया हमास?
शनिवार की सुबह गाजा पट्टी से हमास ने जिस चौंकानेवाले अंदाज में इजराइल पर हमला किया उससे भी अधिक चौंकानेवाला था किसी संभावित हमले के प्रति इजराइल का लापरवाह होना। गाजा पट्टी के बॉर्डर इलाके में इजराइल ने आयरनड्रोम सिस्टम तैनात कर रखा है। आयरनड्रोम गाजापट्टी से हमास के संभावित राकेट हमलों को रोकने के लिए ही है। लेकिन हमास ने इतना ताबड़तोड़ हमला किया कि उन्हें पूरी तरह रोकने में आयरनड्रोम भी फेल हो गया।

हमास के दावे के मुताबिक उसने मात्र बीस मिनट के भीतर इजराइल के तटवर्ती कस्बों और शहरों पर 5000 रॉकेट दागे। हालांकि इजराइल ने 2 हजार से 2200 रॉकेट हमलों की बात स्वीकारी है। लेकिन हमास की तैयारी सिर्फ रॉकेट दागने भर की नहीं थी। इस बार उसके इस्लामिक मुजाहिद इजराइल में घुसपैठ करने के लिए तैयार बैठे थे। सुबह 6.30 बजे रॉकेट हमले के एक घंटे बाद 7.30 बजे हमास के मुजाहिदों ने दो जगह केरेम सालोम और इरेम में बार्डर फेन्सिंग तोड़ दी और इजराइल में घुस गये। उन्होंने केरेम सालोम चेक प्वाइंट को भी तबाह कर दिया।
हमास के हमलावर यहीं नहीं रुके। पैराग्लाइडर के जरिए और गाड़ियों से सैकड़ों हमास के मुजाहिद इजराइल में घुस गये और दर्जनों या फिर सैकड़ों इजरायलियों को बंधक बना लिया जिसमें कुछ सेना के जवान भी बताये जा रहे हैं। हमास के हमलावर मुजाहिदों ने इजराइल के कस्बों में पहुंचकर कहीं पुलिस स्टेशन पर कब्जा कर लिया तो कहीं दरवाजों पर दस्तक देकर कत्लेआम शुरु कर दिया।
शनिवार को दिनभर इजराइल में क्या कुछ हुआ है इसका सटीक आंकड़ा सामने आने में शायद वक्त लगे। लेकिन इतना साफ है कि गाजापट्टी से हमेशा चौंकन्ना रहनेवाला इजराइल इस बार हमास के हाथों बुरी तरह चोटिल हुआ है। अब तक 250 इजराइली नागरिकों के मरने की खबर है और लगभग 1600 इजराइली नागरिक घायल हैं जिनको इलाज के लिए अस्पतालों में ले जाया गया है।
स्वाभाविक है अगर पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास के हमले को युद्ध कहा है तो इसके पीछे उनकी आगे की रणनीति होगी। वो इसे अपने यहां एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन का आतंकी हमला बताकर भविष्य की कार्रवाइयों को सीमित नहीं करना चाहते होंगे। इजराइल इस स्टेट ऑफ वार से निपटने के लिए क्या कुछ करता है यह तो समय बतायेगा लेकिन शनिवार को अपने औचक हमले में हमास ने इजराइल को गहरे घाव जरुर दे दिये हैं।
हमास या हरका-उल-मुकावमाह-अल इस्लामिया इजराइल, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन है। लेकिन हमास की पहचान सिर्फ इतनी भर नहीं है। दुनिया की नजर में यह आतंकी संगठन फिलिस्तिनियों की नजर में एक राष्ट्रवादी संगठन है जो गाजापट्टी पर अवैध रूप से शासन करता है। हमास 35 साल पहले 1987 में मिस्र के एक अन्य इस्लामिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से अलग होकर बना था। 2007 में इसने यासिर अराफात की फतह पार्टी को सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से खत्म करके और यासिर अली अराफात की पार्टी द्वारा नियुक्त कर्मचारियों को दफ्तरों से भगाकर गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया था।
अब हमास ही फिलिस्तीन का चेहरा है, ताकत है और पहचान भी। ईरान, सीरिया और तुर्किये का उसे समर्थन हासिल है। उसने शासन करने का इस्लामिक सिस्टम बनाया है जिसमें तालिबान की तर्ज पर उसके पास मुजाहिदों की आर्मी है और दावा नामक संगठन है जो इस्लामिक तरीके से गाजापट्टी के 24 लाख फिलिस्तीनी सुन्नी अरब मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि इसके बावजूद वह सऊदी अरब को अपने दुश्मन देशों में गिनती करता है।
बहरहाल, आनेवाले दिनों में इजराइल चाहे जिस तरीके से इस 'युद्ध' को अंजाम तक पहुंचाये लेकिन इतना तो तय है कि हमास ने शनिवार को जो "ऑपरेशन अल अक्सा फ्लड" शुरु किया उसने इजराइल को लहुलुहान कर दिया है। इतना बड़ा हमला उसने एकदम से तो नहीं किया होगा। इसके पीछे उसकी भी अपनी तैयारी रही होगी। लेकिन आश्चर्य की बात है कि इतने व्यापक स्तर पर इजराइल पर हमले की हमास ने तैयारी कर ली, उसे अंजाम भी दे दिया लेकिन इजराइल की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी।
इजराइल अपनी जिस अभेद्य सुरक्षा के लिए पहचाना जाने लगा था हमास ने इस हमले में उस सुरक्षा चक्र को भी भेद दिया है। फिर बहुत योजनापूर्वक उन्होंने इसे ऑपरेशन अल अक्सा फ्लड नाम दिया है। अपने हमले को अल अक्सा मस्जिद से जोड़कर उन्होंने पूरी दुनिया के मुसलमानों को भावनात्मक रूप से अपने साथ खड़ा करने का प्रयास किया है। मानों वह उस इजराइल को नेस्तनाबूत कर देना चाहते हैं जो अल अक्सा मस्जिद वाली जगह जेरुसलम पर काबिज है।
इजराइल के सुरक्षा विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि हमास की सफलता असल में इजराइल के सुरक्षा चक्र की असफलता है जिसमें खुफिया एजेंसी और प्रतिरक्षा प्रणाली दोनों शामिल हैं। बहुत योजनाबद्ध ढंग से हमास ने न केवल इजराइल पर हमला करके उसे लहुलुहान भी कर दिया बल्कि इजराइली नागरिकों को बंधक भी बना लिया है ताकि इजराइल से बातचीत की टेबल पर अपनी शर्तों के साथ बात की जा सके।
इजराइल को यहूदी विहीन करने का इस्लामिक प्लान तो पता नहीं कितना सफल होगा लेकिन फिलहाल हमास चाहता है कि इजराइल की जेलों में बंद फिलिस्तीनी उपद्रवी छोड़े जाएं। इजराइली नागरिकों के बंदी बनाये जाने से आक्रामक रूप से जवाब देने में भी इजराइल हिचकेगा। इसीलिए शनिवार देर रात तक इजराइल में सिर्फ बैठकें और तैयारियां ही चलती रहीं कि हमास के ताजा हमले का कैसे जवाब दिया जाए।
यहां हमास की सफलता का एक कारण और है। वह है इजराइल की राजनीतिक अस्थिरता। अप्रैल 2019 से नवंबर 2022 के बीच इजराइल में पांच चुनाव हो चुके हैं। इजराइल के ये सभी चुनाव 'बीबी ऑर नो बीबी' के मुद्दे के बीच हुए। स्वाभाविक है इजराइल में बीबी यानी बेंजामिन नेतन्याहू का विरोध भी जबर्दस्त है लेकिन मुश्किल यह है कि बेंजामिन के अलावा कोई दूसरा नेता स्थिर सरकार देने के लिए सक्षम भी नहीं है। इसीलिए हमास हमलों के बीच नेतन्याहू ने देश में राजनीतिक दलों के बीच एकता के लिए संयुक्त सरकार बनाने का प्रस्ताव भी दे दिया है ताकि देश के भीतर राजनीतिक एकजुटता बन सके।
स्वाभाविक है इजराइल की इन भीतरी राजनीतिक कमजोरियों पर हमास की नजर थी और मौका मिलते ही बहुत योजनापूर्वक ढंग से उसने इजराइल पर हमला कर दिया। अब देखना यह होगा कि बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा घोषित इस युद्ध में इजराइल विजय कैसे हासिल करता है। उसके लिए गाजा पट्टी पर कब्जे का रास्ता चुनता है या फिर टेबल पर बैठकर बातचीत का।












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