INDI Alliance: इंडी एलायंस के भीतर पनप रहा प्रेशर ग्रुप
INDI Alliance: इंडी एलायंस के सभी घटक दलों में सीट शेयरिंग के फार्मूले को लेकर भारी मतभेद हैं| फारूक अब्दुल्ला ने सुझाव दिया था कि जो दल 2019 में किसी सीट पर जीता था, उन सीटों पर वही दल लड़े|

इस फार्मूले को नामंजूर कर दिया गया था| उनके इस फार्मूले के आधार पर महबूबा मुफ्ती के हिस्से जम्मू क्षेत्र की एक सीट आ सकती थी, और कांग्रेस को भी सिर्फ जम्मू क्षेत्र की ही दूसरी सीट मिलती, क्योंकि कश्मीर घाटी की तीनों सीटें पिछली बार नेशनल कांफ्रेंस जीती थी और जम्मू की दोनों सीटें भाजपा जीती थी|
फारूक अब्दुल्ला की तरह जो कोई भी फार्मूला सुझा रहा है, वह अपने फायदे को सामने रख कर ही फार्मूला सुझा रहा है| दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस लोकसभा की पिछली परफोर्मेंस के आधार पर सीटों का बंटवारा चाहती है| कांग्रेस ने कहा है कि पंजाब में उसने 8 सीटें जीती थीं, और दिल्ली में 6 सीटों पर वह दूसरे नंबर पर रही थी|

पंजाब में जालन्धर का उपचुनाव कांग्रेस आम आदमी पार्टी से हार गई थी, इसलिए वह सात सीटों के अलावा भाजपा की जीती हुई दो सीटों पर भी दावा ठोक रही है| कांग्रेस पंजाब में आम आदमी पार्टी का तीन सीटों और दिल्ली में एक सीट पर दावा मानती है| जबकि अरविन्द केजरीवाल दोनों ही राज्यों में पिछले विधानसभा चुनावों की दोनों पार्टियों की परफोर्मेंस के आधार पर टिकटों का बंटवारा चाहते हैं| दिल्ली में तीन-चार के फार्मूले पर और पंजाब में 6-7 के फार्मूले पर फैसला हो भी सकता है, लेकिन पंजाब प्रदेश कांग्रेस के नेता इसके लिए तैयार नही|
केजरीवाल इन दोनों राज्यों के अलावा गुजरात, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान और गोवा में भी सीटें मांग रहे हैं| केजरीवाल की कांग्रेस से बात बिगड़ती दिख रही है, इसका सबूत यह है कि पहली जनवरी को पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने शराब घोटाले पर केजरीवाल पर सवाल किए, तो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कह दिया है कि पंजाब और दिल्ली में कोई भी मां अपने बच्चों को सबसे छोटी कहानी सुना सकती है कि "एक थी कांग्रेस"|
पंजाब और दिल्ली जैसा ही पेच महाराष्ट्र में फंसा है| महाराष्ट्र में भी कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना में सीट बंटवारे को लेकर एक दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी शुरू हो गई है| इसकी शुरुआत उद्धव ठाकरे की शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने की, जब उन्होंने लोकसभा की 48 सीटों में से 23 सीटों की मांग की| पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन में शिवसेना 23 सीटें लड़कर 18 सीटें जीती थी|
इसके जवाब में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि महाराष्ट्र में उद्धव बालासाहेब शिवसेना का कोई आधार नहीं है, उसे जीरो से शुरू करना है| इसके जवाब में संजय राउत ने कहा कि शिवसेना पिछली बार महाराष्ट्र में 18 लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीती थी, शिवसेना के मुकाबले कांग्रेस कहीं नहीं ठहरती| कांग्रेस महाराष्ट्र में जीरो है, और उसे जीरो से शुरुआत करनी है|
इसके जवाब में सामना हिन्दी अखबार के संस्थापक संपादक और कांग्रेस- शिवसेना के पूर्व सांसद संजय निरुपम उतरे, जिन्होंने कहा कि शिवसेना पिछली बार मोदी के चेहरे पर 18 सीटें जीती थीं, और वे 18 के 18 सांसद अब एकनाथ शिंदे के माध्यम से मोदी के साथ ही हैं, उद्धव ठाकरे को शून्य से ही शुरुआत करनी है, इसलिए उनका 23 सीटों पर कोई दावा नहीं बनता|
संजय राउत और संजय निरुपम दोनों ही शिवसेना के अखबार सामना के संपादक थे| जब बाला साहेब ठाकरे ने हिन्दी सामना के संपादक संजय निरुपम को राज्यसभा में भेज दिया था तो उनके खिलाफ साजिश रचकर संजय राउत ने उन्हें पार्टी से निकलवाया था, और बाद में खुद राज्यसभा पहुंच गए थे| जबकि संजय निरुपम कांग्रेस में शामिल होकर एक बार लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं|
उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने कह दिया है कि पहले यह तय हुआ था कि जिस प्रदेश में जो पार्टी हावी है, वही सीटों के बंटवारे को लीड करेगी| इसलिए उत्तर प्रदेश की सीटों का बंटवारा समाजवादी पार्टी तय करेगी| कांग्रेस 2009 के चुनाव नतीजों के आधार पर 21 सीटों पर दावा थोक रही है, लेकिन अखिलेश यादव 10-12 सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं|
असल में अखिलेश यादव मध्यप्रदेश में दूध के जले हैं, इसलिए छाछ को फूंक फूंक कर पीना चाहते हैं| वह खुद अपने मुहं से कांग्रेस को चालू, धोखेबाज और मक्कार पार्टी कह चुके हैं| उन्हें लगता है कि कहीं ऐसा न हो कि मध्यप्रदेश की तरह आखिर में आकर बात बिगड़ जाए, अगर ऐसा हुआ तो उन्हें खुद को नुकसान उठाना पड़ेगा| उन्हें यह भी आशंका है कि कांग्रेस अंदरखाते बहुजन समाज पार्टी से भी कुछ सीटों पर अंडरस्टेंडिंग कर रही है, जो उनके साथ विश्वासघात है, इसलिए 19 दिसंबर की बैठक में उन्होंने सवाल उठा दिया था कि कांग्रेस का कोई नेता बसपा से बात कर रहा है| इस बीच आश्चर्यपूर्ण ढंग से ममता बनर्जी की अखिलेश यादव से बातचीत हुई है|
ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश की चंदौली सीट माँगी है, जिसके लिए अखिलेश यादव ने हामी भर दी है| चंदौली सीट वाराणसी के बगल की सीट है, जो कांग्रेस के दिग्गज नेता और उतर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी की कर्मभूमि रही है| कमलापति त्रिपाठी का पोता राजेशपति त्रिपाठी कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। ममता बनर्जी ने उन्हीं के लिए चंदौली की लोकसभा सीट माँगी है, जिसे देने के लिए अखिलेश यादव ने हामी भर दी है| कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी सहयोगी दलों की सीटों की शिनाख्त हो चुकी है, लेकिन बात कांग्रेस से ही अटकी हुई है|
ममता बनर्जी ने सीट शेयरिंग के लिए 31 दिसंबर की समय सीमा तय की थी, 31 दिसंबर तक सीट शेयरिंग नहीं हुई तो ममता बनर्जी ने कह दिया है कि सारे देश में वह इंडी एलायंस का हिस्सा हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का भाजपा के साथ सीधा मुकाबला है, इसलिए बंगाल में तृणमूल कांग्रेस अकेले लड़ेगी| उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने भी उनके खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है|
असल में ममता बनर्जी और अखिलेश यादव में नई खिचड़ी पक रही है| ममता बनर्जी ने उसी भाषा का इस्तेमाल किया है, जिस भाषा का इस्तेमाल अखिलेश यादव को मध्यप्रदेश में सीट न देते हुए कांग्रेस ने किया था| कांग्रेस ने यह कहते हुए समाजवादी पार्टी को मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में एक भी सीट देने से इनकार कर दिया था कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस का भाजपा से सीधा मुकाबला है|
अब ममता बनर्जी ने कहा है कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का भाजपा से सीधा मुकाबला है| इंडी एलायंस बनने से पहले मार्च 2022 में ही ममता बनर्जी, अरविन्द केजरीवाल, अखिलेश यादव और चन्द्रशेखर राव में गैर भाजपा-गैर कांग्रेस मोर्चा बनाने की सहमति हो गई थी| चन्द्रशेखर राव को छोड़कर बाकी तीनों दल इस समय इंडी एलायंस का हिस्सा हैं| लेकिन कांग्रेस की क्षेत्रीय दलों के नेताओं को अहमियत न देने की शैली के खिलाफ ममता बनर्जी, केजरीवाल और अखिलेश यादव इंडी एलायंस के भीतर एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर उभर रहे हैं| इनके साथ उद्धव ठाकरे भी जुड़ गए हैं| इन सभी दलों की कांग्रेस के साथ इन दलों के मुताबिक़ सीट शेयरिंग नहीं हुई तो गठबंधन टूट भी सकता है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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