Foxconn: भारत का सेमीकंडक्टर मिशन और फॉक्सकॉन का झटका

वेंदाता के साथ सेमीकंडक्टर बनाने के संयुक्त उद्यम से ताइवान की बहुराष्ट्रीय कंपनी फॉक्सकॉन का अलग हो जाना कॉरपोरेट जगत की बड़ी खबर हो सकती है, लेकिन इससे भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को झटका लगेगा, इस दावे में कोई दम नहीं है। फॉक्सकॉन के बिजनेस और भारत के बाजार के बीच ऐसा समीकरण बन चुका है कि फॉक्सकॉन को झक मार कर आज नहीं तो कल भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण में आना ही पड़ेगा। कंप्यूटर, मोबाईल, इलेक्ट्रिक कार और हेल्थ इक्विपमेंट की असेम्बिलिंग और उत्पादन से जुड़ी फॉक्सकॉन भारत को नजरंदाज कर दे, यह किसी बिजनेस मांइड का काम हो ही नहीं सकता।

भले ही राजनीतिक और कूटनीतिक कारणों से दिल्ली से लेकर बीजिंग तक यह हौव्वा तैयार किया जा रहा है कि ताइवानी कंपनी के फैसले से मोदी सरकार को झटका लगा है, पर इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है। जिस समाचार एजेंसी रॉयटर ने फॉक्सकॉन और वेदांता के बीच 19.5 अरबर डॉलर के सेमीकंडक्टर उत्पादन के समझौते को टूट जाने की खबर 10 जुलाई को दी, उसी रॉयटर ने आठ घंटे बाद ही फॉक्सकॉन के हवाले से बताया कि कंपनी सेमीकंडक्टर पर सरकार द्वारा दी जाने वाली रियायतों का लाभ उठाने के लिए अलग आवेदन करेगी। यह खबर गलत नहीं हो सकती। आखिर क्यों 11 और 12 जुलाई को फॉक्सकॉन की ओर से बार बार यह कहा गया? कोई कह सकता है कि तत्काल विवाद को ठंडा करने के लिए फॉक्सकॉन ने यह बयान जारी कर दिया हो। पर जो इस कंपनी के कारोबार और काम करने के तरीके को जानते हैं उन्हें फॉक्सकॉन के बयान पर यकीन जरूर होगा।

Foxconn setback to Indias semiconductor mission

फॉक्सकॉन मूलतः ताइवान की कंपनी है। इसका असली नाम होन हाई प्रिसिजन इंडस्ट्री है। वैसे तो इसका कारोबार पूरी दुनिया में है, लेकिन चीन में इसकी व्यापक मौजूदगी है। बल्कि एक पूरा औद्योगिक शहर फॉक्सकॉन सिटी के नाम से जाना जाता है। 2022 में इसकी कुल आय 216 अरब डॉलर थी। फॅाक्सकॉन इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की टेक्नोलॉजी व एसेम्बली में दुनिया में नंबर एक कंपनी है। ब्लैकबेरी, आई पैड, आई फोन, आईपॉड, किंडल, गेमक्यूब, कंप्यूटर मदर बोर्ड, एक्स बॉक्स कंसोल जैसे तमाम उत्पादों और ब्रांडों का निर्माण यह कंपनी करती रही है। अब यह कंपनी नये जमाने के उद्योगों में भी पूरी तरह उतर चुकी है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स इंजीनियरिंग और सेमीकंडक्टर्स भी शामिल है।

जिस सेमीकंडक्टर्स को लेकर फॉक्सकॉन इतनी चर्चा में आया, वह उसका नया वेंचर है। इसकी शुरूआत दो साल पहले 2021 में हुई थी, तब उसने ताइवान के ही याजियो ग्रुप के साथ एक संयुक्त उद्यम पर हस्ताक्षर किया था। वस्तुतः याजियो समूह ही मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर उत्पादन में फॉक्सकॉन को मजबूती दे रहा है। याजियो इस समय चिप रजिस्टर्स में दुनिया में पहले नंबर का कंपनी समूह है। फॉक्सकॉन की सेमीकंडक्टर या अन्य इलेक्ट्रानिक किट मार्केट में आने की वजह खुद की जरूरत है। कंप्यूटर से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों में उतर चुकी यह कंपनी सेमीकंडक्टर के मामले में आत्मनिर्भर होना चाहती है। इतने सारे इलेक्ट्रानिक और इलेक्ट्रिक धंधों में उतर चुकी फॉक्सकॉन का भारत को नजरंदाज करना मुश्किल है।

अब वेदांता समूह के साथ इसका करार खत्म होने के लिए खुशी मना रहे हर पक्ष के अपने अपने कारण है। भारत में कांग्रेस को इस बात के लिए खुशी है कि इस बहाने नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा कर सकते हैं। शिव सेना (उद्धव) इसलिए खुश है कि फॉक्सकॉन महाराष्ट्र में नहीं आई तो गुजरात में भी नहीं जाएगी। पहले फॉक्सकॉन और वेदांता की परियोजना महाराष्ट्र में लगाने की घोषणा की गई थी, बाद में इसे गुजरात शिफ्ट कर दिया गया था। चीन इसलिए खुश है कि भारत की क्षमता पर सवाल खड़ा होने से दुनिया के अन्य बड़े कॉर्पोरेशन के मन में दुविधा पैदा कर सकता है। चीन खुद ही सेमीकंडक्टर चिप को लेकर बड़े और प्रमुख देशों का बॉयकाट झेल रहा है। अमेरिका, जापान और नीदरलैंड ने सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग से जुड़े इक्विपमेंट चीन को बेचने पर पाबंदी लगा दी है।

जहां तक फॉक्सकॉन की बात है तो उनके लिए भारत नया नहीं है। 2015 में कंपनी ने भारत में 12 कारखाने लगाने की घोषणा की थी। अडानी समूह के साथ संयुक्त उद्यम लगाने का भी करार हुआ। फॉक्सकॉन ने स्नैपडील में निवेश किया। भारत के लिए शॉओमी फोन का उत्पादन भी किया। चेन्नई में वह एप्पल के साथ आई फोन का उत्पादन कर रही है।

अब फॅाक्सकॉन का अभियान पूरी दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहन के उत्पान में हाथ आजमाना है। इसके लिए कंपनी आक्रामक रणनीति बना रही है। सबसे पहले वह बैट्री और इलेक्ट्रॉनिक चिप की सप्लाई लाइन पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए काम कर रही है। उसने हाल ही में जापान के ओहियो स्थित जनरल मोटर्स के एक पूरे संयत्र का अधिग्रहण किया है। अब उसे किसी बड़े इलेक्ट्रिक कंपनी के साथ उत्पादन समझौते का इंतजार है। फॉक्सकॉन की नजर टेस्ला पर है। वह भविष्य में उसकी कार का उत्पादन करने का अवसर देख रही है।

इसलिए भारत के लिए फॉक्सकॉन मजबूरी नहीं है, बल्कि फॉक्सकॉन के लिए भारत जरूरी है। एप्पल भारत में बड़े पैमाने पर आई फोन का उत्पादन करने जा रही है और फॉक्सकॉन एप्पल का साझीदार है। उसका भारत में आना स्वाभाविक होगा। 2030 तक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का कारोबार 150 अरब डॉलर पहुंचने वाला है, एक प्रमुख प्लेयर फॉक्सकॉन के लिए यह आकड़ा बेहद ललचाने वाला होगा।

ग्लोबल आईटी कंपनी एक्सेंचर की रिपोर्ट है कि 2035 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी का मार्केट साइज कुल जीडीपी का 15 प्रतिशत या 957 अरब डॉलर का होगा। इसलिए यह कहना कि भारत की राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी नीतियों के कारण फॉक्सकॉन ने वेदांता के साथ सेमीकंडक्टर बिजनेस से हाथ खींच लिया, सही नहीं है।

यह तो चीन का ग्लोबल टाइम्स भी लिख रहा है कि 2020 में भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 15 अरब डॉलर का था और भारत की मोदी सरकार ने इसे 2026 तक 63 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। जाहिर है इतना बड़ा लक्ष्य किसी एक कंपनी के जरिए तो पूरा नहीं किया जा सकता, चाहे वह फॉक्सकॉन ही क्यों ना हो।

भारत ने सेमीकंडक्टर उद्योग में निजी क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए 76 हजार करोड़ के फंड से सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। डिजाइन से लेकर उत्पादन तक में सरकार आर्थिक प्रोत्साहन दे रही है। एक दर्जन से ज्यादा कंपनियां सेमीकंडक्टर बिजनेस में इस समय काम कर रही हैं, जिनमें एचसीएल, वेदांता, टाटा एलक्सी, डिक्शन, मॉशचिप, एएसएम, स्पेल और एमआईसी प्रमुख हैं।

चीन से निकलकर भारत की ओर रूख करने वाली कंपनियों में सेमीकंडक्टर उद्योग की भी कंपनियां है। माइक्रॉन ने तो गुजरात सरकार के साथ करार भी कर लिया है और गुजरात सरकार ने 22,500 करोड़ के निवेश से सानंद में लगनेवाले सेमीकंडक्टर प्लांट के लिए जमीन का आवंटन भी कर दिया है। इसके साथ ही फ्लैट टीवी, मॉनीटर आदि के लिए मदरबोर्ड बनानेवाली अमेरिका की अप्लाइड मैटेरियल ने 400 मिलियन डॉलर के निवेश से भारत में इंजीनयरिंग सेन्टर बनाने का ऐलान किया है। यह ऐलान भी हाल में ही मोदी के अमेरिका दौरे के समय किया गया था।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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