Film Controversies: हिन्दी फिल्मों पर धार्मिक विवादों की प्रेत छाया
Film Controversies: इस साल के 8 महीनों में आई आदिपुरुष, पठान, दी केरला स्टोरी, 72 हूरें, गांधी गोडसे एक युद्ध, फराज, अफवाह, सिर्फ एक बंदा काफी है, अजमेर 92 और ओ माई गॉड 2 आदि फिल्में विवादों में घिरी रहीं। कई फिल्में सिनेमाघरों में दर्शक ही नहीं खींच पाईं, कई पर बड़ा बवाल हुआ, कई में निर्देशक ने ही सावधानी बरती तो कई को जनता ने सबक भी सिखा दिया। ऐसे में लगा था कि इसके बाद फिल्मी लोग धार्मिक भावना भड़कानेवाली फिल्में बनाना बंद करेंगे, लेकिन जो हो रहा है, उससे ऐसा कतई नहीं लगता।
तमाम विवादों के बावजूद फिल्मी दुनिया के दिग्गज धार्मिक विवाद पैदा करके फायदा उठाना चाहते हैं, पैसे कमाना चाहते हैं। पिछले साल की फिल्में ही देख लीजिए, ब्रह्मास्त्र, कश्मीर फाइल्स, भूलभुलैया2, रामसेतु, लालसिंह चड्ढा, थैंक गॉड, होली काउ जैसी कई फिल्में थीं, जो जाने अनजाने धार्मिक विषयों से जुड़ी रहीं। इनमें से किसी फिल्म पर बड़ा विवाद तो नहीं हुआ लेकिन अलग-अलग समुदायों ने इनको सतर्कता से देखा। इनमें 'विक्रम वेधा' जैसी फिल्मे भी थीं, जिसमें हृतिक रोशन खुद शिव के गले में रहने वाले नागराज वासुकि को लेकर काफी आपत्तिजनक डायलॉग बोलते हैं। हालांकि आम जनता को जानकारी कम होने के चलते किसी ने इस पर विवाद नहीं किया।

ऐसे में सवाल भी उठते हैं कि ऐसे विवादास्पद फिल्मी डायलॉग लिखने वाले लेखकों या निर्देशकों को मजा क्या आता है? क्या वाकई किसी एजेंडे पर काम करते हैं? अगर हां तो 'कश्मीर फाइल्स' की तरह इसे खुलकर क्यों नहीं सबके सामने रखते? या फिर 'पठान' की तरह भगवा बिकिनी पहनाकर, 'ओह माई गॉड2' की तरह शिव को रेलवे प्लेटफॉर्म के पानी से नहाते दिखा केवल विवादों में लाना चाहते हैं, ताकि ज्यादा दर्शक उसे देखने आएं?
यह सच है कि इन दोनों ही फिल्मों को इन विवादों का बेहद फायदा मिला है। हालांकि 'अजमेर92' में निर्देशक इतनी हिम्मत भी नहीं जुटा पाया कि गलती से भी किसी सीन में अजमेर दरगाह या कांग्रेस का नाम बोल पाता, तो विवादित संत आसाराम की पृष्ठभूमि पर बनी 'सिर्फ एक ही बंदा काफी है' को सिनेमाघरों में ना उतारने की रणनीति काम कर गई।
'आदिपुरुष' और खासतौर पर 'ओह माई गॉड2' को लेकर जो विवाद हुआ तो ऐसा मान लिया गया था कि अब मुंबई फिल्म इंडस्ट्री वाले थोड़ा सावधान रहेंगे। चूंकि भगवा ब्रिगेड के विरोध के चलते 'आदिपुरुष' तो ढेर हो ही गई, 'ओह माई गॉड2' को भी 'ए' सर्टिफिकेट मिलने से उसका काफी नुकसान हुआ और वह अब टीवी पर भी नहीं दिखाई जा सकती। इसलिए लग रहा था कि भगवा ब्रिगेड के तेवर देखकर थोड़ा सा सबक इन फिल्मी लोगों ने लिया होगा। लेकिन ऐसा लगता तो नहीं है।
हाल में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं जो बताते हैं कि हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाएं भड़काने में ही मजा आता है। शाहरुख खान कोई पहली बार तो वैष्णो देवी नहीं गए हैं। लेकिन इस बार उनका जाना लोगों को चौंका गया है। उनकी मूवी 'जवान' 8 सितम्बर को रिलीज हो रही है, ट्रेलर से भी अनुमान लग रहा है कि महिलाओं की खास भूमिका होने वाली है। माना जा रहा है कि एक पुराना फौजी देश के दुश्मनों से लड़ने के लिए आम महिलाओं का सहारा लेता है। ऐसे में महिला शक्ति की प्रतीक वैष्णो देवी के दर्शन करने जाना, एक तरह से प्रतीकात्मक पब्लिसिटी लेने की कोशिश भी है।
माना जा रहा है कि शाहरुख ने इसलिए भी अपनी इस यात्रा को गुपचुप रखा क्योंकि भगवा बिकिनी से नाराज भगवा ब्रिगेड शाहरुख का वहां विरोध कर सकता था। दूसरा मामला विकी कौशल से जुड़ा है। विकी कौशल की मूवी 'द ग्रेट इंडियन फैमिली' 22 सितम्बर से रिलीज होने वाली है। फिल्म का एक गाना रिलीज हुआ है जो बताता है कि यशराज फिल्म के बैनर तले बनी ये मूवी भी धार्मिक मामलों से जुड़ी हुई है। हीरो विकी कौशल के किरदार का नाम ही 'भजन कुमार' है, जो भजन मंडलियों में चलताऊ किस्म के मॉर्डन भजन गाता है। ऐसे मॉर्डन भजन गांव देहात की मंडलियों के लोग फिल्मी धुनों पर बना लेते हैं।
जो गाना रिलीज हुआ है, उसके बोल हैं, 'कन्हैया ट्विटर पर आजा, भगत की बिगड़ी बना जा'। यूं गाना रिलीज हुए 2 दिन हो गए हैं, गाने के बोल को लेकर अभी किसी ने आपत्ति नहीं की है. क्योंकि कान्हा के भक्त थोड़ा उदार हैं, जो सलमान खान की "वो करें तो रासलीला..." भी बर्दाश्त कर लेते हैं और आलिया भट्ट का सैक्सी राधा पार्टी गाना सुनकर भी गुस्सा नहीं करते। यहां तक तो भी ठीक है, लेकिन फिल्म में आगे और क्या क्या होगा, उसके बारे में तो 22 सितंबर को ही पता लगेगा। इस फिल्म को विजय कृष्ण आचार्य ने निर्देशित किया है। विकी कौशल के साथ हैं मानुषी छिल्लर।
तीसरा मामला टी-सीरीज की मूवी 'यारियां' के सीक्वल 'यारियां2' के साथ हुआ है। दिव्या खोसला कुमार, यश दासगुप्ता, मीजान जाफरी और वारिना हुसैन की इस फिल्म के खिलाफ सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी एसजीपीसी ने नाराजगी दिखाते हुए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। एसजीपीसी का आरोप है कि मूवी के गाने 'सौरे घर' में एक क्लीन शेव अभिनेता को सिखों के प्रतीक कृपाण को धारण करते हुए दिखाना सिख भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना है। हालांकि फिल्म निर्देशकों की तरफ से सफाई में कहा गया है कि ये खुकरी है, कृपाण नहीं।
लेकिन एसजीपीसी ने इस गाने को यूट्यूब प्लेटफॉर्म से फौरन हटाने और फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। एसजीपीसी ने ये मामला सेंसर बोर्ड और सूचना प्रसारण मंत्रालय के संज्ञान में भी डाला है। इसके अलावा एसजीपीसी ने अमृतसर पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में भी इस मूवी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। इसके बाद सुखबीर सिंह बादल ने भी एसजीपीसी की इस मांग के समर्थन में बयान जारी करके मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। इस फिल्म को राधिका राव और विनय सप्रू की जोड़ी ने निर्देशित किया है। जिस अभिनेता के सीन पर विवाद हुआ है, वह अभिनेता मीरान जाफरी हैं। 'यारियां2' 20 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है।
इतने विवादों के बावजूद फिर नए धार्मिक विवादों में फिल्मों का आना चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन ये बॉलीवुड है। यहां फिल्म का निर्माता कम से कम पैसों में अपनी फिल्म को विवादों में लाने का रास्ता खोजता रहता है और ये भी नहीं चाहता कि इतना विवाद हो जाए कि फिल्म की रिलीज ही संकट में पड़ जाए। लेकिन 'यारियां2' के लिए तो दिक्कत वाकई में हो गई लगती है। उनकी सफाई के बावजूद एसजीपीसी ने अभी तक रुख में नरमी नहीं बरती है। वहीं भगवा ब्रिगेड 'जवान' और 'द ग्रेट इंडियन फैमिली' जैसी फिल्मों पर भी नजरें जमाए हुए हैं कि कहीं इतनी चेतावनी के बावजूद फिर से किसी डायलॉग या सीन के जरिए धार्मिक प्रतीकों का मजाक तो नहीं उड़ाया गया है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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