Congress Party: जनता के मन की बात कांग्रेस नहीं समझ रही
Congress Party: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के 30 घंटे बाद 4 दिसंबर को शाम साढ़े पांच बजे कांग्रेस ने सवा मिनट का एक वीडियो जारी किया| इस वीडियो का शीर्षक है- देश में कांग्रेस की लहर" आगे लिखा है कि कांग्रेस आज भी देश में नंबर वन है, उसे 4 राज्यों में भाजपा से ज्यादा वोट मिले हैं| वीडियो पर मल्लिकार्जुन खड़गे का कोई फोटो नहीं है, लेकिन राहुल गांधी के दो फोटो हैं|
वीडियो में कांग्रेस की एंकर ने बताया कि इन चुनावों में कांग्रेस को 4 करोड़ 90 लाख वोट मिले, जबकि भाजपा को 4 करोड़ 81 लाख वोट मिले| अगर कांग्रेस इन चुनाव नतीजों को देश में कांग्रेस की लहर मानती है तो कांग्रेस को जरुर इस पर जश्न मनाना चाहिए था, लेकिन नतीजों के बाद कांग्रेस के दफ्तर में सन्नाटा था| जश्न भाजपा के दफ्तर में मनाया जा रहा था|

नतीजे देश के सामने हैं। भाजपा ने कांग्रेस से दो राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ छीन लिए, वहीं कांग्रेस भाजपा शासित मध्यप्रदेश उससे नहीं छीन पाई| कांग्रेस की थोड़ी बहुत इज्जत तेलंगाना से बची है, जहां उसने भारत राष्ट्र समिति से सत्ता छीन ली| तेलंगाना में भाजपा की सीटें भी एक से बढ़ कर आठ हो गईं| तेलंगाना में कांग्रेस की जीत का महत्व है, क्योंकि वहां लोकसभा की 17 सीटें हैं, कांग्रेस वहां पिछली बार सिर्फ 3 सीटें जीत पाई थी, जबकि भाजपा 4 जीत गई थी| लेकिन कांग्रेस 65 लोकसभा सीटों वाले तीन प्रदेश मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ हारी है|
तीनों राज्यों में करारी हार के बाद तेलंगाना में कांग्रेस को मिले वोटों को जोड़कर कांग्रेस देश में अपनी लहर बता रही है और भाजपा पर हावी होने का दावा कर रही है| भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में न तो वोटों का महत्व होता है, न वोट प्रतिशत का, लोकतंत्र में सीटों का महत्व होता है| तीन राज्यों में कांग्रेस को 170 सीटें मिली हैं, और भाजपा को 332 सीटें|

नतीजों के एक दिन बाद संसद के शीतकालीन सत्र का पहला दिन था, सोनिया गांधी से एक पत्रकार ने पूछा कि क्या वह चुनाव नतीजों पर कोई टिप्पणी करना चाहेंगी| सोनिया गांधी मुहं फेर कर कार में बैठकर चली गईं| यह फर्क है सोनिया गांधी की परिपक्वता में और राहुल गांधी और उनकी टीम के सदस्यों की अपरिपक्वता में| सोनिया गांधी अगर राहुल की टीम की ओर से निकाले गए देश में कांग्रेस की लहर के नतीजे से सहमत होती, तो वह जरुर पत्रकार के सामने वही तर्क रखती, जो कांग्रेस के आधिकारिक यूट्यूब चेनल पर राहुल गांधी की तस्वीर के साथ परोसा गया है|
मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष जरुर बन गए हैं, लेकिन कांग्रेस दफ्तर, कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट, कांग्रेस के एक्स अकाउंट, फेसबुक अकाउंट और कांग्रेस के यूट्यूब चैनल पर राहुल गांधी की टीम का कब्जा बना हुआ है, जो इसी तरह के हास्यास्पद तर्क देकर कांग्रेस की छवि को और खराब कर रहे हैं| कांग्रेस के यूट्यूब चैनल पर हर दसवां वीडियो मल्लिकार्जुन खड़गे का होता है, बाकी नौ वीडियो राहुल गांधी के होते हैं| राहुल गांधी की टीम के सबसे बड़े बुद्धिजीवी जयराम रमेश हैं| उन्होंने कहा है कि 2003 में भी भारतीय जनता पार्टी इन तीनों राज्यों में जीत गई थी, लेकिन 2004 में लोकसभा चुनाव हार गई| कांग्रेस इस खाम ख्याली में है कि देश की जनता 2024 में भाजपा को 2004 जैसा झटका देगी|
राहुल गांधी और राहुल गांधी की अपरिपक्व टीम जनता के मन की बात पढ़ना ही नहीं चाहती| मोदी ने एक विश्वसनीय राष्ट्रीय नेता की छवि बनाई है, जो देश की सांस्कृतिक विरासत को बढावा देने के साथ, जाति-धर्म से ऊपर उठकर गरीबों के उत्थान की योजनाएं बनाने, उन्हें जमीन पर लागू करने और देश को विकास की उंचाईयों पर ले जाने की कोशिश में जुटा है| भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम को विपक्षी दल जितना बदले की राजनीति बताते हैं, उतने ही वे जनता के दिलो दिमाग से उतर रहे हैं, क्योंकि ईडी सीबीआई के छापों में धन के अंबार दिख रहे हैं| वह धन कहां से आया? यह सब मोदी तो उनके घरों में नहीं रखवा रहे| मोदी युग में सफाई अभियान की नए तरह की राजनीति हो रही है, इससे पहले भ्रष्टाचारी राजनीतिज्ञों के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर कभी अभियान नहीं चला| जिसे देश की जनता पसंद कर रही है| विपक्ष के नेता उसे समझ ही नहीं रहे, वे ईडी सीबीआई पर हमले करके अपनी ही छवि खराब कर रहे हैं|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार दिसंबर को संसद सत्र शुरू होने से पहले संसद की दहलीज पर पत्रकारों के सामने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को भी अपनी छवि सुधारने का मन्त्र भी दिया| उन्होंने कहा कि देश की जनता उनकी नकारात्मक राजनीति को पसंद नहीं करती| विपक्ष को सबक लेकर अपनी स्थिति में सुधार करना चाहिए| कोई भी राजनीतिज्ञ अपनी विरोधी पार्टी या विरोधी नेता को उसकी कमियाँ नहीं बताता, बल्कि उनकी कमियों का फायदा ही उठाता है|
मोदी भी राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति का फायदा ही उठा रहे है, लेकिन फिर भी उन्होंने सीख दी है| लेकिन राहुल गांधी और उनकी टीम न तो मोदी युग को समझ रहे हैं, न अपनी गलतियों से कुछ सीख रही हैं| मोदी-शाह की जोड़ी की सोच और काम करने की शैली वाजपेयी-आडवानी से बिलकुल भिन्न है| तब भाजपा ऊंची जातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी समझी जाती थी| भाजपा कभी अपने बूते पर लोकसभा में बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी|
हिंदी बेल्ट के तीन राज्यों में प्रभाव के बावजूद भाजपा का अन्य हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और हरियाणा में प्रभाव इतना नहीं था, जितना अब है| उतरप्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा और दिल्ली की 151 सीटों में से भाजपा सिर्फ 18 सीटें जीती थीं| गुजरात और महाराष्ट्र में भी भाजपा उतनी मजबूत नहीं थी, जितनी अब है| गुजरात में भाजपा उस समय 26 में से सिर्फ 14 सीटें जीती थीं| महाराष्ट्र की 48 सीटों में से में 11 खुद और 11 उसकी सहयोगी शिवसेना जीती थी|
मोदी युग की भाजपा ऊंची जातियों की नहीं, ओबीसी, दलितों और आदिवासियों की नुमाइंदगी करती है| मोदी खुद ओबीसी हैं, और उनकी सरकार में 27 ओबीसी, 12 दलित और 8 आदिवासी मंत्री हैं| 2019 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का चुनावी गठबंधन हुआ था| समाजवादी पार्टी यादवों (ओबीसी) का और बसपा दलितों का प्रतिनिधित्व करती है| दोनों मुस्लिम समुदाय का भी प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन यादव, दलित, मुस्लिम मिल कर भी 15 सीटें ही जीत पाए।
ऐसा इसलिए हुआ कि गैर यादव ओबीसी तो पूरा ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़ चुका है, यादव भी भारी मात्रा में जुड़े हैं| इसी तरह गैर जाटव दलित भी भाजपा से जुड़ चुका है| भाजपा ने इन सभी वर्गों को सत्ता में भागीदारी देने का काम भी किया है| इसलिए राहुल गांधी का जातीय जनगणना का कार्ड मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में नहीं चला| इसलिए आज की तुलना 2004 से करना राजनीतिक अपरिपक्वता और खुद की आखों में धूल झोंकना है|
आज केंद्र सरकार के अलावा देश के 58 फीसदी भूभाग पर भाजपा की राज्य सरकारें है, जिनमें देश की 57 प्रतिशत आबादी रहती है| मोदी जब प्रधानमंत्री बने थे, तो भाजपा की सिर्फ पांच राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और गोवा में सरकार थी, इस समय इन सब के साथ हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, असम, त्रिपुरा और महाराष्ट्र समेत 12 राज्यों में अपनी सरकारें हैं| कांग्रेस की अपनी सिर्फ तीन राज्यों में सरकारें बची है, जिन में से दो दक्षिण भारत की कर्नाटक और तेलंगाना सरकारें है| बाकी सारे भारत में उसकी सिर्फ हिमाचल प्रदेश में सरकार है, जहां लोकसभा की सिर्फ 4 सीटें हैं| इन तीनों राज्यों में लोकसभा की सिर्फ 49 लोकसभा सीटें है|
इसमें कोई शक नहीं कि दक्षिण भारत में कांग्रेस का प्रभाव बढ़ रहा है, लेकिन उसमें गांधी परिवार या राहुल गांधी से ज्यादा मल्लिकार्जुन खड़गे की भूमिका है| लोकसभा चुनाव में कर्नाटक और तेलंगाना का असर आंध्र प्रदेश में भी दिखाई दे सकता है। अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस आंध्र प्रदेश और केरल भी जीत सकती है, लेकिन इनमें से कोई भी भाजपा की सहयोगी पार्टी की सरकार नहीं है| इसलिए भाजपा को 2004 की तरह हराने की कल्पना करना कांग्रेस की खामख्याली ही कहा जायेगा|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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