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Newsclick Case: चीन से चंदा और भारत विरोधी धंधा

Newsclick Case: एक समय था, जब अलग अलग लॉबी से जुड़े एजेन्ट अपना सवाल संसद की चर्चा में शामिल कराने के लिए सांसदों को पैसे देते थे। वर्ष 2005 में संसद में धन लेकर सवाल पूछने के आरोप में 10 लोक सभा सांसद और एक राज्यसभा सांसद को दोनों सदनों ने बर्ख़ास्त कर दिया था। समय बदला और समाज-सरकार को प्रभावित करने का ढंग भी।

अब सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। किसी समाचार पत्र अथवा इलेक्ट्रानिक मीडिया को नियंत्रित करने के मुकाबले किसी यूट्यूबर अथवा वेबसाइट के माध्यम से अपना एजेन्डा प्रचारित प्रसारित करना कम खर्चीला और सुरक्षित निवेश बन गया है लेकिन यह सुरक्षित निवेश जब देश की संप्रभुता के लिए ही खतरा बन जाए फिर चिंता की बात है।

ed raid on newsclick connection with china business in india

न्यूजक्लिक नामक न्यूज पोर्टल का विदेशी फंडिंग से जुड़ा मामला कुछ ऐसा ही है, जहां चीन के प्रोपगेंडा को भारत में चलाने के लिए 38 करोड़ रुपए लिए गए। अभी इस पूरे मामले की जांच चल रही है। दिल्ली पुलिस ने न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया है। सात दिनों के लिए उन्हें पुलिस रिमांड में भेजा गया है। उनके ऊपर आरोप गंभीर हैं।

न्यूजक्लिक पर आरोप है कि चीन समर्थित अमेरिकी बिजनेसमैन नेविल रॉय सिंघम और न्यूजक्लिक पोर्टल के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के बीच इस मुद्दे पर ईमेल चैट हुई थी कि कश्मीर और अरुणाचल भारत का हिस्सा नहीं हैं, इस एजेन्डा को सेट करना है। लेफ्ट इको सिस्टम के माध्यम से इसे मुद्दा बनाना है। मिल रही जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच ईमेल में इस बात को लेकर चर्चा हुई है कि भारत के नक्शे को किस तरह से बनाया जाये कि उसमें से कश्मीर और अरुणाचल को विवादित घोषित कराया जा सके।

सूत्रों के अनुसार दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने आतंकवाद रोधी कानून गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के अन्तर्गत न्यूजक्लिक का मामला दर्ज किया है। 03 अक्टूबर की सुबह न्यूजक्लिक और उससे जुड़े पत्रकारों के घर पर छापेमारी शुरू हुई। शाम होते-होते दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के अधिकारियों ने दिल्ली में न्यूज़क्लिक के कार्यालय को सील कर दिया। उधर मुंबई पुलिस के अधिकारी एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ के आवास पर पहुंचे थे। तीस्ता के पति जावेद का संबंध भी न्यूजक्लिक के साथ रहा है। नोएडा और गाजियाबाद में 30 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की गई।

न्यूजक्लिक से जुड़े 37 पुरुष संदिग्धों और 9 महिला संदिग्धों से उनके आवास पर पूछताछ की गई। जिन लोगों से पूछताछ की गई उनमें औनिंदो चक्रवर्ती, अभिसार शर्मा, सोहेल हाशमी, भाषा सिंह, उर्मिलेश यादव, परंजॉय गुहा ठाकुरता के नाम प्रमुख हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजक्लिक के माध्यम से अभिसार शर्मा को 45 लाख रुपए, परंजॉय गुहा को 40 लाख, उर्मिलेश यादव को 23 लाख, तीस्ता के पति जावेद आनंद को 13 लाख रुपए चीन से आए फंड में से मिले थे।

न्यूजक्लिक पर हुई कार्रवाई कोई आनन-फानन में हुई कार्रवाई नहीं है। वेबसाइट की फंडिंग से जुड़ी जांच लंबे समय से चल रही थी। 03 अक्टूबर की छापेमारी से पहले स्पेशल सेल की बैठक दो अक्टूबर को हुई थी। बैठक में स्पेशल सेल के अधिकारी थे। वहां पूछताछ की रूपरेखा तैयार हुई, जिनके यहां रेड डालनी थी, उनकी सूची तैयार की गई। सूची में शामिल लोगों को वरीयता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया। अगले दिन सुबह छह बजे रेड शुरू हुई। दिल्ली, मुम्बई, नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव में छापे पड़े। रेड में 500 पुलिस वाले शामिल हुए और एक साथ 35 जगहों पर छापेमारी की गई।

इनमें से कुछ लोगों से हिरासत में लेकर पूछताछ भी हुई। पूछताछ में 25 सवाल पूछे गए। जिसमें शाहीन बाग का प्रदर्शन, दिल्ली में किसान आंदोलन, पूर्वोत्तर भारत की खबरों को लेकर सवाल थे। पत्रकारों से विदेशी दौरे से जुड़े सवाल भी पूछे गए। शाम तक फिर उन्हें घर जाने दिया गया। इसके साथ डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों को जांच के लिए जब्त और एकत्रित किया गया है।

न्यूजक्लिक की स्थापना प्रबीर पुरकायस्थ ने 2009 में की थी। इसके एडिटर इन चीफ पुरकायस्थ ही हैं। लेफ्ट इकोसिस्टम के पत्रकार और कर्मचारी इस वेबसाइट की यूएसपी हैं। लेफ्ट दलों का चीन प्रेम कोई छुपी हुई बात नहीं है। वेबसाइट से कुछ पूर्व टीवी पत्रकार भी जुड़े हैं, जो इन दिनों मुख्यधारा की मीडिया से बाहर आकर यूट्यूब पर प्रधानमंत्री मोदी को भला बुरा कहने को पत्रकारिता कहते हैं।

गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले ही अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने एक खुलासे में दावा किया था कि न्यूजक्लिक उस वैश्विक नेटवर्क में शामिल है, जिसमें अमेरिका के अरबपति नेविल रॉय सिंघम से फंड मिलता है और नेविल रॉय सिंघम का संबंध चीनी कंपनियों से है। न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित खबर के बाद 17 अगस्त को न्यूजक्लिक के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने आतंकवाद निरोधक कानून के अंतर्गत मामला दर्ज किया। एनवाईटी की रिपोर्ट से यह बात सामने आई कि न्यूजक्लिक नाम की वेबसाइट को चीन के प्रोपगेंडा को चलाने के लिए पैसा मिल रहा है।

अभी कुछ दिनों पहले 28 सितम्बर को यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने ग्लोबल इंगेजमेंट सेंटर रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट का शीर्षक है, 'हाउ द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना सीक टु रिसेप द ग्लोगल इन्फोरमेशन एन्वायरमेंट।' रिपोर्ट को पढ़कर यह बात स्पष्ट होती है कि चीन सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में मीडिया को अपने पक्ष में प्रभावित करना चाहता है। इसके लिए उसने सोशल मीडिया को एक टूल की तरह इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। वह इस दिशा में निवेश भी कर रहा है। वह अपने यहां चाहे सूचनाओं को हर स्तर पर प्रतिबंधित कर रहा हो लेकिन उसे दुनिया भर की सूचनाएं अपने पक्ष में चाहिए।

इसके लिए चीन की मीडिया और उसके सीक्रेट एजेन्ट दुनिया भर में ऐसे मीडिया समूहों अथवा पत्रकारों की पहचान करते हैं जो पैसा लेकर नैरेटिव से लेकर महत्वपूर्ण सूचनाओं को उन तक पहुंचाने में मदद करे। अधिक पुरानी बात नहीं है, जब चीनी एप्लीकेशन यूसी न्यूज ब्राउजर वामपंथी इको सिस्टम के पत्रकारों की आमदनी का मुख्य जरिया था।

आजकल यूट्यूब चैनल चलाने वाले कई पत्रकार उन दिनों यूसी के लिए खबर लिख रहे थे। उन्होंने लाखों रुपए यूसी से कमाए लेकिन भारत की सुरक्षा एजेन्सियों के लिए वह एप एक सिरदर्द बन गया था। उस एप के माध्यम से भारत की बहुत सी संवेदनशील सूचनाएं और ढेर सारा डाटा चीन जा रहा था। प्रेस क्लब आफ इंडिया के परिसर में लंबे समय तक यूसी न्यूज का विज्ञापन लगा रहा था। बाद में भारत सरकार ने यूसी न्यूज समेत 58 अन्य चीनी एप को प्रतिबंधित किया।

उसी दौरान 'राजीव किष्किन्धा' नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले एक यू ट्यूबर राजीव शर्मा की गिरफ्तारी हुई थी। राजीव शर्मा चीन सरकार का मुखपत्र माने जाने वाले 'ग्लोगल टाइम्स' के लिए साप्ताहिक स्तम्भ लिखता था। चीन का एक खुफिया एजेंट लिंक्ड-इन के माध्यम से उससे जुड़ा। राजीव को अपने खर्चे पर उसने चीन बुलाया। उसके बाद वह लगातार राजीव के संपर्क में रहा। राजीव के माध्यम से उस एजेंट ने बहुत सारी खुफिया जानकारी निकलवाई। पैसे के लिए राजीव सब करता रहा।

यह सब कितने दिन चलता, आखिर राजीव शर्मा पकड़ा गया। उसकी गिरफ्तारी स्पेशल सेल ने की। अब उसकी जमानत हो गई है। राजीव चीनी एजेन्ट के लिए अब किसी काम का नहीं रहा। उसकी पहचान हो गई थी। इसलिए राजीव नहीं तो न्यूजक्लिक ही सही। बहरहाल न्यूजक्लिक के प्रबीर पुरकायस्थ भी गिरफ्तार हो चुके हैं। अब उन्हें न्यूजक्लिक को चीन से फंडिंग मिलने के आरोपों का कोर्ट में जवाब देना है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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