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Tihar Jail: मॉडल जेल से मर्डर वाली जेल कैसे बन गयी तिहाड़

तिहाड़ कभी एक मॉडल जेल हुआ करती थी लेकिन अब वह नशाखोरी, अपराध, वसूली और दिनदहाड़े हत्या करने वालों की शरण स्थली बन गयी है।

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Tihar Jail: बीते दो मई को तिहाड़ जेल के अंदर एक खतरनाक गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की उसके ही सेल में घुसकर तीन कैदियों ने बेरहमी से हत्या कर दी और पुलिस वहां खड़ी होकर तमाशा देखती रही। जब इस पूरे मामले का वीडियो तिहाड़ जेल से लीक हुआ, उसके बाद हर तरफ से तिहाड़ के अंदर कैदियों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे। जेल के अंदर की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी साल अप्रैल में एक अन्य गैंगस्टर प्रिंस तेवतिया को भी ऐसे ही गैंगवार में मार दिया गया था।

असुरक्षा का माहौल

तिहाड़ जेल की सुरक्षा की एक जमाने में मिसाल दी जाती थी। कुछ साल पहले तक यह भारत की सबसे सुरक्षित जेलों में गिनी जाती थी। लेकिन अब जिस तरह अपराधियों को जेल के अंदर वीआईपी सुविधाएं मिल रहीं हैं, गैंगवार की एक बाद एक घटनाएं हो रहीं हैं, जेल के अंदर रिश्वतखोरी जमकर चल रही है। उसके बाद लगता नहीं कि दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन के सामने अब तिहाड़ की साख का कोई प्रश्न है। जबकि यह एशिया की सबसे बड़ी जेल है। इसके अंदर देशभर के कुख्यात अपराधी और गैंगस्टर बंद हैं। उसके बाद भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था में हो रही बार बार चूक से क्या समझा जाए?

दो साल पहले 3 अगस्त, 2021 को अंकित गुर्जर का शव जेल के अंदर मिला था। शव देखने के बाद परिजनों ने जेल अधिकारियों पर बर्बरता का आरोप लगाया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद परिजनों के आरोप सच साबित हुए। इस मामले में एक दर्जन पुलिस वालों के खिलाफ अंकित की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला दर्ज हुआ।

35 सालों में तिहाड़ जेल में क्या बदला?

1986 में सीरियल किलर चार्ल्स शोभराज ने तिहाड़ में अपने जन्मदिन के नाम पर मिठाई मंगाई। उसे खाकर जेल के सारे सुरक्षाकर्मी अपनी सुध बुध खो बैठे और शोभराज बड़े आराम से जेल से फरार हो गया। उस घटना के 35 साल बाद जेल में बंद ठग सुकेश चन्द्रशेखर से मिलने जेल के अंदर फिल्मी अभिनेत्रियां चली आती थीं। वह जेल में बैठकर वीडियो काॅल से बड़े आराम से बात करता रहा। जेल में रहते हुए ही उसने कई ठगी और वसूली की वारदातों को अंजाम दिया। इसी तरह यूनिटेक के प्रमोटर संजय चन्द्रा और अजय चन्द्रा ने अपना दफ्तर ही जेल के अंदर बना लिया था। इसका मतलब तो यही निकलता है कि यदि आपके पास दौलत है तो आप जेल में रहें या फिर बाहर? आपकी जिन्दगी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार माॅडल चाहत खन्ना जब 200 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी सुकेश चन्द्रशेखर से मिलने तिहाड़ जेल गई थीं तो वहां उनकी कोई चेकिंग नहीं हुई। ना ही उनसे कोई पहचान पत्र मांगा गया। जब वे पिंकी ईरानी के साथ सुकेश से मिलने तिहाड़ जेल पहुंची तो वहां पहले से संजय चन्द्रा और अजय चन्द्रा मौजूद थे। फिर पिंकी और चाहत को वर्दी में वहां मौजूद जेल के दो कर्मचारी संजय चन्द्रा के साथ लेकर उन्हें प्रथम तल के एक कमरे में ले गए।

वहां विलासिता की सारी सुविधाएं उपलब्ध थीं। जेल के अंदर से संजय और अजय का दफ्तर चल रहा था। कमरे में कई गैजेट थे। एक बड़ी टीवी वहां रखी थी। एसी लगा हुआ था, एप्पल ब्लूटूथ स्पीकर, लैपटाॅप, सोफा, रेक्लाइनर, एक प्ले स्टेशन, कूलर, फ्रिज, फोन, रोलेक्स घड़ियां, कई महंगे गुच्ची, लुइस वेटन (एलवी), हर्मेस के बैग, वहां चाहत खन्ना को देखने को मिले। उनके वहां पहुंचने के थोड़ी ही देर बाद अजय चन्द्रा, सुकेश के साथ आए। देश का आम आदमी सोच भी नहीं सकता कि जेल के अंदर भी एक ऐसी दुनिया है, जो स्वर्ग से कम नहीं है। दिल्ली सरकार के मंत्री रहे सतेन्द्र जैन के वॉयरल वीडियो को देश देख ही चुका है कि कैसे वो तिहाड़ के भीतर बलात्कार के एक आरोपी से मसाज करा रहे हैं।

जेल के भीतर फ्रीलांस कारोबारी

अब यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि तिहाड़ जेल के अंदर नशे से लेकर हथियार तक हर तरह का सामान उपलब्ध है। जेल के अंदर ड्रग्स स्मगलिंग से जुड़ा एक मामला कुछ समय पहले सामने आया था। हुआ यूं कि जेल में बंद एक कैदी ने स्पीड पोस्ट से कपड़े और चप्पल मंगवाया। पार्सल जब जेल पहुंचा तो जेल अधिकारियों को शक हुआ। उन्होंने सामान की तलाशी ली। पार्सल खोलने पर उसमें से कपड़े और चप्पल ही निकले, लेकिन चप्पल और कपड़ों की ठीक से तलाशी ली गई तो उसके अंदर चरस और गांजा भरा हुआ था। वास्तव में यह गांजा और चरस वह सिर्फ अपने इस्तेमाल के लिए नहीं मंगा रहा था। वह जेल के अंदर दूसरे कैदियों को बेचकर इससे पैसे कमाने की जुगत में था। जेल के अंदर कैदियों के बीच ऐसे फ्रीलांस कारोबारी कम नहीं हैं।

एक कैदी तोे 05 मोबाइल निगल गया। उसे लगता था कि वह जेल के अंदर जाकर इसे निकाल लेगा और वहां इसकी अच्छी कीमत मिल जाएगी। कैदी स्मगलिंग कर जेल के अंदर फोन लाने में सफल भी हो गया। लेकिन वह जेल के अंदर पहुंचकर अपने पेट से फोन निकालने में सफल नहीं हो पाया। इस तरह उसका गोपनीय मिशन फेल हो गया। जेल के अंदर उसका यह बिजनेस माॅडल पकड़ा गया क्योंकि जब निगला हुआ फोन बाहर निकल नहीं रहा था तो उसे सारी बात जेल अधिकारियों को बतानी पड़ी। उसकी बात पर जेल में किसी को भी भरोसा नहीं हुआ। वह झूठ नहीं बोल रहा था, यह बात डॉक्टरों की जांच से स्पष्ट हो पायी। इस कहानी को जिसने भी सुना, दंग रह गया। डॉक्टरों को ऑपरेशन करके उसके पेट से फोन निकालना पड़ा।

खतरनाक गैंगस्टर का अड्डा

तिहाड़ से धमकी भरे फोन किए जाते हैं। यह अब कोई दबी छुपी बात नहीं है, जबकि कथित तौर पर इस जेल के साथ हाई सिक्योरिटी जेल होने का सम्मान जुड़ा है। जेल के इर्द-गिर्द मोबाइल फोन के जैमर लगे हुए हैं लेकिन इसके बावजूद अपराधियों की फोन पर बातचीत में कोई बाधा नहीं आती। वह लगातार जारी है। वे वीडियो काॅल पर भी जेल के अंदर से बात कर रहे हैं। जेल के अंदर से वे अपना सोशल मीडिया पेज चला रहे हैं। इस तरह जेल की 'हाई सिक्योरिटी' का मखौल दिल्ली सरकार के भ्रष्ट जेल प्रशासन की वजह से उड़ता है।

जेल में इस समय 20 बड़े और 30 छोटे क्रिमिनल गैंग्स से जुडे खूंखार अपराधी कैद हैं, जो जेल से ही गैंग चला रहे हैं। तिहाड़ में इस समय रोहित चैधरी, नवीन बाली, नीरज बवानिया, अनिल भाटी, हाशिम जैसे गैंगस्टर बंद हैं। जेलों से कुछ गैंग भी चल रहे हैं। जहां गैंगस्टर खुद बंद है या फिर उनके गुर्गे। लॉरेंस बिश्नोई गैंग, काला जठेड़ी गैंग, जितेंद्र गोगी गैंग, राजस्थान का आनंदपाल गैंग की लेडी डॉन अनुराधा गैंग, देवेंद्र बंबीहा गैंग, नीरज बवानिया गैंग चल रहे हैं।

इनमें कई गैंग एक दूसरे की जान की प्यासी हैं। एक को जैसे ही मौका मिले, दूसरे का काम तमाम कर दे। इस चुनौती से निपटने के लिए ही सुरक्षा के इतने इंतजाम जेल के अंदर रखे गए है। तिहाड़ में करीब 8 हजार सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जैमर हैं, अलार्म और हाई सिक्योरिटी सेल का भी इंतजाम है। उसके बावजूद आये दिन तिहाड़ से किसी ना किसी दुर्घटना की खबर आ जाती है।

क्षमता से दुगुने कैदी हैं बंद

तिहाड़ जेल प्रशासन दिल्ली सरकार के अधीन है। इसलिए तिहाड़ जेल में हुए हत्याकांड के बीच सवाल दिल्ली सरकार पर उठ रहे हैं। जेल की दो शाखाएं रोहिणी और मंडोली में भी हैं। इसके बावजूद जेल की क्षमता से करीब दो गुने कैदी तिहाड़ में बंद हैं। साल 2019 के आंकड़ों के अनुसार तिहाड़ जेल की क्षमता कुल 10 हजार कैदियों की है, जबकि इस जेल में लगभग 18 हजार कैदी बंद हैं। जहां दस कैदियों को रखा जाना चाहिए, वहां बीस बीस कैदी भरकर रखे हुए हैं। ऐसे में अव्यवस्था तो फैलनी ही है। समय रहते दिल्ली की सरकार और जेल प्रशासन को सुरक्षित तिहाड़ की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए।

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    जेल का मतलब होना चाहिए, जहां अपराधी को उसकी अपराध की दुनिया से अलग करके एक अच्छा इंसान बनने में मदद की जाए। किरण बेदी के दौर में तिहाड़ में इसका सफल प्रयोग भी हो चुका है जिसकी चर्चा देशभर में हुई थी। लेकिन अब यहां उलटा हो रहा है। यह समय जेल प्रशासन द्वारा अतिरिक्त सावधानी बरतने का है। राष्ट्रीय स्तर पर भी जेल सुधारों पर कुछ ठोस काम प्रारंभ होना चाहिए।

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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