Adipurush Controversy: ‘आदिपुरुष’ को अब राम का ही सहारा है
Adipurush Controversy: आदिपुरुष के खिलाफ लेफ्ट-राइट दोनों पक्षों के लोगों ने इतना जबरदस्त अभियान चलाया कि अब आगे क्या होगा, ये राम ही जाने। इसी हफ्ते सोमवार से जब फिल्म का कलेक्शन गिरना शुरू हुआ था, तब भले ही मीडिया इसे फिल्म के विरोध का असर बता रही थी, लेकिन ट्रेड पंडित मान रहे थे कि पहले वीकेंड के बाद सोमवार से कलेक्शन गिरता ही है, जो फिर अगले वीकेंड में बढ़ जाता है। लेकिन आदिपुरुष की शुक्रवार की कमाई बता रही है कि आदिपुरुष को अब बस राम का ही सहारा है।
शुरूआत में तो 'आदिपुरुष' के कर्ताधर्ताओं को अंदाजा ही नहीं था कि ये विरोध इतना जबरदस्त होगा, सो वो टीवी पर आकर लगातार अपने ऊपर लगने वाले आरोपों का जवाब दे रहे थे, जिनमें विनम्रता कम और तर्क ज्यादा थे। मनोज मुंतशिर को लग ही नहीं रहा था कि इतने संवेदनशील विषय पर उनके हल्के डायलॉग लोगों को कतई पसंद नहीं आए हैं। बल्कि मनोज ने पहले दिन की कमाई 140 करोड़ के पोस्टर को सोशल मीडिया पर ठसक के साथ शेयर किया। लोग इससे भी बड़े नाराज हुए। जब एडवांस बुकिंग में झटके से कमी आई औऱ न्यूज चैनल्स व सोशल मीडिया पर माहौल बनना शुरू हुआ तब उनके लहजे में नरमी आई।

पहले दिन यानी शुक्रवार की भारत में कमाई 86.75 करोड़ थी, हिंदी के 37.25 करोड़ के मुकाबले तेलुगू में ये 48 करोड़ पहुंच गई थी। दूसरे दिन तेलुगू की कमाई 26.65 करोड़ पर आ गई, लेकिन हिंदी की 37 करोड़ रही, कुल कमाई 65.25 करोड़ थी। तीसरे दिन यानी रविवार को थोड़ा कलेक्शन बढ़ा और 69.10 करोड़ तक पहुंचा। हिंदी की कमाई 38 करोड़ और तेलुगू की 29.3 करोड़ जा पहुंची। लेकिन सोमवार को एकदम से कलेक्शन 76 फीसदी से भी ज्यादा गिरकर कुल 16 करोड़ पर जा पहुंचा। हिंदी 8.5 करोड़ और तेलुगू 6.9 करोड़। पांचवे दिन मंगलवार को कलेक्शन 33 फीसदी गिरकर केवल 10.7 करोड़ रह गया और छठे दिन बुधवार को केवल 7.25 करोड़ रह गया। गुरुवार को ये 4.85 करोड़ पर आ गया।
फिल्मी वीकेंड शुक्रवार से शुरू होता है। लग रहा था कि फिल्म फिर से उठना शुरू होगी, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि कमाई बस 3.25 करोड़ की ही हुई है। ये तब था जब 22 और 23 जून को दो बड़ी तरकीबें निर्माताओं की तरफ से आजमाई गईं। पहले तो जिन डायलॉग्स पर आपत्ति थी, उनको बदल दिया गया। हनुमानजी के लिए तू जैसे शब्दों को भी बदल दिया गया। दूसरे थ्रीडी वर्जन की टिकट की कीमत केवल 150 रुपए कर दी गई। निर्माताओं को लगा था कि इससे लोगों को लुभाया जा सकेगा, लेकिन शायद इतना ज्यादा नकारात्मक अभियान फिल्म के खिलाफ चल चुका है कि लोगों को थिएटर्स तक खींच कर वापस लाना आसान काम नहीं है।
फिल्म की लागत 500 करोड़ बताई जा रही थी और फिल्म कुल पांच भाषाओं में रिलीज हुई थी, लेकिन ज्यादातर कमाई हिंदी और तेलुगु वर्जन से ही हुई है। तमिल, मलयालम या कन्नड़ में किसी भी दिन कलेक्शन 1 करोड़ रुपए से अधिक नहीं पहुंचा है। इधर 7 दिनों में आदिपुरुष ने भारत में कुल जमा 263.15 करोड़ कमाए हैं, जबकि टी- सीरीज की प्रेस रिलीज के मुताबिक 6 दिनों के अंदर यानी बुधवार तक इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन 410 करोड़ रुपए हो चुका था। उसके बाद इसमें गुरूवार व शुक्रवार का कलेक्शन भी जुड़ना बाकी है। विदेशों में भी बताया जाता है कि आदिपुरूष कुल 2100 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है। ऐसे में इस वीकेंड पर कितनी भी कम कमाई हो, वर्ल्ड वाइड कमाई के आंकड़ों से तो फिल्म अपनी लागत निकाल ही लेगी।
ये अलग बात है कि तमाम सपने जो ओम राउत व भूषण कुमार ने देखे होंगे, उन पर तो कुठाराघात ही हो गया है। अब उनके पास सेटेलाइट/ओटीटी राइट्स का तो सहारा है ही, उनको उम्मीद है कि शनिवार और रविवार को दर्शकों में इजाफा हो सकता है, क्योंकि इस वीकेंड पर कोई बड़ी मूवी रिलीज नहीं हुई है। विवादित डायलॉग्स भी बदले जा चुके हैं तो उनकी उम्मीद बनी हुई है।
फिल्म के निर्माता केवल टिकटें सस्ती करके या डायलॉग बदलने तक ही नहीं रुके हैं। उन्होंने और भी कई तरह की कोशिशें फिल्म को फिर से लोकप्रिय बनाने के लिए की हैं। कई सारे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स के लिए फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई, लेकिन बहुत से गए ही नहीं। कृति सोनन की मम्मी ने इमोशनल पोस्ट अपनी बेटी को सीता के रोल में देखकर लिखा, उसके कई सारे पुराने फोटोज शेयर किए। जिन लोगों ने फिल्म देखकर तारीफें की थी, उनको हर प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। कुछ परिचित सेलेब्रिटीज से तारीफ करवाई भी गई। टी-सीरीज ने दर्शकों को लुभाने के लिए रावण यानी सैफ अली खान पर फिल्माया गया 'शिवोहम' गाने का वीडियो भी जारी किया, जो अभी तक नहीं किया गया था, उसके बाद 'तू ही शीतल धारा' का भी वीडियो जारी कर दिया।
लेकिन विरोध का प्रवाह इतना प्रबल था कि फिल्म से जुड़े लोगों के हाथ पांव फूल गये। ओम राउत और मनोज दोनों को पुलिस सुरक्षा तक दे दी गई है। मनोज मुंतशिर जो अभी तक टीवी पर कमान संभाल रहे थे, उनको टीवी पर बैठने से रोकने की खबर भी आई है। माना जा रहा है कि ओम राउत उनके बयानों से ज्यादा खुश नहीं हैं। जैसे हनुमान भगवान नहीं भक्त हैं। उससे भी ज्यादा दिक्कत उनके पुराने बयानों से हुई जिसमें से एक में वो कह रहे हैं कि ''प्रयागराज क्या है मैं नहीं जानता, मेरे अंदर तो इलाहाबाद बसता है।" दूसरे वीडियो में वो कह रहे हैं कि ''पापा शिव श्रोत जपते थे और मैं गजल या शेर गुनगुनाने लगता था''। सनातनियों के बीच ये पुराने वीडियोज उनकी नई स्थापित राष्ट्रवादी छवि को तार तार कर रहे हैं।
दिक्कत तब और बढ़ गई जब प्रसिद्ध संत बाबा प्रेमानंद जी ने इस मूवी के खिलाफ बयान जारी कर दिया। ये वही संत हैं, जिनकी शरण में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा पहुंचे थे। उनके लाखों करोड़ों भक्त हैं। ऐसे में तीन दिन बाद चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी रंगराजन ने फिल्म देखकर ओम राउत और प्रभास की तारीफ की है। इससे उन्हें कुछ सांत्वना तो मिली होगी, लेकिन अब शायद देर हो चुकी है। सिने वर्कर्स एसोसिएशन भी खुलकर 'आदिपुरुष' के खिलाफ आ गई है। ऐसा पहले कभी नहीं होता था। उसके बाद मुकेश खन्ना ने तो कह दिया कि 'जिंदा जला दो राम का अपमान करने वालों को'। महाभारत के युधिष्ठिर गजेन्द्र चौहान ने भी विरोध में बयान जारी कर दिया। रामायण सीरियल के राम और लक्ष्मण ने भी नाराजगी जताई है।
ऐसे में आज 'आदिपुरुष' के साथ कोई भी खुलकर खड़े होने को तैयार नहीं है। तेलुगु में भी प्रभास के समर्थक जो अब तक साथ खड़े थे, थोड़ा पीछे हो गए हैं। ओम राउत व भूषण कुमार ने भी सारे पैतरे आजमा लिए हैं, अब तो उनका भरोसा केवल दर्शकों पर हैं, या फिर श्रीराम पर जिनके लिए उन्होंने गाना लिखवाया था- 'तेरे ही भरोसे हैं, तेरे ही सहारे'।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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