Bihar JDU: गजब बेचैनी है बिहार के राजनीतिक माहौल में
Bihar JDU: जब से ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के भावी उम्मीदवार के रुप में इंडिया गठबंधन की ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम सुझाया है तभी से जनता दल यूनाइटेड में बेचैनी का माहौल है। मौजूदा 16 सांसदों से लेकर पार्टी पदाधिकारियों के बीच अंदरखाने में अपने अपने भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हैं। सीतामढ़ी के जदयू सांसद सुनील कुमार पिंटू ने वनइंडिया से बातचीत में कहा कि केवल माननीय नीतीश कुमार ही जानते हैं कि जदयू का अगला रूख क्या होगा।
क्या सभी 16 सांसदों को अपने भविष्य की चिंता होने लगी है? इस पर जदयू सांसद पिंटू खुल कर नहीं बोलते, लेकिन सभी अपने अपने लिए नए खेमे की तलाश भी कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या अगला लोकसभा का चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ने की योजना है, इस पर सुनील कुमार पिंटू हंसते हुए कहते हैं कि 2024 में देखा जाएगा।

लेकिन सुनील कुमार पिंटू खुलकर नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हैं। वह राम मंदिर के बनाए जाने को विशुद्ध धार्मिक आस्था का विषय बताते हुए कहते हैं कि कुछ लोग तो राम के अस्तित्व को ही नकार रहे थे। वे कोर्ट में शपथ पत्र देकर कह रहे थे कि राम का कोई अस्तित्व नहीं है, वे तो काल्पनिक हैं। सुनील कुमार पिंटू पिछले हफ्ते दिल्ली में नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई सांसदों की बैठक में शामिल नहीं हुए थे, उस पर जेडीयू के नेता और बिहार के जलसंसाधन मंत्री संजय झा ने बयान दिया था कि सुनील कुमार पिंटू जदयू में है कहां?
जेडीयू के बिहार के एक नेता का कहना है कि पटना में 29 दिसंबर को बुलाई गई बैठक में सब कुछ तय हो जाएगा। क्या पार्टी अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बदल सकती है? इस सवाल के जवाब में जदयू नेता का कहना है कि उनकी पार्टी में सर्वेसर्वा नीतीश कुमार ही हैं। वह जो भी निर्णय लेंगे, सब लोग उसे मानेंगे। उल्लेखनीय है कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष लल्लन सिंह को हटाए जाने की चर्चा जोरों से चल रही है। इस संबंध में पार्टी में कई अन्य नामों पर विचार भी कर रही है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर के बेटे और जदयू से राज्य सभा के सांसद रामनाथ ठाकुर को कोई बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। कुछ लोग उन्हें लल्लन सिंह के विकल्प के रूप में भी देख रहे हैं। जदयू का पिछड़ा और अतिपिछडा वोट बैंक खिसकने की चिंता पार्टी के नेतृत्व को सता भी रही है। लल्लन सिंह जाति से भूमिहार हैं और उनका लालू प्रसाद यादव के परिवार के साथ करीबी रिश्ता होना भी पार्टी के नेताओं को अखर रहा है। इसलिए यह संभावना है कि जदयू अपने कोर वोट के लिए कोई बड़ा फेरबदल करे।
लल्लन सिंह का पार्टी में भले ही विकल्प हो, लेकिन बिहार की राजनीति में पकड़ बनाए रखे और बिहार से केंद्र की राजनीति में धुरी बनने के विकल्प के रूप में उभरे नीतीश कुमार के लिए विकल्पों की कमी है। पार्टी में कोई भी बड़ा बदलाव या उथल पुथल अंततः नीतीश कुमार के लिए कमजोरी का कारण बनेगा। पार्टी के सांसदों को ही नहीं, विधायकों को भी अपने भविष्य को लेकर तमाम आशंकाएं हैं। इसलिए नेतृत्व को लेकर किसी बड़े संकट की स्थिति जदयू के विघटन का कारण बन सकती है। गाहे बगाहे जदयू के विधायक कोई न कोई अप्रिय बयानबाजी कर ही दे रहे हैं। इसलिए यह भी आशंका बन रही है कि कहीं जदयू विधायक दल में ही विभाजन ना हो जाए।
राष्ट्रीय जनता दल और लालू प्रसाद का परिवार फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। वे किसी भी राजनीतिक तूफान का कारण नहीं बनना चाहते। वे खामोशी से जेडीयू में हो रहे विवाद का नजारा देख रहे हैं। उन्हें सिर्फ आशंका इस बात की है कि कहीं नीतीश फिर से एनडीए में ना चले जाए। इसलिए अपनी ओर से राजनीतिक बयानबाजी से बच रहे हैं।
एक संभावना यह भी है कि जदयू में नेतृत्व को लेकर यदि कोई बात आगे बिगड़ती है और पार्टी में कोई विभाजन की स्थिति बनती है, तो राजद अपनी सरकार बनाने का प्रयास कर सकता है। जदयू में टूट की स्थिति में जो भी विधायकों को लेकर अलग होता है वह राजद के साथ सरकार में शामिल हो सकता है। जो भी हो बिहार की राजनीति में शीघ्र ही कुछ नया होने की परिस्थितियां बन रही हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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