Kishore Kumar: अशोक कुमार का जन्मदिन बन गयी किशोर कुमार की पुण्यतिथि
Kishore Kumar: इस दुनिया में न अब दादा मुनि अशोक कुमार हैं और ना ही उनके छोटे भाई मस्तमौला किशोर कुमार। लेकिन 13 अक्टूबर की तारीख जब भी आती है, उनके परिवार को फिर से 1987 में ले जाती है। 13 अक्टूबर का दिन पूरे गांगुली परिवार में खुशियों का दिन माना जाता था। इस दिन परिवार का सबसे बड़ा बेटा पैदा हुआ था, कुमुद लाल गांगुली जो बाद में बन गए बड़े परदे के सुपर स्टार अशोक कुमार। उनकी वजह से उनके भाइयों के लिए भी फिल्मी दुनियां के रास्ते खुलते चले गए थे. लेकिन उनका यही खुशियों भरा दिन 1987 में पूरे परिवार के लिए मातम का दिन बन गया।
मौत कुछ सिग्नल देने लगती है, शायद किशोर कुमार ने भी उस दिन अपने छोटे बेटे सुमित को स्विमिंग के लिए जाने से इसीलिए रोक दिया था। वह चाहते थे कि उनका बड़ा बेटा अमित भी उनके साथ ही हो, जबकि अमित कनाडा में थे, उसी दिन वापस आना था। किशोर परेशान थे कि कहीं फ्लाइट लेट ना हो जाए। वह अपनी पत्नी लीना से हार्ट अटैक के पहले के कुछ संकेतों के बारे में भी बात कर रहे थे। लीना ने कहा भी कि क्या डॉक्टर को बुला लूं? तो हंसते हुए कहा कि "डॉक्टर के आने से मुझे सचमुझ में हार्ट अटैक आ जाएगा"।

शाम को 4 बजकर 45 मिनट पर उन्हें वाकई में दिल का दौरा पड़ गया। उनकी मजाकिया आदतों के चलते लीना ने काफी देर तक यही समझा कि वह फिर कोई मजाक कर रहे हैं। लेकिन यह मजाक नहीं था बल्कि मौत का फरमान था। किशोर कुमार की मौत 13 अक्टूबर को उस दिन हुई, जिस दिन अशोक कुमार का जन्मदिन था। पार्टी रद्द हो गई, हमेशा के लिए। अशोक कुमार ने फिर कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाया।
फिल्मी दुनिया के बारे में तो इन तीनों ही भाइयों ने सोचा तक नहीं था। उनकी किस्मत खुली एक शादी के बाद, किशोर और अनूप से बड़ी और अशोक से छोटी उनकी बहन सती देवी की शादी हुई एक ऐसे शख्स से हुई जो फिल्मी दुनिया से जुड़ा था, नाम था शशधर मुखर्जी। वह हिमांशु रॉय और देविका रानी के नए प्रोजेक्ट बॉम्बे टॉकीज से जुड़ गए। बाद में उनके बेटे बॉलीवुड के बड़े हीरो बने जॉय मुखर्जी, देव मुखर्जी और काजोल के पापा शोमू मुखर्जी। इस तरह ये तीनों हीरो अशोक कुमार और उनके भाइयों के भांजे थे। गांगुली परिवार बिहार के भागलपुर से ताल्लुक रखता है, जो उन दिनों बंगाल प्रेसीडेंसी में आता था।
प्राइम वीडियोज पर विक्रमादित्य मोटवानी की सीरीज 'जुबली' में काफी हद तक कुमुद लाल गांगुली को मिले कैरियर ब्रेक को दिखाया गया है जो देविका रानी के अफेयर के चलते उनको किस्मत से मिल गया था। अशोक कुमार से मिलते जुलते पात्र की भूमिका इस सीरीज में अपारशक्ति खुराना ने की है।
अशोक कुमार यूं तो कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में लॉ पढ़ रहे थे, लेकिन सती की शादी के बाद से उनको सिनेमा में काम करने का मन होने लगा। जब कुमुद लाल ने अपने बहनोई शशाधर से कहा कि वो फिल्मों में काम करना चाहते हैं तो उन्होंने बुला लिया उन्हें मुम्बई। हिमांशु रॉय ने उनके कहने पर कुमद लाल को बॉम्बे टॉकीज में लैब असिटेन्ट की जॉब भी दे दी। ऐसे में अचानक से कुमुद लाल से हीरो अशोक कुमार कैसे बन गए, इसकी कहानी वाकई में दिलचस्प है।
देविका रानी के साथ जिस हीरो का अफेयर हुआ, उसका नाम था नजमुल हसन। इतना स्मार्ट था ये बंदा कि हिमांशु ने देखते ही उसे अपनी फिल्म 'जवानी की हवा' का हीरो बना दिया और हीरोइन थीं देविका रानी। पहली फिल्म से ही लंदन रिटर्न देविका रानी नजमुल हसन के नजदीक आ गईं। वैसे भी देविका शुरू से ही बोल्ड थीं, बॉलीवुड का पहला किस सीन उन्होंने अपने पति हिमांशु राय के साथ 'कर्मा' फिल्म में किया था। एक दिन देविका और नजमुल अचानक से गायब हो गए और बाद मे कोलकाता के ग्रांड होटल में मिले।
अब तो हिमांशु राय का गुस्सा उफान पर था, पत्नी देविका को तो उन्होंने माफ कर दिया, लेकिन नजमुल हसन को ना केवल फिल्म से निकाल दिया, बल्कि बाकी किसी अन्य स्टूडियो में भी उसे काम नहीं मिलने दिया। कुछ सीन अगली फिल्म 'जीवन नैय्या' के शूट हो चुके थे। वो री-शूट होने थे, लेकिन उससे पहले हीरो ढूंढना था। कोई कहता है शशाधर मुखर्जी ने नाम बढ़ाया, कोई कहता है पत्नी को सबक सिखाने के लिए हिमांशु रॉय ने लैब असिस्टेंट कुमुद गांगुली को बुलाकर हीरो बना दिया। धोखा खाने के बाद अब वह एवरेज लुकिंग हीरो चाहते थे। हिमांशु ने उनका नाम भी बदल दिया, पहले देव कुमार ..फिर अशोक कुमार कर दिया।
एवरेज दिखने और एवरेज से भी कम एक्टिंग की समझ वाले अशोक कुमार की तो निकल पड़ी। काम करने के दौरान ही उनको देविका के साथ 'अछूत कन्या' भी मिल गई, जो उस वक्त सुपरहिट साबित हुई और अशोक कुमार की गाड़ी फिल्म इंडस्ट्री की गलियों में सरपट दौड़ पड़ी। दिलीप कुमार को भी फिल्मों में ब्रेक देविका रानी ने ही दिया था। हिमांशु रॉय की मौत के बाद जब देविका रानी बॉम्बे टॉकीज छोड़कर विदेश चली गईं तो बॉम्बे टॉकीज शशाधर मुखर्जी ने ले लिया और फिर अशोक कुमार के साथ फिल्मिस्तान स्टूडियो भी शुरू कर दिया।
अशोक, अनूप और किशोर, इन तीनों भाइयों ने एक साथ मिलकर एक फिल्म भी बनाई 'चलती का नाम गाड़ी'। इस फिल्म को बनाने की भी बड़ी दिलचस्प कहानी है। किशोर कुमार इन्कम टैक्स वालों से बड़े परेशान रहते थे। उनके मरने तक उन पर इनकम टैक्स के केस खत्म नहीं हुए।
इन्हीं इनकम टैक्स के केस से बचने के लिए उन्होंने दो फिल्में प्रोडयूस करने का ऐलान कर दिया, एक बंगाली थी और दूसरी हिंदी की 'चलती का नाम गाड़ी'। घर के लोगों को पैसा कम देते और बाद में फिल्मों में ज्यादा नुकसान दिखा देते, ऐसा उनका आइडिया था, लेकिन मामला उलट गया। ये फिल्म सुपरहिट हो गई। हालांकि बाद में किशोर भाइयों को लेकर एक और फिल्म लेकर आए, 'बढ़ती का नाम दाढ़ी'।
बहरहाल, 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार ने अपनी मौत से एक दिन पहले जो गाना रिकॉर्ड किया था, वो था श्रीदेवी और मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म 'वक्त की आवाज' का गाना 'गुरु गुरु'। गाने को देखिए, सुनिए और फिर जानिए कि कितनी मस्ती से ये गाना गाया था किशोर कुमार ने। अगले दिन उन्हें मौत का आभास हुआ तो उसे रोकने की कोई कोशिश भी नहीं की, बस बीवी बच्चों को अपने पास देखना चाहते थे।
छोटे भाई किशोर की मौत की खबर जब अशोक कुमार को मिली तो सुबह से जन्मदिन की बधाइयां पा रहे अशोक कुमार को बड़ा धक्का लगा। कुछ समय पहले ही उनकी बीवी का देहांत हुआ था। ये एक और बड़ा झटका था उनके लिए। अगले 14 साल तक जब तक दादा मुनि जिंदा रहे, उन्होंने अपना जन्मदिन नहीं मनाया।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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