असम NRC ड्राफ्ट: बीजेपी ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए चला सबसे बड़ा हिंदुत्व कार्ड
नई दिल्ली। असम के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) पर सियासी महासंग्राम चल रहा है। बांग्लादेश से आए मुस्लिम घुसपैठियों का मामला असम में दशकों से छाया हुआ है। इसके पीछे एक बड़ी वजह असम में तेजी से बढ़ती मुस्लिम आबादी भी है। असम में 1951 से 1971 के बीच वोटरों की संख्या अचानक 51 प्रतिशत बढ़ गई। 1971 से 1991 के बीच वृद्धि दर करीब 90 प्रतिशत तक बढ़ गई। 2001 की जनगणना में मुस्लिम आबादी में बढ़ोतरी 30.9 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 34.2 प्रतिशत हो गई। इस आंकड़े की देश के बाकी राज्यों से तुलना करें तो अन्य हिस्सों में मुस्लिमों की आबादी 13.4 से 14.2 प्रतिशत की रफ्तार से ही बढ़ी। तेजी से बढ़ती मुस्लिम आबादी और घुसपैठ असम में बड़े राजनीतिक मुद्दे हैं। अब सियासी नफे-नुकसान की बात करते हैं।

NRC ड्राफ्ट डालेगा 67 लोकसभा सीटों पर सीधा असर
2019 लोकसभा चुनाव के ऐन पहले असम में जारी NRC ड्राफ्ट पर बिना लाग-लपेट राजनीतिक दल अपने-अपने हिंदू-मुस्लिम मतदाताओं को एड्रेस कर रहे हैं। NRC ड्राफ्ट पर सबसे ज्यादा तमतमाती नजर आ रही हैं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। दरअसल, असम से सटे पश्चिम बंगाल में भी घुसपैठ बड़ी समस्या है। असम में 34 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी है, जबकि बंगाल में यह आंकड़ा 27 से 28 प्रतिशत के बीच है। असम में 14 लोकसभा सीटें और पश्चिम बंगाल में 42। पूरे नॉर्थ-ईस्ट की बात करें तो असम समेत 25 लोकसभा सीटें हैं। इस प्रकार से अगर पश्चिम बंगाल और नॉर्थ-ईस्ट की सभी सीटों को जोड़ दिया जाए तो कुल लोकसभा सीटें बनती हैं- 67। मतलब NRC ड्राफ्ट का इन 67 सीटों पर सीधा असर होगा।

हिंदू को हिंदू और मुसलमान को मुसलमान की तरह सोचने पर मजबूर करेगा NRC ड्राफ्ट
अवैध तरीके से मुस्लिमों की घुसपैठ का मुद्दा अन्य राज्यों में भी हिंदू को हिंदू की तरह और मुसलमान को मुसलमान की तरह सोचने पर मजबूर करेगा। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस हो, वामपंथी या कांग्रेस। पश्चिम बंगाल में बिना मुस्लिम वोट बैंक किसी पार्टी की सरकार नहीं बन सकती, कारण हिंदू बंटे हुए हैं। यही वजह है कि ममता बनर्जी से लेकर लेफ्ट और कांग्रेस तक सभी का इफ्तार में आना-जाना लगा रहता है।

NRC ड्राफ्ट का ममता पर क्या पड़ेगा असर
पश्चिम बंगाल में भी स्थिति कमोबेश असम जैसी ही है। ममता बनर्जी के शासन वाले इस राज्य में भी बांग्लादेश से लोग आकर बस गए हैं और बड़ी संख्या में घुसपैठ होती रहती है। इस प्रकार का मुद्दा हाईलाइट होने से हिंदू तृणमूल कांग्रेस से कट सकता है और बीजेपी की ओर जा सकता है। कम से कम लोकसभा चुनाव में इसकी संभावना ज्यादा है, क्योंकि वोटर जानता है कि ममता बनर्जी पीएम नहीं बन सकती हैं और पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ पश्चिम बंगाल में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में करीब 67 सीटों पर ब्रैंड मोदी और हिंदुत्व कार्ड दोनों का असर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और असम में कांग्रेस का खेल खराब कर सकता है।

कांग्रेस लंबे समय से दबा कर बैठी थी NRC ड्राफ्ट का मुद्दा
असम में कांग्रेस ने लंबे समय तक राज किया, लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर कभी कोई कड़ा रुख नहीं अपनाया। यह बात सच है कि 1985 में राजीव गांधी ने सरकार असम अकॉर्ड में साइन किया था। 1985 से लागू असम समझौते के अनुसार, 24 मार्च 1971 की आधी रात तक राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। राजीव गांधी ने असम गण परिषद और अन्य आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया था कि 1971 के बाद आए बांग्लादेशियों को वह बाहर का रास्ता दिखा देंगे। राजीव गांधी के बाद कांग्रेस इस नीति पर कायम नहीं रह सकी। कारण- मुस्लिमों वोटरों की पहली पसंद कांग्रेस ही रही। ऐसे में उसके लिए एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति रही।

बीजेपी ने चल दिया 2019 के लिए सबसे बड़ा हिंदुत्व कार्ड
नरेंद्र मोदी की छवि हिंदुत्व से जुड़ी है। यह बात और है कि ब्रैंड मोदी को विकास से जोड़ा जाता है, लेकिन हिंदुत्व ब्रैंड मोदी का आधार है। लेकिन 2014 के बाद अब पार्टी ऐसा कोई काम नहीं कर सकी जो सीधे हिंदुत्व की विचारधारा पर चलने वालों को एड्रेस करे। अब असम में NRC ड्राफ्ट जारी कर बीजेपी ने पूरे देश में अवैध मुस्लिम घुसपैठियों का मुद्दा देश के सामने खड़ा कर दिया है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद हिंदू वोट को संगठित कर मुस्लिम वोट बांटने की रणनीति के दम पर जीतते आ रहे हैं। NRC ड्राफ्ट के सहारे हिंदू को संगठित करने में बीजेपी को मदद मिल सकती है।












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