अगर राजस्थान के किसी अधिकारी पर लगा आरोप तो 6 महीने मीडिया नहीं पूछ सकेगी सवाल, आएगा नया कानून
नई दिल्लीः राजस्थान की वसुंधरा राज्य सरकार एक नया कानून बनाने जा रही है। इस कानून के बाद सरकार की इजाजत के बगैर राजस्थान में किसी भी कार्यरत जज, मजिस्ट्रेट या सरकारी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया जा सकेगा। अगर कोई केस करना चाहता है तो सबसे पहले सरकार की मंजूरी लेनी होगी।

सोमवार को पेश किया जाएगा कानून
वंसुधरा राजे सरकार सोमवार (23 अक्टूबर) से शुरू होने जा रहे विधानसभा में ये बिल पेश करने जा रही है। यह बिल हाल ही में लाए गए अध्यादेश का स्थान लेगी। राजस्थान सरकार द्वारा लाए प्रस्तावित बिल में साफ कहा गया है कि जजों, मजिस्ट्रेटों और अन्य सरकारी अधिकारियों, सेवकों पर कोई भी केस करने से पहले सरकार की मंजूरी जरूर लेनी होगी।

6 महीने पर मीडिया नहीं छाप सकता कोई रिपोर्ट
प्रस्तावित बिल में साफ लिखा गया है कि अगर सरकार 180 दिनों के अंदर मामले की छानबीन करने की मंजूरी देगी या नहीं। अगर सरकार तीन महीने यानि 180 दिनों में कोई जवाब नहीं देती है तो माना जाएगा कि सरकार ने जांच की मंजूरी दे दी है। इस कानून के बार में राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया से पूछा तो उनका कहना था कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कानून का उल्लंघन करने पर हो सकती है दो साल की सजा
राजस्थान सरकार द्वारा लाए जा रहे इस बिल के मुताबिक मीडिया भी छह महीने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ न ही कुछ दिखा सकेगी और न ही कुछ छाप सकेगी। जब तक सरकारी एंजेसी आरोपों पर कार्रवाई की मंजूरी न दे दे, तब तक मीडिया को छापने व दिखाने पर रोक होगी। अगर किसी का उल्लंघन करने पर दो साल की सजा हो सकती है। बिल के बारे में राजस्थान के मंत्री राजेंद्र राठौर का कहना है कि कई लोगों ने अफसरों की छवि को झटका लगा है इसलिए ये बिल लाया गया है।

विपक्ष हुआ हमलावर
राजस्थान सरकार के इस बिल पर विपक्ष ने राजस्थान सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस नेता सचिन पायलेट का कहना है कि राजस्थान सरकार का ये बिल हैरान करने वाला है। सरकार भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है। इसके अलावा कई नेताओं ने राजस्थान सरकार के इस बिल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।












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