Varanasi Ropeway: काशी का रोपवे बनेगा ‘सुगमता’ का प्रतीक, दिव्यांगों और महिलाओं के लिए खास इंतजाम
Varanasi Ropeway: वाराणसी अब केवल धर्म और संस्कृति की नगरी नहीं बल्कि तकनीक और संवेदनशीलता का संगम भी बनने जा रही है। देश का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे यहां तैयार हो रहा है जो दिव्यांगों, नेत्रहीनों और महिलाओं के लिए खास बन जाएगा।
मोदी-योगी सरकार के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में हर किसी की सुविधा को प्राथमिकता दी गई है। शहर में लगने वाले जाम और भीड़ से परेशान यात्रियों को राहत तो मिलेगी ही इसके साथ संवेदनशील यात्रियों के लिए खास सोच भी झलकती है।

दिव्यांग जनों को भी यहां से सफर के दौरान किसी सहारे की जरूरत नहीं होगी। रोपवे स्टेशनों पर उन्हें रैंप, व्हीलचेयर, और खासतौर पर डिजाइन की गई गोंडोला सीट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे वे सम्मानजनक ढंग से यात्रा कर सकेंगे।
नेत्रहीनों के लिए 'दिखेगा रास्ता'
नेत्रहीन यात्रियों को भी इस रोपवे से पूरी सहूलियत मिलेगी। स्टेशनों पर ज़मीन पर बिछाई जा रही टेक्टाइल टाइल्स उनके लिए रास्ता दिखाएंगी। ये टाइलें उभरी हुई होंगी जिन पर वे आसानी से दिशा समझ सकें।
जहां मोड़ या रुकावटें होंगी वहां वार्निंग टाइल्स यानी बबल टाइल्स लगाई जाएंगी। साथ ही लिफ्ट के बटन पर ब्रेल लिपि में मंजिलों के संकेत लिखे होंगे। इससे नेत्रहीन बिना मदद के यात्रा पूरी कर सकेंगे।
महिलाओं के लिए बेबी फीडिंग रूम
महिलाओं की सुविधा का भी पूरा ख्याल रखा गया है। हर रोपवे स्टेशन पर बेबी फीडिंग रूम बनाए जा रहे हैं, जहां माताएं अपने शिशुओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में फीड कर सकेंगी।
रोपवे की कुल दूरी 3.85 किलोमीटर होगी और पांच स्टेशन कैंट से गोदौलिया तक बनाए जा रहे हैं। 29 टावरों पर 148 ट्रॉली कारें चलेंगी, जिनमें हर एक में 10 यात्री सवार हो सकेंगे।
हर घंटे एक दिशा में 3000 लोग और दोनों दिशाओं में 6000 यात्री सफर कर सकेंगे। यह व्यवस्था खासतौर पर वाराणसी की व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक को राहत देने में मददगार साबित होगी।












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