UP Politics: अजय राय को मिली यूपी की कमान, बदल जाएगा 2024 का समीकरण, जानें क्या कह रहे हैं सियासी जानकार

UP Politics: पांच बार विधायक रहने के अलावा दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ने वाले अजय राय को कांग्रेस पार्टी द्वारा यूपी का अध्यक्ष बनाया गया। अजय राय को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सियासी जानकारों का कहना है कि पूर्वांचल समेत उत्तर प्रदेश का समीकरण लोकसभा चुनाव 2024 में बदला नजर आएगा।

सवर्ण नेता को उत्तर प्रदेश में पार्टी की कमान सौंपकर कांग्रेस जहां सवर्ण वोट बैंक को अपने पक्ष में करने का प्रयास की है। वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र सिंह बताते हैं कि वहीं पिछले चुनाव पर यदि ध्यान दिया जाए तो पता चलेगा कि मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव भी कांग्रेस की तरफ बढ़ रहा है।

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पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पूर्वांचल समेत उत्तर प्रदेश के भूमिहार, ब्राम्हण समेत सवर्ण वोटों को यदि अजय राय कांग्रेस के पाले में करने में सफल हो जाते हैं तो 2024 चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति में काफी सुधार होगा। सियासी जानकारों का कहना है कि सवर्ण वोटों को साधने के लिए ही कांग्रेस द्वारा अजय राय को यूपी की कमान सौंपी गई है।

पूर्वांचल में अजय राय एक बड़े नेता के रूप में जाने जाते हैं इसके अलावा भूमिहार ब्राह्मणों की एक बड़ी संख्या भी है। ऐसे में भूमिहार ब्राह्मणों का वोट जहां कांग्रेस के पाले में जा सकती है वही ब्राह्मणों का झुकाव भी कांग्रेस की तरफ होगा। ऐसे में इसका सीधा फायदा पार्टी को मिलेगा।

मोदी लहर के बाद नहीं मिली सफलता
पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद दूसरी बार प्रदेश कांग्रेस की कमान पूर्वांचल के किसी नेता को मिली है। 27 साल की उम्र में ही अजय राय ने नौ बार से कोअलसला के विधायक रहे ऊदल को हराकर पहली बार विधायक बने थे। उसके बाद कोअलसला में अजय राय की मजबूत पैठ बनी और पांच बार विधायक रहे।

लोकसभा चुनाव 2014 में वाराणसी संसदीय सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस द्वारा अजय राय को उम्मीदवार घोषित किया गया था। भले ही अजय राय चुनाव नहीं जीत पाए लेकिन कांग्रेस का विश्वास उनके ऊपर बना रहा। इसके अलावा साल 2019 में भी अजय राय को कांग्रेस ने वाराणसी संसदीय सीट से टिकट दिया था लेकिन इस बार भी सफलता हाथ नहीं लगी।

इसी तरह पिंडरा विधानसभा में अच्छी बैठ के बावजूद भी मोदी लहर में अजय राय का जादू नहीं चल पाया और साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अवधेश राय जीत हासिल किए। वहीं 2022 चुनाव में भी पुनः अवधेश राय को सफलता हासिल हुई जबकि अजय राय फिर हार गए।

सियासी जानकारों का कहना है कि मोदी मैजिक के सामने बड़े-बड़े नेता धराशाई हो गए। उसी में अजय राय का भी नाम शामिल है। हालांकि अजय राय संघर्ष करने से पीछे नहीं हटे और हमेशा पूर्वांचल की राजनीति में सक्रिय रहे। यही कारण था कि 2022 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ही यूपी में कमजोर स्थिति में पहुंच गई कांग्रेस ने अजय राय को प्रांतीय अध्यक्ष बना दिया था। प्रांतीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पूर्वांचल के 12 जनपदों में अजय राय काफी सक्रिय रहे। यह भी कहा जा रहा है कि इसी सक्रियता को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस द्वारा अजय राय को पूरे प्रदेश की कमान सौंपी गई है।

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