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लमही में शान से फहरा तिरंगा, RSS नेता बोले- मुंशी जी की आत्मा होगी प्रसन्न

मुंशी प्रेमचंद की जन्‍मस्‍थली लमही में शान से फहरा तिरंगा, RSS नेता बोले- मुंशी जी की आत्मा होगी प्रसन्न

वाराणसी, 31 जुलाई : उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनके जन्मस्थली लमही गांव में RSS नेता इंद्रेश कुमार द्वारा तिरंगा फहराया गया। मौजूद लोगों ने कहा कि लमही गांव आज भी उसी तरह है, जैसे 1936 में मुंशी जी उसे छोड़कर अलविदा कह गए थे। मुंशी जी ने देश के लिए अंतिम सांस ली। देश के लिए लिखते रहे और अंग्रेजों की आंख में खटकते रहे, लेकिन अंत तक हार नहीं माने। उनका सपना अपने तिरंगे को अपने घर में सिर्फ फहराने का नहीं था बल्कि तिरंगे को सलामी देने का था। भले ही उनके जाने के 11 साल बाद आजादी मिली हो लेकिन मुंशी जी के इस सपने को आज उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जन्म स्थली पर तिरंगा फहरा कर पूरा किया गया।

मुंशी जी की आत्मा प्रसन्न होगी

मुंशी जी की आत्मा प्रसन्न होगी

इस दौरान आरएसएस के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि मुंशी जी को अपने अंतिम समय में यह कसक जरूर थी कि काश देश आजाद होता तो अपने घर पर तिरंगा पहरा पाते। इंद्रेश कुमार ने कहा कि आज मुंशी जी की आत्मा जरूर प्रसन्न होगी कि उनके गांव में उनके जन्मदिन पर तिरंगा फहराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मुंशी जी के योगदान को दुनिया कभी भुला नहीं सकती है।

लमही बने राष्ट्रभक्ति के साहित्य की प्रयोगशाला

लमही बने राष्ट्रभक्ति के साहित्य की प्रयोगशाला

इंद्रेश कुमार ने कहा कि ईदगाह से गरीबी का दर्द, पंच परमेश्वर से न्याय, पूस की रात से किसान की चिंता, मंत्र से अमीरी और गरीबी का फर्क, कफन से नशे की आदत जैसे सामाजिक मुद्दों के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले मुंशी जी पूरी दुनिया के साहित्यकारों में सबसे ऊपर खड़े हैं और उनका नाम साहित्यकारों में सबसे ऊपर है। कहा कि मुंशी जी के कृतियों के अमर चरित्र आज भी लमही गांव में कहीं ना कहीं दिख जाते हैं। लमही गांव को राष्ट्रभक्ति के साहित्य की प्रयोगशाला बनानी चाहिए।

तिरंगा फहराने से पूरी हुई इच्छा

तिरंगा फहराने से पूरी हुई इच्छा

यह कार्यक्रम विशाल भारत संस्थान द्वारा आयोजित किया गया था। संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के लिए मुंशी जी का गांव लमही सदैव गवाही देता रहेगा। हम मुंशी जी के कृतज्ञ हैं कि उन्होंने सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदना को उस समय विकसित किया, जब अंग्रेजी हुकूमत का दौर था। अंग्रेजों की कड़ी निगाह लमही पर थी कि कहीं मुंशी जी का गांव बागी न बन जाए और तिरंगा न फहरा दे। आज इन्द्रेश कुमार ने पूरे गांव में तिरंगा फहराकर उनकी इच्छा का सम्मान किया। उनकी महान कृतियां हमारी पीढ़ियों को देश और समाज का पाठ पढ़ाती रहेंगी।
तिरंगा मार्च में अर्चना भारतवंशी, नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डा० मृदुला जायसवाल, ज्ञान प्रकाश सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

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