Varanasi : तीन सागरों और बारह नदियों के जल से व्यापारियों ने किया बाबा का जलाभिषेक
सावन के तीसरे सोमवार को तीन सागरों और बारह नदियों के जल से विश्वनाथ गली के व्यापारियों ने किया बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक
Varanasi, 01 अगस्त : सावन के तीसरे सोमवार को बाबा दरबार में दर्शन के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सोमवार दोपहर बारह बजे तक तीन लाख से अधिक भक्तों ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया। सावन के तीसरे सोमवार को विश्वनाथ गली सहित काशी के व्यापारियों ने भी परंपरागत तरीके से बाबा का जलाभिषेक किया। करीब आठ सौ व्यापारियों ने तीन सागरों और बारह नदियों के जल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर विश्व कल्याण की कामना किए। बाबा का जलाभिषेक करने के बाद व्यापारियों ने माँ अन्पूर्णेश्वरी दरबार में भी शीश नवाया।

चितरंजन पार्क से जल लेकर निकले व्यापारी
बाबा का जलाभिषेक करने के लिये विश्वनाथ गली व्यवासायी संघ द्वारा पहले से ही देश के विभिन्न भागों से 12 नदियों और तीन सागरों का जल अलग-अलग पात्रों में एकत्र कर लिया गया था। सुबह में व्यापारी और उनके परिवार की महिलाएं तथा बच्चे चितरंजन पार्क में एकत्र हुए। पार्क में से सभी लोग हर-हर महादेव का नारा लगाते हुए बाबा दरबार के लिए प्रस्थान किए। इस दौरान लोगों ने हाथों में त्रिशूल लेकर डमरू बजाते हुए बाबा दरबार पहुंचे। उसके बाद दशाश्वमेघ सिंह द्वार से सभी लोग विश्वनाथ गली होते ढुंढिराज गणेश प्वाइंट से मंदिर में प्रवेश किए।

लाइन में लग कर किए जलाभिषेक
मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद 20 व्यापारी 12 नदियों और तीन सागरों का जल लेकर बाबा के गर्भगृह में पहुंचे और जलाभिषेक किए। जलाभिषेक के बाद व्यापारियों ने माँ अन्नपूर्णेश्वरी के दरबार में शीश नवाकर विश्व कल्याण की कामना किया। इसके बाद विश्वनाथ गली स्थित साक्षी विनायक दरबार में व्यापारियों ने मत्था टेका और यहीं पर शोभायात्रा का समापन कर दिया गया। इस दौरान सुरक्षा के भी व्यापक प्रबध किए गए थे। जलाभिषेक करने वालों में विश्वनाथ गली व्यवसायी संघ के अध्यक्ष पं रमेश तिवारी, महामंत्री पं सजीव रतन मिश्र, उपाध्यक्ष पं कमल तिवारी, पं पवन शुक्ला, पं संदीप त्रिपाठी सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे।

इन नदियों से लाया गया था जल
विश्वनाथ गली व्यवसायी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि देश के विभिन्न भागों में स्थित बारह नदियों का जल अलग-अलग पात्र में लाया गया था। जिसमें गंगा, यमुना, सरस्वती, कृषणा, कावेरी, सिंधु, ताप्ती, अलकनंदा, गोदावरी, नर्मदा, ब्रह्मपुत्र, वरुणा आदि नदियों के जल को एकत्र किया गया था। इसके अलावा गंगासागर, अरब सागर और हिंद महासागर का जल भी मंगाया गया था। चितरंजन पार्क में 11 ब्राम्हणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा पाठ के बाद शोभायात्रा निकलाकर बाबा विश्वनाथ दरबार में पहुंचे और जलाभिषेक किए।
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