Samajwadi Party का नया पैंतरा, क्या सपा के लिए संजीवनी बनेगी जातिवार जनगणना? 24 फरवरी से शुरू होगा अभियान
समाजवादी पार्टी द्वारा वाराणसी से जातिवार जनगणना कराने के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसकी घोषणा की जा चुकी है, पार्टी के नेता तैयारी में जुटे हैं।

Samajwadi Party द्वारा भारतीय जनता पार्टी को घेरने के लिए जातिवार जनगणना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाने की घोषणा की गई है। इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 24 फरवरी को किया जाएगा और वाराणसी समेत आसपास के अन्य जनपदों के लोगों को जातिवार जनगणना के प्रति जागरूक करते हुए 5 मार्च को यह अभियान समाप्त होगा।

ब्लाक वार लोगों को किया जाएगा जागरूक
समाजवादी पार्टी के वाराणसी के नेताओं का कहना है कि 24 फरवरी को वाराणसी से जातिवार जनगणना के प्रति लोगों को जागरूक किए जाने के अभियान का शुभारंभ होगा। वाराणसी में 24 और 25 फरवरी को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह भी बताया गया कि यह कार्यक्रम ब्लाक बार आयोजित किए जाएंगे। समाजवादी पार्टी का जो भी नेता और कार्यकर्ता जिस ब्लॉक में निवास कर रहा है उस ब्लॉक में आयोजित कार्यक्रम में वह अपना सहयोग प्रदान करेगा। इसके लिए वाराणसी जिले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा तैयारी की जा रही है। यह भी कहा गया कि सूचना जारी किए जाने के बाद जिला स्तर के पदाधिकारियों द्वारा ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों और फ्रंटल संगठनों के लोगों को उसके बारे में सूचना दी जा रही है।

प्रयागराज में समाप्त होगा यह अभियान
इस अभियान की अगुवाई समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर राजपाल कश्यप द्वारा की जाएगी। वाराणसी में 2 दिनों तक लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के बाद 26 और 27 फरवरी को सोनभद्र में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोनभद्र में दो दिवसीय कार्यक्रम संपन्न हो जाने के बाद 28 फरवरी और 1 मार्च को मिर्जापुर जनपद तथा 2 और 3 मार्च को भदोही जनपद में यह कार्यक्रम आयोजित होगा। वाराणसी सोनभद्र मिर्जापुर और भदोही के लोगों को के प्रति जागरूक करने के बाद 4 और 5 मार्च को प्रयागराज में पार्टी के नेताओं द्वारा संगोष्ठी आयोजित की जाएगी और प्रयागराज में ही इस कार्यक्रम का समापन हो जाएगा।

चौपाई विवाद महज एक ट्रेलर था
इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र सिंह से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस की चौपाई पर बयान देते हुए महिलाओं और शूद्रों की राजनीति को हवा दी गई। उसके बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद शूद्र के मामले को लेकर बयान देते नजर आए। उसी समय यह बात स्पष्ट हो गई थी कि चौपाई विवाद महज एक ट्रेलर है और ट्रेलर से जब लोगों का रुझान पता चल गया तो समाजवादी पार्टी अब पूरी फिल्म बनाने में अर्थात जातिवार जनगणना नामक मुद्दे पर बीजेपी को घेरने का प्रयास कर रही है। समाजवादी पार्टी अपने फिक्स वोट बैंक यादव और मुस्लिम के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के वोटरों को अपने पक्ष में साधने की उम्मीद से यह अभियान चलाने जा रही है।

खास जनपदों का सपा ने किया है चयन
गजेंद्र सिंह द्वारा यह भी बताया गया कि जातिवार जनगणना अभियान चलाने के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा पहले चरण में जिन जनपदों को लिया गया है उन जनपदों में वर्तमान समय में समाजवादी पार्टी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। बीते चुनाव के आंकड़ों को देखें तो स्पष्ट होता है कि हार जीत का अंतर बहुत अधिक वोटों का नहीं था और कुछ सीटों पर तो काफी कम वोटों के अंतर से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में यदि यादव को छोड़कर अन्य ओबीसी जातियों के वोट और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के कुछ प्रतिशत वोट यदि समाजवादी पार्टी के पाले में आ जाता तो प्रत्याशी जीत सकते थे। अब यदि बात करें राम चरित मानस की तो स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के अलावा पिछड़ी जाति के अधिकतर लोगों द्वारा शूद्र और उक्त चौपाई को गलत ठहराया गया। ऐसे में समाजवादी पार्टी को पता है कि चौपाई विवाद में जिस तरीके से समर्थन मिला, उसी तरीके से यदि जातिवार जनगणना की बात उठाई जाए तो जनसमर्थन मिल सकता है। यही कारण समाजवादी पार्टी के नेता इस मौके को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते हैं। यदि समाजवादी पार्टी इस मामले में मतदाताओं को जागरुक करते हुए जातिवार जनगणना के पक्ष में कर लेती है और वर्तमान सरकार द्वारा जातिवार जनगणना न कराए जाने पर इन जातियों के वोट को काफी हद तक अपने पाले में करने में समाजवादी पार्टी सफल हो सकती है।
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