पूनम के पिता बोले - बेटी ने किया अच्छा प्रयास, 8 साल पहले बेटी के खेलने के लिए बेच दी थी भैंसे
छोटी सी लारवाही के चलते गोल्ड मेडल से चूक गई वाराणसी की पूनम यादव, पूनम के पिता बोले - बेटी ने किया अच्छा प्रयास
वाराणसी, 03 अगस्त : वाराणसी जिले के दादूपुर गांव की रहने वाली वेटलिफ्टर पूनम यादव कामनवेल्थ गेम में थोड़ी सी लापरवाही के चलते हार गई। सिग्नल मिलने से पहले ही पूनम ने बारबेल नीचे रख दिया। बेटी की एक चूक के चलते पूनम यादव के घर पल भर में सन्नाटा पसर गया। पूनम यादव के खेलते समय उसके घर के लोग टीवी पर उसे देख रहे थे। सिग्नल मिलने से पहले ही बारबेल नीचे रखने पर लोग चीख पड़े। मीडिया से बात करते हुए पिता कैलाश यादव ने कहा कि बेटी ने अच्छा प्रयास किया, हार जीत तो लगा रहता है।

भैंस बेचकर पिता ने बेटी को बनाया खिलाड़ी
पूनम के पिता कैलाश यादव ने बताया कि पूनम जब शुरुआती दौर में खेलने के लिए जाने लगी तो उनके पास पैसे नहीं थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पिता खेती बारी और पशुपालन करते थे। पिता ने बताया कि ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम 2014 में बेटी खेलने के लिए जाने वाली थी, लेकिन पैसा नहीं था। ऐसे में बेटी को कॉमनवेल्थ गेम खेलने भेजने के लिए पिता अपनी 2 भैंस बेंच दिए। ग्लास्गो कामनवेल्थ गेम में पहली बार पूनम कांस्य पदक जीतकर वापस लौटी थी। उसके बाद गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम 2018 में स्वर्ण पदक हासिल किया।
घर पर अभी भी पक्का रास्ता नहीं
वाराणसी जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर दांदूपुर गांव में पूनम यादव का घर है। पूनम यादव के घर जाने के लिए अभी भी पक्की सड़क नहीं है। खड़ंजा लगा हुआ है जो भी कई जगह से टूट गया है। पिता कैलाश यादव आज भी खेती बारी और पशुपालन करते हैं, जबकि छोटी बहन पूजा भी वेटलिफ्टिंग करती है। पूनम के दो भाइयों में एक भाई एथलेटिक तो दूसरा भाई हॉकी का खिलाड़ी है।












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