पत्नी के निधन के तीन दिन बाद Morari Bapu पहुंचे काशी, कथा और दर्शन पर धर्माचार्यों ने जताई आपत्ति
Morari Bapu: वाराणसी में एक ओर जहां भक्तजन रामकथा में लीन हैं, वहीं दूसरी ओर मोरारी बापू को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उनकी पत्नी के निधन के कुछ ही दिन बाद बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और रामकथा के आयोजन को लेकर विरोध तेज हो गया है।
शनिवार से रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुई 'रामकथा मानस सिंदूर' को लेकर संत समाज और धर्माचार्य नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। मोरारी बापू ने कथा से पहले बाबा विश्वनाथ के मंदिर में दर्शन किए, जिसने इस धार्मिक आयोजन को विवाद के घेरे में ला दिया।

सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या सूतक के दौरान ऐसे धार्मिक अनुष्ठान और मंदिर दर्शन धर्मशास्त्र के अनुरूप हैं? आलोचकों ने इसे सनातन परंपराओं का उल्लंघन बताया और संत समाज से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।
वैष्णव परंपरा की दलील, नियमों पर उठे सवाल
मोरारी बापू ने अपनी सफाई में कहा कि वे वैष्णव संत हैं और उनके लिए सूतक जैसी मान्यताएं लागू नहीं होतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न क्रिया करते हैं और न उत्तरक्रिया, केवल भजन और कथा को ही साधना मानते हैं।
हालांकि, अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने इसे 'धर्म के विरुद्ध आचरण' करार दिया। उन्होंने कहा कि जब राम स्वयं पिता के निधन पर शुद्धि करते हैं, तो कथावाचक को भी मर्यादा का पालन करना चाहिए।
सनातन की मर्यादा पर चोट बताई
इसी तरह काशी विद्वत परिषद, सुमेरुपीठ और कई शंकराचार्यों ने बापू के कृत्य को शास्त्रविरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि सूतक के दौरान मंदिर प्रवेश से देवतत्त्व का क्षरण होता है, जो धर्म की मर्यादा के विपरीत है।
शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद ने इसे 'भयानक पाप' कहा और बापू से प्रायश्चित की मांग की। उनका कहना था कि बिना 13 दिन की शुद्धि के मंदिर प्रवेश और कथा करना न केवल अनुचित है, बल्कि समाज को गुमराह करना है।
काशी के कई पंडितों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी इस पर आपत्ति जताई है। हास्य कवि दमदार बनारस की पोस्ट - "कहो मोरारी! ई का कइला, सूतक में बाबा के धइला..." - तेजी से वायरल हो रही है।
ज्योतिषाचार्य कृष्ण शास्त्री ने भी सवाल उठाया कि क्या धर्म के आचार्य वही हैं, जो सूतक में मंदिर जाकर कथा करें? धर्माचार्यों की चुप्पी पर भी तीखे सवाल उठे कि काशी की परंपरा क्या ऐसे कृत्य को स्वीकार करेगी?
बापू ने जहां वैष्णव परंपरा के अनुसार खुद को सूतक से मुक्त बताया, वहीं गोपाल मंदिर के शास्त्री विश्वंभर पाठक और धर्माचार्य विशेश्वर शास्त्री ने कहा कि शौच और सूतक सभी पर लागू होते हैं। धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु जैसे ग्रंथों का हवाला देकर उन्होंने स्पष्ट किया कि मसान जाने से भी सूतक लगता है।
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